क्या था आखिर शिविना का सच? (part1)

"ल-ल-लेकिन आप लोग  यहाँ  क्यूँ  आए  हैं. " कंगना  ने लड़खड़ाती  ज़बान  में कहा.. कंगना  के हाथ-पैर ठंडे हो गए.  उसे पसीना आ रहा था.

0
37
कंगना जल्दी-जल्दी रात के भोजन की तैयारी कर रही थी. शुभांशु के घर आने का समय  हो गया था.  रोटी बनाते-बनाते कंगना घड़ी पर नज़रें जमाए हुए थी.  सारे कार्य हो गए.  शुभ अब तक घर नही आए थे.
 कंगना मन ही मन कहने लगी…..
“कहाँ रह गए शुभ.  तुम इतनी देर कभी नही करते.  तुम्हें तो भूख भी बर्दाश्त  नही होती.  बिल्कुल बच्चों की तरह बेहाल हो जाते हो यदि भोजन समय  पर न मिले तो. ” प्रतीक्षा  करते-करते कंगना सोफे पर बैठ गई. पास ही फोटो फ्रेम में शुभ और कंगना  के विवाह की तस्वीर लगी थी. हाथों में ले कर कंगना फोटो  को, निहारने लगी और पुरानी यादों में खो गई… एक वर्ष  पूर्व ही उसका विवाह हुआ था शुभ से.
” कितनी बार कहा है शुभ, उबले आलू ना खाए नमक लगा कर. बस पाँच मिनट  दो ना मुझे अभी खाना परोस देती हूँ. कहने के, बाद सब्र नही तुम्हें… उफ्फ. “
“अरेरे…  क्या हुआ कनु (कंगना) तुम बताओ ना.  कौन-सा एक आलू  से पेट भरने वाला  है, मेरा… “
कंगना आँखें तरेर कर देखते हुए रोटी बेल रही थी.
“हा हा हा…. यूँ रूठो ना हसीना  मेरी जान  पे बन जाएगी. ” शुभाशु कंगना को छेड़ते हुए गीत  गुनगुनाने लगता  है.
पीं -पीं.. तभी बाइक का हॉर्न  बज  उठा…कंगना ख्यालों  से बाहर आ गई.  शुभ…… कह कर कंगना सोफे से उठ कर बॉलकनी  में गई.  शुभ तब तक अंदर सीढ़ियाँ  चढ़ने लगे. कॉलबेल  बजी ..कंगना ने तेज़ी से जा कर दरवाज़ा खोला.
“क्या हुआ प्रतीक्षा कर रही थी? “
“ना ना ना..  भला मैं क्यूँ  करने लगी इंतज़ार, मैं तो सास-बहू का सीरियल देख रही थी. “
“हा हा हा..  अच्छा बाबा..  गुस्सा  मत करो अब. सौरी बाबा.. थोड़ा लेट  हो गया… काम था आफिस में. “
“हम्मम.. चलो कोई बात  नही तुम मुँह-हाथ धो  कर फ्रेश हो जाओ मैं डिनर लगाती हूँ. “
“अरे रुको ना कुछ देर,  अभी भूख नही मुझे.. थोड़ी देर बाद करते हैं डिनर.  तुम बैठो ना मेरे पास. “
कंगना अचरज  में पड़ गई कि ये शुभ को क्या हो गया है.  भूख लगने पर घर सर पर उठा लेने वाले शुभ आज बिल्कुल  शांत हैं.  Strange…..
तभी शुभ ने चुटकी बजाते हुए कहा “Hey Baby  क्या हुआ….एनी प्रॉब्लम.?”
“हम अ अ… नो. नॉट एट  ऑल. “
कंगना ने हंसकर बात को टाल तो दिया पर उसके मन में विचारों  की उधेड़-बुन चल रही थी कि आज शुभ को क्या हुआ है तबीयत तो ठीक  है ना शुभ की.  ऐसा सोच ही रही थी कि फिर से कॉल बेल बजी. कौन होगा अभी… यही सोचते-सोचते कंगना ने गेट खोला तो एक पल के लिये ठिठक गई. शिविना.. …तुम…… इस वक्त. ?सब कुछ ठीक तो है ना? “
“हाँ भाभी सब ठीक है.”
“तो इतनी रात को कैसे आना हुआ. “
कहते-कहते कंगना को लगा कि  उसे ऐसा नही कहना चाहिए  था पर कह दिया.
“बाहर क्यूँ खड़ी हो अंदर आओ. “
“भाभी आज मन बहुत उदास था.  घर वालों की बहुत याद आ रही थी और आपके हाथ के खाने की भी. “
कंगना मुस्कुराने लगी.
