परिन्दे सी उड़ने वाली लड़की

एक कविता उस खास लड़की पर .. वो लड़की जो सबसे अलग है..

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परिन्दे सी उड़ने वाली लड़की 
जब तुम्हारे कहने पर कदम बढ़ाए 
नदी सी चंचल बहने वाली 
जब तुम्हारी हल्की सी
बेरुखी से खामोश हो जाए 
दुनिया की भी परवाह न करने वाली 
जब तुम्हारे एक एक शब्द को
अपने ईष्ट के वचन समझे 
तुम्हारी खुशी के लिए कुछ भी कर जाए 
क्या  होता है ये एहसास 
हर लम्हा होता है पास 
कोई वो जो हो सबसे ख़ास 
जिसकी एक आवाज़ से
दिल खुशी से झूम जाए 
और फिर अचानक से वही खास 
नैनों को अश्कों का समुंदर बना जाए
अपनी बेरुखी से दिल को तार तार कर जाए 
क्या ही अच्छा हो वो लड़की
धरती के आगोश में समा जाए 
और एक अनकही अनसुनी दास्तां 
वक़्त और हालात की गर्दिश में खो जाए 
और उग जाए वहां एक गुलाब का पौधा 
जिस पर खिलेंगे उस लड़की के बिखरे अरमां 
बनकर ख़ूबसूरत  सुर्ख शोख गुलाब 
मरकर भी महकाते रहेंगे उसके दिल के ख़्वाब !!

 

 

किरु, तुम्हारे लिये छोड़े जा रही हूँ अपनी विश लिस्ट!

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