Rakshabandhan Poetry: काश, तुम होते, भाई !

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भाई तुम जो होते
तुमको रक्षा सूत्र पहनाती ,
मंगल कामना करती
ईश्वर को शत-शत शीश नवाती
दे पावन आशीष तुम्हें
बढ़ाती तुम्हारे वंश का मान
सबसे प्रिय होते तुम मुझको
तुम होते घर की शान
चाह नहीं धन वैभव की
बस तुम होते भाई
रक्षा बंधन के शुभ दिन
मेरे मन में ये बात आई
प्रेम पाती से निज जीवन को,
ऐसे मैं सफल बनाती
कुंकुम,अक्षत का तुमको तिलक लगाती
धागा ये विश्वास का तुमको
मैं पहनाती
हो तुम मेरे रक्षक ये
वचन भी याद दिलाती
काश! तुम होते भाई,,,,

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