“अच्छा किया जो चली आई तुम. इसे अपना मायका  ही समझो. “
“वही समझ कर तो आई हूँ  भाभी. “
कहते हुए शिविना ने एक बड़ा सा बैग़ हॉल में रख दिया.
“अरे… इसमें क्या है शिविना. “
“अरे मैं तो बताना भूल गई  आपको ये टेप-रिकॉर्डर है भाभी.  शुभ भईया को फोन किया था मेंने क्यूँकि नया शहर है मैं जानती नही कहाँ क्या मिलता है,  तो भैया के साथ जा कर ही खरीदा इसे. “
“अच्छा…. ” (कंगना एक क्षण के लिये बिल्कुल चुप हो गई)
फिर बात को संभालते हुए कहा “हाँ बहुत अच्छी बात है ये तो. ” कहकर शुभ की ओर मुड़ी जो पहले से ही कंगना को घूर रहा था.  कंगना शुभ की नजरों से नज़र बचा कर रसोई में चली आई.
“भाभी बहुत भूख लगी है. “
“हाँ डिनर तैयार है कर लो. “
“आहा… रसम… आपके हाथ के खाने का तो जवाब  नही भाभी,,, जी चाहता है इन हाथों  को चूम लूँ. “
कंगना मुस्कुराई पर बहुत फॉर्मल तरीके से.  जल्दी-जल्दी डिनर का काम निपटा कर कंगना सर दर्द का बहाना करके रूम में सोने आ गई.  शुभांशु हॉल में टी वी देख रहे थे, वहीं शिविना भी बैठी टी वी देखते हुए शुभ से बतिया  रही थी.
गरमी के दिन थे पर यहाँ इतनी गरमी नही होती बस  टेबल  या स्टैंडिंग फैन से काम चल जाता है.  कंगना  को बेचैनी हो रही थी… पसीने-पसीने हो गई  थी वो.
कुछ देर करवटें लेने के बाद वो उठकर हॉल में टेबल फैन लेने गई तो देखा शुभ हॉल में बैठे मेट्रेस की एक ओर लेटे टी वी ताक रहे हैं और दूसरी ओर शिविना उनके विपरीत गहरी नींद में सोई हुई है.  कंगना ये सीन देख कर अवाक् थी. पर तब भी उसने कुछ कहा नही बस चुपचाप  फैन उठाकर रूम में चलती बनी.
अब शुभ समझ गया था कि कंगना थोड़ी परेशान है. वह भी पीछे-पीछे रूम में चला आया.
“क्या हुआ जान परेशान लग रही हो. ‘
“नहीं तो… मुझे नींद आ रही है शुभ,, प्लीज़  सोने दो. ” कहकर कंगना  मुँह घुमा कर सो गई.
सुबह नाश्ते पर शिविना ने कंगना के बनाए आलू पराँठे  की तारीफ़ की जिसमें शुभ ने भी हाँ में हाँ मिलाई.  पर कँगना कुछ और ही सोच रही थी.
आदतन शुभ ने आफिस जाते वक्त कंगना  को हग  किया और आफिस  चला गया.
“भाभी जब-जब आपके हाथों का खाना खाती हूँ  मुझे मॉम  की याद आ जाती है.  वे भी आपकी तरह बड़े प्यार से आवाज़ लगाती है …अरे तनिषा…सॉरी शिविना ..आ कर खाना खा लो बेटा वर्ना तुम्हारे  पेट में दर्द होने लगेगा. ” शिविना ने बड़ी सफाईे से अपने  नाम की ग़लती को सुधारा. ऐसा उसने पहले भी कई बार किया था परन्तु तब कंगना ने इतना  गौर नही किया था पर आज उसने पूछ ही लिया.
“शिविना एक  बात पूछूँ… सच बताओगी?
“हाँ भाभी  पूछिए ना. “
“तुम्हारा असली नाम  तनीषा है ना. मैंने कई बार तुम्हारे  मुँह से सुना है ये नाम. “
कुछ पल का सन्नाटा फिर शिविना ने कहा -“हाँ भाभी पर मुझे ये नाम पसंद नही इसलिए नाम बदल लिया.  तीन साल से घर नहीं गई हूँ मैं. माँ की बहुत याद आती है मुझे. “
“तो क्यूँ नही जाती किसने रोका है तुम्हें.?”
