सुना तुमने, आई लव यू !

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गुस्सा शांत हुआ तुम्हारा? या अब भी गुस्सा हो? देखो मैं जैसा पहले था…वैसा अब भी हूँ और हमेशा ऐसा ही रहूँगा सोनिया !
पीयूष ये कह कर चुप हो गया |
सोनिया उसके चेहरे के हाव-भाव देख रही थी | एक तो पहले ही उसके हृदय में उथल-पुथल मची थी | ऊपर से पीयूष की बातों ने उसके दिल में असहनीय वेदना उत्पन्न कर दी | वो रोने लगी…मोटे-मोटे आँसू ढुलककर उसके गालों पर उभर आये थे | वो सुबक रही थी |
पीयूष को रोना–धोना बिल्कुल पसंद नही था – तुमने रोना बंद नही किया सोनिया तो मैं अभी चला जाऊँगा यहाँ से |
सोनिया ने रोते-रोते कहा .-हाँ..हाँ चले जाओ | किसने रोका है? वैसे भी तुम्हे मैं पहले की तरह पसंद नही रही और कहते-कहते वह फिर से फूट-फूटकर रोने लगी | बिल्कुल बच्चों की तरह |
पीयूृष को उसके इस भोलेपन पर हँसी आ गई – हे भगवान !!
अब भगवान को क्यूँ याद कर रहे हो | जो कहना है मुझसे कहो पीयूष, कहूँ.? –  पीयूष ने पूछा |
पीयूष उसके भोले-भाले चेहरे की तरफ देख कर ये सोच रहा था कि कितनी मासूम है सोनिया…कोई छल-प्रपंच नही | एकदम हिरणी जैसी सुंदर,फूल जैसी कोमल और उसकी बातें बहुत प्यारी और चटपटी | उसकी इन्हीं बातों पर पीयूष अपना दिल हार गया था |
देखने में सोनिया औसतन सुंदर थी | जो भी पहनती फबता है उस पर | कोई दिखावा नही…अपनी भूमि से जुड़ी | उसके यही गुण उसके व्यक्तित्व को खूबसूरत बनाते थे | जो भी उससे एकबार मिल लेता उसे भूल नही पाता था |
जब इतनी सारी खूबियों वाली प्रेयसी मिली है उसे तो वह उसे कैसे नज़रअंदाज़ कर सकता है |
इधर सोनिया अब भी रो रही थी और जो मन में आ रहा था, कहे जा रही थी ..
पीयूष का हृदय भर आया | वो ये जानता था कि इस बार भी वो अपनी सोनिया को मना लेगा क्यूँकि सोनिया उससे बहुत प्रेम करती है खुद से भी ज़्यादा | यही कारण है कि वो उसे लेकर थोड़ी पज़ेसिव हो रही थी |
तुम जो सोच रही हो ऐसा कुछ भी नही है | अरे यार वो मेरी क्लाइन्ट है | बिज़नेस को बढ़ाने के लिये कभी-कभी क्लाइ़नाट को लंच पर आमंत्रित करना पड़ता है |  तुम जानती तो हो सोनिया | कोई पहली बार ऐसा नही किया | हाँ इस बार की क्लाइन्ट वो सुंदर महिला थी | जिसके साथ तुमने मुझे होटल पैराडाईज़ में लंच करते देखा | जहाँ तुम भी अपनी सहेलियों के साथ आई हुई थी | न आव देखा न ताव बस नाराज़ होकर पैर पटक कर चल दीं तुम |
अब तुम्हें मनाने के लिये क्या करूँ? मुर्गा बनूँ,,कुकड़ु करूँ या कुछ बोलूँ? ..बोलूँ?  – फिर कुछ देर दोनों के बीच चुप्पी छाई रही |
अब कहते क्यूँ नही?  अब क्या मुँह में दही जम गया है क्या जो कहने पर रायता हो जायेगा? – सोनिया ने खीझ कर कहा |
हा हा हा हा…हे भगवान ..क्या करूँ मैं इस लड़की का?
हाँ…हाँ अब मैं जान से लड़की हो गई | एकदिन तो मुझे पहचानोगे भी नही.– पीयूष को उसकी बातों पर गुस्सा नही प्यार आ रहा था |
अब कहोगे कि मैं ही चली जांऊँ?
कहूँ..?  हाँ कहो…कहूँ…हाँ कहो ना……
हा हा हा हा…आई लव यू…आई लव यू…आई लव यू…और कहूँ?
सोनिया पीयूष की आँखों में देख रही थी,,,रोते-रोते उसके होंठों पर हँसी आ गई और उसने शरमा कर नजरें झुका ली |
पीयूष ने शरारत से कहा– अब तुम कहो |
ना ना ना…मैं नही कहूँगी | तुमने मुझे तड़पाया ना,रूलाया भी |
जाओ अब मैं भी तुम्हारी बात नही मानूँगी – सोनिया ने अपनी मुस्कुराहट छुपाते हुए कहा |
अच्छा…नही कहोगी | तो मेरी कसम खा कर ये कह दो कि तुम मुझसे प्रेम नही करती – पीयूष ने शरारती अंदाज़ में कहा |
सोनिया ने तपाक से कहा – मैं कसम-वसम नही खाती |
आहा हा पकड़ी गई ना….पकड़ी गई तुम्हारी चोरी मैं कसम-वसम नही खाती | इसका मतलब है तुम मुझसे बहुत प्रेम करती हो सोनिया ! -उसने सोनिया का चेहरा अपनी दोनों हथेलियों में सँभाल लिया जैसे कोई ओस में भीगा ग़ुलाब रखता है |
पीयूष के इस अनुराग से सोनिया का हृदय द्रवित हो उठा |
उसने पीयूष कहा.-आई लव यू,आई लव यू,आई लव यू !
पीयूष उसकी इस मासूमियत पर मुस्कुराने लगा | सोच रहा था कि कुछ चीज़ें और लोग अपने रॉ फॉम में ही खूबसूरत होते हैं जिसे सदैव वैसा ही रहना चाहिये |
सोनिया पीयूष के सीने से लगी ये सोच रही थी कि उसे पीयूष जैसा हमसफर मिला |
है न, ये तीन शब्द जादूगर…
आई लव यू.!!

(अन्जू डोकानिया)

 

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