पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती जम्मू-कश्मीर की मुख्यमन्त्री रही हैं और इस प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के समर्थन से उन्होंने सरकार भी चलाई है. मगर ये एक खुला हुआ राज़ है कि कश्मीर में देश की सेना पर पत्थर फेंकने वाले पत्थरबाजों का वे मुलायम स्वर में समर्थन करती आई हैं. मुलायम तरीके से उन्होंने कश्मीर के अलगाववादी नेताओं से नाता भी जोड़ रखा है. लेकिन अब उन्हें लगा कि अब वक्त आ गया है कि वे अपना मुखौटा उतार कर फेंक दें और खुल कर सामने आ जाएँ. और उन्होंने बिलकुल ऐसा कर दिखाया. अब उनको लेकर किसी को कोई गलतफहमी नहीं है.

महबूबा मुफ़्ती ने एक बार नहीं अपितु दो दिनों में दो बार लगातार कहा और साफ़ तौर पर कहा कि अगर कश्मीर से धारा 370 हटाई गई तो कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं रहेगा. सबसे पहला सवाल तो ये उठता है कि करना तो छोड़िये, महबूबा ऐसा कहने वाली भी होती कौन है?

अब इस बात पर बात करें कि क्या ऐसा हो सकता है? तो इस सवाल का जवाब ये है कि नहीं, ऐसा कभी नहीं हो सकता. कश्मीर भारत का भाल है, भारत की शान है और भारत का स्वाभिमान है. कश्मीर भारत का अविभाज्य अंग है और कोई भी देशद्रोही ताकत उसे भारत से अलग नहीं कर सकती. ऐसा न ही संवैधानिक तौर पर सम्भव है न व्यवहारिक तौर पर. अगर इस तरह की कोई कोशिश महबूबर और उनके समर्थकों की तरफ से की गई तो वे गिरफ्तार हो जाएंगी और प्रदेश पर राष्ट्रपति शासन लागू हो जाएगा.

अच्छी बात तो ये हुई है कि ऐसा कह कर महबूबा मुफ़्ती ने साबित कर दिया है कि वे भी कश्मीर की एक छुपी हुई अलगाववादी नेता रही हैं जो अब खुले तौर पर सामने आ गई हैं. लेकिन उन्होंने ऐसा कह कर देश की सरकार को धारा 370 हटाने की एक वजह और दे दी गई है. अगर धारा 370 नहीं हटी तो इसी तरह के अलगाववादी कश्मीर में देश के पैसे पर पलते रहेंगे और वे सरकार को इसी तरह ब्लैकमेल करते रहेंगे.

आइये अब ये देखें कि महबूबा के इस बयान पर क्या वैधानिक कार्यवाही हो सकती है?

जैसा कि उम्मीद थी, भारत के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने महबूबा मुफ़्ती के इस आपत्तिजनक बयान को गंभीरता से लिया और महबूबा को ताकीद किया कि वे ऐसा न कहें वरना उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. किन्तु महबूबा ने गृहमंत्री के सन्देश को गंभीरता से नहीं लिया. शायद महबूबा मुफ़्ती को ये अंदाज़ा नहीं है कि देश तोड़ने के इस बयान पर उन्हें देशद्रोह क़ानून के अंतर्गत गिरफ्तार किया जा सकता है. जैसा कि जेएनयू के कन्हैया कुमार और साथियों के साथ हुआ है. उन्होंने भी खुल कर दिन दहाड़े देश तोड़ने वाले नारे लगाए थे और आज़ादी की मांग की थी.

हो सकता है, महबूबा मुफ़्ती ने सोच समझ कर ये बयान दिया हो और ऐसे बयानों के द्वारा वे कश्मीर में अपनी अलगाववादी राजनीति चमकाना चाहती होंगी. उनको शायद ये लगता होगा कि भारत सरकार ने अगर उन पर कोई कार्रवाई की तो वे जनता की हमदर्दी जीत लेंगी और भारत में एक और फिलीस्तीन बनाने में कामयाब हो जाएंगी.

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