“किसी ने नही पर मेरी कुछ मजबूरियाँ हैं भाभी नही जा सकती… किस मुँह से जाऊँ… कैसे सामना  कर पाऊँगी उनकी नजरों का. “
“अरे माँ माँ होती  है. अपने बच्चों  की हर ग़लती  माफ कर देती है.. तुम जाते ही उनके  गले से लग जाना.. वे कुछ नही कहेंगी तुम्हें.. देखना. “
“हाँ भाभी पर मैं नहीं जा सकती… ” कहते हुए शिविना  की आँखें भर आई और वो जल्दी से उठ कर वॉशरूम  में चली गई.
कंगना काम समेटते हुए सोच रही थी कि आखिर ऐसी क्या बात  है जो ये लड़की अपने घर वापस नही लौट  सकती.
दोनों  हॉल में साथ बैठी थी. टीवी पर माधुरी दीक्षित  का गाना चल रहा था.. एक-दो-तीन.. तेज़ाब  फिल्म का.  शिविना  ने चहकते हुए कहा “भाभी मुझे भी नृत्य  का बहुत शौक है.  मैंने एक डांस ट्रुप  ज्वॉइन  किया था और कई शो किए.  एक शो में मैं दुबई गई  थी और बस वहीं से मेरी ज़िंदगी बदल गई… “
कहते-कहते शिविना रूक गई.  कुछ उदास दिख रही थी.  कंगना  को लगा कि शिविना  आगे कुछ बताएगी पर वह चुप रही.
“क्या हुआ था ऐसा शिविना….बताओ. ” कंगना  ने चुप्पी  तोड़ी.
“वहीं तो नही बता सकती.  बस यूँ समझ लीजिए कि एक ऐसे जाल में फंस गई  वहाँ जाकर कि अब घर-वापसी का कोई रास्ता नही.
शिविना को उदास देखकर कंगना ने उसे फिर ज़्यादा  कुरेदना  उचित नही समझा परन्तु अब कंगना के मन में हलचल होने लगी थी कि आखिर ऐसी क्या बात हो गई होगी कि शिविना अपने घर नही लौट सकती.
कंगना एक दयालु प्रवृति की महिला है और शिविना का दर्द उसे दुखी कर रहा था.
कुछ देर बाद कंगना ने फिर से पूछ ही लिया कि “आखिर ऐसा क्या हुआ जो तुम घर नही जा सकती  अपने. “
शिविना ने कहा “भाभी मैं ज़्यादा कुछ नही बता सकती बस इतना जान लीजिए कि कुछ ऐसे लोगों  के चंगुल में फंस गई  हूँ  कि अब मैं घर वापस कभी नही जा सकती.”
“अब चलती हूँ  भाभी कुछ काम निपटाने हैं.  अरे हाँ  भाभी मुझे आपकी एक सुंदर-सी साड़ी चाहिए आज एक पार्टी में जाना है.  वही अंकल के घर पर पार्टी है जिनके बारे में कहा था ना आपको. “
कंगना को याद आया कि शिविना ने अपने किसी अंकल के बारे में बताया था कुछ दिन पहले कि उसके पिताजी के मित्र हैं.
“हाँ..हाँ..   तुमने बताया था.  ठीक है चलो वॉर्डरोब  में देख लो जो पसंद है ले जाना.  पर तुम तो ड्रेस भी पहन सकती हो कोई ससुराल का फंक्शन  थोड़े ही है. ” कंगना ने हंसते हुए कहा.
“हा हा हा..  हाँ सही कहा आपने पर  वे अंकल  मुझे बेटी की तरह मानते हैं और उन्होंने  ही मुझे विशेष तौर पर साड़ी  पहनकर आने को कहा है कि पार्टी में बहुत से अच्छे लड़के भी आएगें . वो मेरे लिए एक सुयोग्य  वर ढूँढ़ना चाहते हैं. “
कहकर शिविना मुस्कुराने लगी.
कंगना ने उसे एक सिल्क बंधेज साड़ी पैकेट  में डालकर दे दी.  शिविना ने कंगना को थैंक्स  कहकर गले लगाया और अपनी स्कूटी स्टार्ट करके चली गई.
          कंगना शिविना को दूर तक जाते हुए देखती रही जब तक स्कूटर आँखों  से ओझल न हो गया. शिवरात्रि  आने वाली थी दो दिन बाद. कंगना  ने सारी तैयारी की पूरी श्रद्धा से. वह शुभांशु  से अत्यधिक  प्रेम करती थी.  इसलिए  अमर सौभाग्य  के लिए उसने व्रत रखा.  लाल साड़ी में वह बहुत सुंदर लग रही थी. शुभांशु  उसके इस रूप  को  देखकर मोहित  हुआ  जा, हाथा. तभी कॉल बेल बजी. शुभ ने गेट  खोला  तो शिविना  थी सामने.
