ओवैसी के साथी प्रकाश आंबेडकर ने कहा – वन्दे मातरम गाने वाले हैं एंटी इंडियन

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    संविधान निर्माता भीमराव आंबेडकर के पौत्र हैं प्रकाश आंबेडकर. ऐसा लगता है कि उन्हें अब अपने दादा जी के सम्मान की कोई फिकर नहीं. चलिये यदि दादा जी के सम्मान की चिन्ता नहीं तो राष्ट्र के सम्मान की तो होनी चाहिये थी? दुर्भाग्यपूर्ण है कि संविधान में ऐसे लोगों के लिये कोई रोक-टोक नहीं रखी गई है जो राष्ट्रप्रेम से हीन हो कर राष्ट्र के सम्मान से जुड़े किसी भी अस्तित्व की परवाह नहीं करते. जब समाज के तथाकथित बड़े लोग ऐसा बोलेंगे तो आम आदमी से क्या उम्मीद की जा सकती है.

    बहाना ये है आम्बेडकर के पास कि अगर हमारे पास पहले ही राष्ट्रगान है तो राष्ट्रगीत की ज़रूरत क्या है?

    कोई प्रकाश आम्बेडकर को बताये कि वन्दे मातरम राष्ट्र का प्रथम राष्ट्र गीत है. इसको लिखा ही गया था भारतीय स्वाधीनता संग्राम के सेनानियों को एक सूत्र में बाँधने के लिए. वन्दे मातरम ने तो सारे हिन्दुस्तान को एक कर दिया था. इसे गाकर ही भारतीय क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश एम्पायर से टक्कर ली और भारत को स्वाधीनता दिलाई..और अम्बेडकर कहते हैं कि वन्देमातरम की क्या ज़रूरत है?

    कोई प्रकाश आम्बेडकर को बताये कि यही वह गीत है जिसने अंग्रेज़ों को पराजित कर दिया था. भगत सिंह, सुखदेव, अशफाकुल्ला खान जैसे क्रांतिकारियों ने फांसी का फंदा चूम कर जब अपने गले में डाला था और मौत की बाहों में भर लिया था उस समय उन्होंने पूरे उल्लास और उत्साह से वन्देमातरम का घोष करके फांसी दे रहे अँगरेज़ अधिकारियों को अपने जज़्बे से हैरान कर दिया था. यह राष्ट्रप्रेम का जज़्बा था जिसकी इबारत देश के दिल पर लिख दी थी वन्देमातरम ने.और अम्बेडकर कहते हैं कि वन्देमातरम की क्या ज़रूरत है?

    कोई प्रकाश आम्बेडकर को बताये कि भारतीय स्वाधीनता के प्रथम प्रभात का स्वागत भी वन्देमातरम से ही हुआ था. जी हैं, 15 अगस्त 1947 की सुबह आकाशवाणी पर पंडित ओमकारनाथ ठाकुर के स्वर में सारे देश ने सुना था वन्देमातरम और यह पावन विचार दिया था सरदार पटेल ने. भारत की आज़ादी की पहली सुबह का गीत है वन्दे मातरम.और अम्बेडकर कहते हैं कि वन्देमातरम की क्या ज़रूरत है?

    कोई प्रकाश आम्बेडकर को बताये कि बलिदानी क्रांतिकारियों की अपने राष्ट्र के प्रति भक्ति और प्रेम की भावना का सुन्दर परिचायक था वन्देमातरम. वन्देमातरम से भयभीत हो कर अंग्रेज़ों ने इस गीत को भारत में प्रतिबंधित कर दिया था और यह सुन्दर विचार दिया था सरदार पटेल ने. इसी वन्दे मातरम के लिए महात्मा गांधी ने भी कहा था कि वन्दे मातरम सोने जैसा शुद्ध है. वन्देमातरम मुझे आकर्षित करता है..और अम्बेडकर कहते हैं कि वन्देमातरम की क्या ज़रूरत है?

    कोई प्रकाश आम्बेडकर को बताये कि वन्दे मातरम ऐसा गीत है कि आप जब भी इसे गाते हैं आपके ह्रदय में राष्ट्रप्रेम का भाव अपनेआप ही जाग जाता है. यह सिर्फ एक गीत नहीं है यह एक भाव है और यह एक सन्देश भी है. इसीलिए वन्दे मातरम जाति धर्म और राजनीति से ऊपर उठ कर राष्ट्र से और राष्ट्र प्रेम से जुड़ा है..और अम्बेडकर कहते हैं कि वन्देमातरम की क्या ज़रूरत है?

    (पारिजात त्रिपाठी)

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