मुझे  अब  डर  नहीं  लगता! (एक नज़्म)

(सोशल मीडिया पर साहित्य)

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मुझे अब डर नहीं लगता…
किसी के दूर जाने से,
ताल्लूक टूट जाने से,
किसी के मान जाने से,
किसी के रूठ जाने से,
मुझे अब डर नहीं लगता।
मुझे अब डर नहीं लगता…
किसी के आज़माने से,
किसी को आज़माने से,
किसी को याद आने से,
किसी को भूल जाने से,
मुझे अब डर नहीं लगता!
मुझे अब डर नहीं लगता…
किसी को छोड़ देने से,
किसी के छोड़ जाने से,
ना शम्मा जलाने से,
ना शम्मा बुझाने से,
मुझे अब डर नहीं लगता।
मुझे अब डर नहीं लगता…
अकेले मुस्कुराने से,
कभी आँसू बहाने से,
ना इस सारे ज़माने से,
हक़ीक़त से फसाने से,
मुझे अब डर नहीं लगता!
मुझे अब डर नहीं लगता…
किसी की नारसाई से,
किसी की पारसाई से,
किसी की बेवफ़ाई से,
किसी दुख इन्तेहाई से,
मुझे अब डर नहीं लगता!
मुझे अब डर नहीं लगता…
ना इस पार रहने से,
ना उस पार रहने से,
ना अपनी ज़िंदगी से,
ना इक दिन मौत आने से,
मुझे अब डर नहीं लगता !

(अज्ञात)

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