कंगना ने देखा तो उसे झटका लगा. शिविना ने वही साड़ी  पहनी हुई थी जो कंगना  सीने उसे दी थी. शिवानी कंगना  की भाव-भंगिमा देख समझ गई और उसने मुस्कुराते  हुए कहा कि “भाभी  मुझे अभी कुछ देर में अंकल के घर जाना है ना. शाम को, पार्टी  जो है. आपसे कहा था ना तो सोचा आपलोगों से मिलते  हुए वहाँ चली जाऊँगी.”
यह सुनकर कंगना सामान्य हो गई और सोचने  लगी कि वह कुछ ज़्यादा  ही सोचने  लगती है. उसने शिविना से कहा ” तुम बैठो  मैं तुम्हारे  लिए  लंच  लगा देती हूँ.  तुम और शुभ  कर लो लंच . मेरा तो व्रत  है ना. “
“रूकिए भाभी मेरा भी व्रत है मैं कुछ नही  खाऊँगी  सिर्फ चाय पीऊँगी . “
“अच्छा?….तुम्हारा भी व्रत है? “
यह कहकर कंगना किचन  की ओर मुड़  गई. चाय बनाते समय फिर उसके हृदय में हलचल होने लगी. दिमाग सोच रहा था कि जब शिविना को पार्टी  में जाना  है तो उसने व्रत  रखा ही क्यूँ  है? “
सोचते- सोचते  चाय में उबाल  आ गया. कंगना ने शुभ  को खाना  और शिविना  को चाय  सर्व  की. तभी शुभ ने कहा “कंगना शिविना  भी रात को हमारे साथ  डिनर  कर लेगी पार्टी से लौटना पर क्यूँ  क्या कहती हो?”
कंगना को ये दूसरा झटका लगा हालांकि  वह ये जानती थी कि शुभ  आवभगत  के मामले में हद से ज़्यादा  व्यवहारिक  है परन्तु शिविना  की इतनी  परवाह  करना उसे सहन नही हो रहा था. ” कंगना  ने ज़बरदस्ती  सहमति  में  सर हिला  दिया.
कुछ देर में शिविना चली गई. रात को लौटी और सबके साथ डिनर किया. सुबह आफिस जाते वक्त शुभ ने कंगना  को कहा कि किसी कारणवश इस महीने सारी देर से मिलेगी. वह प्रयास  कर रहा है पर यदि कंगना  को उचित  लगे तो वह एक बार शिविना  से मदद  ले फिर अगले महीने वे लोग  शिविना  को पैसे  लौटा  देखें.
शुभ  के आफिस जाने के बाद कंगना  ने शिविना  को सारी बात बताई तो वह मुस्कुराने  सही कहा “भाभी आपको इतना संकोच  करने की कोई आवश्यकता  नही. कितने चाहिए  बस हुकुम  कीजिए.” वह आगे कहने लगी कि ” अरे मैं कोई पराई थोड़ी  हूँ  आपलोगों  की अपनी  हूँ. पहले भी तो भैया को दिए थे……  “
कहते-कहते शिविना  को लगा  की ये वो क्या  कह  गई तो वह चुप हो गई.
कंगना  भाँप गई बात को और उसने पूछ लिया  कि क्या  शुभ  ने पहले भी पैसों  की मदद  ली है उससे. जवाब में शिविना  ने हाँ कहा. शिविना  सुनकर  स्तब्ध  रह गई  कि शुभ  ने इन पैसों  के बारे  में उसे कुछ नहीं  बताया परन्तु वह चुप रही. कंगना ऊपर से शांत थी अंदर विचारों  के समंदर में ज्वार-भाटा  उत्पन्न  हो चुका था.
               अब कंगना शुभ की हर बात पर ध्यान देने लगी. कड़ी से कड़ी जुड़ी नज़र  आ रही थी जिसे वो चाह कर  भी अनदेखा  नही कर सकती थी. उसे अपनी मकान मालकिन की बात रह-रह कर याद  आने लगी.
उसका मन व्याकुल  हो उठा लगा कि शुभ उसके बातों  स्रोत की तरह  फिसलता  जारी है. कभी झूठ  न बोलने  वाला शुभ  अब कंगना  से दिन-रात  झूठ  बोलने  लगा  है.
