Corona: फिर से आने की फिराक में है कोरोना, शुरू हो गई हैं नये वैरियेन्ट C.1.2 की आहटें

देश के लिये ही नहीं दुनिया के लिये भी नया खौफ ले कर आने की तैयारी कर रहा है कोरोना और उसने अपने नये वैरियेन्ट को काम पर लगा दिया है, हमें बहुत ही ज्यादा सावधान रहना होगा..

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कोरोना के बढ़ते हुए संक्रमण ने पूरे विश्व में भय और आतंक  फैला  दिया है. ठीक वैसे ही जैसे अफगानिस्तान  में तालिबान  का खौफ.  करोना का ये बदलता स्वरूप दिनोंदिन खतरनाक  होता जा रहा है.  डेल्टा वैरिएंट के बाद अब आ गया है C. 1.2
यह वायरस  कोविड-19 के बाकी वायरसों से अपेक्षाकृत अधिक खतरनाक है. यह  सी.1.2 इतना  संक्रामक  हो सकता है कि कोरोना वैक्सीन से मिलने वाली प्रोटेक्शन पर भारी पड़ सकता है यानि वैक्सीन के असर को बेअसर कर सकता है.
यह  दक्षिण अफ्रीका  सहित विश्व के कई अन्य देशों में फैलता जा रहा है. एक सर्वे के मुताबिक इस वैरिएंट  के जीनोम   मई माह में सर्वाधिक दक्षिण अफ्रीका में पाये गये हैं.  नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर कम्युनिकेबल डिजीज एंड क्वाजुलु नैटल रिसर्च इनोवेशन एंड सीक्वेंसिंग  जो कि दक्षिण अफ्रीका में स्थित है के  वैज्ञानिकों ने ये दावा किया है कि C.1.2 जो कि कोरोना का नया वैरिएंट है की जानकारी  इस वर्ष मई में हुई तब से लेकर अब तक यह खतरनाक संक्रमण कांगो, मॉरीशस, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, पुर्तगाल और स्विट्जरलैंड में अपने पैर फैला चुका है.
वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि दक्षिण अफ्रीका में Covid-19 के जितने संक्रमण आए इनमें एक C.1 भी था जिसकी तुलना  अब C.1.2 से करते हुए यह पाया गया कि इससे C. 1.2 ज्यादा म्यूटेट है और इसे ‘Nature of Interest’ की कैटेगरी में शामिल  किया गया है.
सूत्रों से मिली  जानकारी के अनुसार  दक्षिण अफ्रीका में C. 1.2 के जीनोम में दिन-प्रतिदिन इजाफा हो रहा हैं. यह  संक्रमण मई  माह में 0.2 प्रतिशत से बढ़कर जून में 1.6 प्रतिशत हो गया. जुलाई में यह बढ़कर दो प्रतिशत हो गया. अनुमानित रिपोर्ट  के अनुसार  ‘’यह देश में बीटा और डेल्टा वेरिएंट्स में वृद्धि की ही तरफ है.’’  उपासना राय जो पेशे से एक वैज्ञानिक हैं ने बताया कि यह वेरिएंट प्रोटीन की मात्रा में बढ़ोतरी के कारण मूल वायरस से काफी भिन्न है और पहले आए सारे कोविड संक्रमण के म्यूटेशन का नतीजा है.यह वैरिएंट  बड़ी तेजी से फैलता है.
कोलकाता के सीएसआईआर की वैज्ञानिक राय ने ये दावा किया है कि , ‘’इसका ट्रांसमिशन ज्यादा हो सकता है और इसके तेजी से फैलने की संभावना है. बढ़े हुए प्रोटीन में कई म्यूटेशन होते हैं जिससे यह रोग प्रतिरोधी क्षमता के कंट्रोल में नहीं होगा और अगर फैलता है तो पूरी दुनिया में टीकाकरण के लिए चुनौती बन जाएगा.” अकेले C.1.2 के आधे से ज्यादा सीक्वेंस में 14 म्यूटेशन पाये गये हैं. कुछ सीक्वेंस में थोड़े परिवर्तन भी मिले है.

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