Men: क्या पुरूष भी होते हैं चुगलखोर?

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आज तक इस उपाधि पर सिर्फ महिलाओं का एकाधिकार रहा है. कहा जाता है कि “इनके पेट में कोई बात नही पचती “, “बुद्धि घुटने में होती है”, “गॉसिप क्वीन” वगैरह वगैरह.
परन्तु आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि इस खूबी का जन्मदाता तो स्वयं ही एक पुरूष है. जी हाँ हैरान होने की आवश्यकता नही. महर्षि नारद जी के चरित्र व नाम से सभी वाकिफ हैं. नारद जी जो सबसे बड़े संचार वाहक थे. इन्हें सबसे बड़ा पत्रकार भी कहा जाता है या यूँ कहें कि सबसे बड़े चुगलखोर. इस प्रथा के महान जन्मदाता जो किसी भी देवी-देवता के पास संदेशवाहक के रूप में पहुँचकर कान भर दिया करते थे.हालांकि इस आदत का शिकार वे ब्ह्मा जी से शापित होने के पश्चात हुए और उनके द्वारा की गई चुगली का परिणाम सदैव कल्याणकारी रहा.
इनके विषय में एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है. जब नारायण लक्ष्मी जी को ब्याहने गये तो महान नारद जी ने गणेश जी से जा कर ये कह दिया कि आपको तो घर की रखवाली के लिये छोड़ गये हैं. वे साथ जाते तो बारात बुरी लगती “सूंड -सूंडाला,दुंद-दुंदाला उच्छला-सा पाँव, मोटो लाजे भीमकुमारी लागे कुणगापुर की नारी.”ऐसा कह कर उनको भड़का दिया था.
किसी दूसरे की बात कहीं ओर पहुँचा देना और फिर “नारायण..नारायण” कह देना कितना आसान हुआ करता था उनके लिये. आग लगाओ मगर प्यार से… हा हा हा है ना मज़े की बात तो ये पूरी तरह से ग़लत साबित होता है कि इस प्रथा को महिलाओं ने प्रारंभ किया.
चुगलखोरी एक ऐसी आदत है जो संसार का हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में करता है. हाँ हम मनुष्यों द्वारा चुगली सकारात्मक सोच के साथ नही की जाती मगर कुछ लोगों का अभिप्राय बुरा करना नही होता. बस ये एक ऐसी लत है जिसमें उसे आनन्द की अनुभूति होती है.
पुरूष किस प्रकार की चुगली करते हैं ये भी जानिए
* कुछ पुरूष सीधे-सीधे पत्नी की माँ को ये उलाहना देते पाए जाते हैं कि उन्होंने अपनी बेटी को कुछ सिखाया नही. “
*पत्नी कभी गाड़ी में जाने को कहे तो मज़ाक में कहना ” बाप से कहो गाड़ी भेज दे. “
* जब पत्नी पर बस नही चलता तो बच्चों के ज़रिये अपनी शिकायतों का उद्गार निकाला है.
* किसी दूसरे की तरक्की देखकर प्रसन्न होने की बजाय उसका इतिहास खोद डालना कि पहले फलाना ऐसा था, वैसा था, ख़ानदानी रईस थोड़े ही है नया-नया पैसा हुआ है. ऐसा करने से इनके ईगो को संतुष्टि मिलती है.
* दो महिलाओं को भी आपस में लड़वा देना एक पुरूष बड़ी आसानी से कर सकता है.
* आफिस में अपने बॉस या कुलिग पर टीका-टिप्पणी और बुराई करना. काम में गलती निकालना.
*यदि कोई महिला इनको भाव न दे तो उसके बारे में गलत व असंगत बातें कह करअपने अहम को संतोष देना. ये कहना कि “बड़ी ही पुरानी सोच की महिला है, पुरूषों से बात नही करती. शायद गवर्मेंट स्कूल से पढ़ी है. ” अरे भईया तुम्हें किस बात की तकलीफ है यदि वो पुरुषों से ज़्यादा मेल-मिलाप नही रखती, तुम अपना कार्य क्यूँ नही करते.
* कुछ पुरूष किसी गलत intention से नही परन्तु बस यूँ ही किसी की भी बात किसी को भी आदतन कह देते हैं बिना सोचे-समझे कि इसका क्या परिणाम हो सकता है. ऐसे पुरूषों को “मनमौजी चुगलखोर” कहा जाता है.
* दूसरी महिलाओं का attention पाने के लिये अपनी पत्नी की बुराई करना.
इस लेख का अभिप्राय ये नही कि समूची पुरूष जाति चुगलखोर है परन्तु सौ में से साठ प्रतिशत पुरूष ऐसे भी पाए जाते हैॉ तो कोई भी जुमला सिर्फ महिलाओं के लिए क्यूँ. जो भी कहिये पर इतने सारे महान कार्य करने के बाद भी पुरूष सदैव “बैचारा” ही कहलाती है और नारी..

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