रात को शुभ से बिना कुछ बात किए काम निपटा कर कंगना  जल्दी सो गई. शुभ उसे नोटिस  तो कर रहा था परन्तु  कुछ कहने की हिम्मत  न जुटा  सका. सुबह  शुभ आफिस चला गया  और कंगना  पूजा  के बाद अपने लिए चाय बनाने  ज्यूँ  ही रसोईघर  में घुसी कॉल  बेल बज  उठा.
“इस वक्त  कौन होगा” ये सोचते  हुए  कंगना  ने दरवाज़ा  खोला  और सी़ामने चार  अजनबी  लोगों  को देखकर डर गई. वे लोग उसके लिए अनजान थे. उसमें से एक ने कहा कि “क्या ये घर शुभांशु  जी का है? “
“जी हाँ.. पर आु़प कौन? “
“हम हैं सीआईडी पुलिस स्पैशल  ब्रांच. “
यह सुनकर  कंगना  सकपका  गई…. “सससससस… सीआईडी? “
“ल-ल-लेकिन आपलोग  यहाँ  क्यूँ  आए  हैं. ” कंगना  ने लड़खड़ाती  ज़बान  में कहा.
कंगना  के हाथ-पैर ठंडे हो गए.  उसे पसीना आ रहा था.
“आप उनकी पत्नी  हैं? “
“जी-जी-जी”
“आपके पति कहाँ है उन्हें  बुलाईये”
” जी वो अभी घर पर नही आफिस गए  हुए  हैं. “
” अच्छा… इसे पहचानती हैं? “
यह कहकर उस हट्टे-कट्टे  आदमी  ने एक  फोटो कंगना को दिखाते  हुए  पूछा.
” जी…ये… ये शिविना  है मेरे पति के मित्र  की रिश्तेदार शिविना. “
“अच्छा पर इसका नाम  तो तनीषा है शिविना  नही. “
“ओहहह…”  कंगना ये जानती थी पर कुछ कह नहीं पाई. उन दिनों मोबाइल  फोन नहीं हुआ करते थें
“आप अपने पति को कॉल  करके यहाँ  बुलाईए. तब तक हमें अपना काम  करने दीजिए.
“जी कैसा काम? “
“घर सर्च  वॉरेंट  है हमारे पास. आपसे अनुरोध  है कि हमारे कर्तव्य  में दखल  न देते हुए आप कोअॉपरेट करें.”
” जी…परन्तु हुआ क्या है.प्लीज़ मुझे बताईए .”
“मैडम अभी शहर में दो दिन पहले जिस बड़े बिज़नेसमैन की हत्या हुई है उसमें हत्या  की साजिश  में ये मोहतरमा (शिविना) भी शामिल  हैं. “
सुनकर कंगना  के पैरों  तले जमीन  खिसक  गई. उसके साथ  शुभ  नही था उस वक्त परन्तु उसने स्वयं को संभाला  और आफिसर्स  को घर तलाशी की पूरी स्वतंत्रता  दी. तब तक कंगना  ने शुभ  को फोन करके इस बारे में सूचना दे दी. जब तक शुभ पहुँचा तू तक उसका आधा से अधिक घर बिखर चुका था.  आलमारी का सामान और कपड़े ज़मीन  में बिखरे पड़े थे. कंगना एक कोने में बैठी यह सब देख रहा था मगर सकते  में थी. उसे कुछ भी समझ नही आ रहा था कि ये क्या  और क्यूँ  हो रहा है.
जैसे ही शुभांशु घर में दाखिल  हुआ कंगना दौड़कर उससे लिपट  गई और रोने लगी. वो काफी डरा हुई थी.  हालांकि आफिसर्स  जो कि सिविल  ड्रेस में थे उन्होंने कंगना  के साथ कोई सख्ती का व्यवहार  नही किया था.  बस कंगना दहशत में थी.  सारा घर उलट पलट कर देने के बाद भी उनको ऐसा कोई सबूत या कोई संदिग्ध वस्तु नही मिली कि वे उन पर सख्ती करते.  बस कंगना  के रूम का बेड  बाकी रह  गया  था खंगालना जिस पर उनका  ध्यान  नही गया  था.
उन्होंनेे शुभांशु  और कंगना  से पूछताछ  की.  उनलोगों  का व्यवहार  कंगना  और शुभ  के साथ कठोर नही था. कंगना  ने उनके लिए  चाय बनाई और बहुत  सामान्य  अंदाज़  में उनसे प्रेम  किए तनीषा  यानी शिविना  के विषय  में. तत्पश्चात  आफिसर ने कहा कि आपके रूम का बेड  खोल दीजिए शुभांशु जी ताकि हम अपनी ड्यूटी  को पूर्ण रूप से अंजाम  दे सकें.
(क्रमशः)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here