आराम से लो न चाय की चुस्की!

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 क्यों आपा-धापी में रहते हो
चाय की चुस्की तो आराम से ले लो 
जाने कब समय हमारे हाथों से निकल जाए
न जाने कब सुबह की किरण बादलों में छिप जाए
इसलिए आपा -धापी  न करो
मंद- मंद खुशबू के एहसास से
धीरे-धीरे चाय की चुस्की तो लो न
जीवन क्षणिक है, अप्रत्याशित है
इसके हर क्षण को प्रसन्नचित्त हो कर जियो ना 
बीता चुका बहुत कुछ और बहुत कुछ बाकी है
गलतियां  होती रहती हैं, यही राह  दिखलाती हैं 
जीवन इसी संघर्ष में बीतता जा रहा है
देर न करो, मेरी बात सुनो न
धीरे धीरे, हौले- हौले बस शांति से चाय की चुस्की लो न!
दुनिया एक मेला है लोग आते है जाते हैं
जान से ज्यादा चाहते हैं जिनको
क्या हम उन्हें रोक पाते हैं? 
दुनिया रैन-बसेरा है
पंख लगते ही चिड़िया भी घोंसले से उड़ जाती है 
वक्त  नही ठहरेगा
इस बात को जानते हो तुम
फिर कैसी जल्दी, क्यों हैरानी- परेशानी
गरम- खुशबूदार चाय है
मेरी बात मानो प्यार से चाय की चुस्की लो न |
जीवन के अंतिम पड़ाव में बस रह जाती है कुछ यादें, 
उन्हें अपने क्रोध और भारी- भरकम शब्दों से मलुन न करो
जीवन का नाम ही ईश्वर है, प्रेम है, उसका आनंद लो न 
जो आज तुम्हारे पास है उसे प्रेम- पाश में बांध लो
रिश्ता चाहे जो भी हो अपने मन एक छवि अंकित कर दो न
आज समय है, मौका भी है क्यों आपा-धापी  में लगे हो
मेरे पास बैठो आराम से चाय की चुस्की लो न !

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