केजरी-चाल – फ्री फीमेल राइड

केजरीवाल को लगता है चुनाव लुभावने वादों से जीते जाते हैं, भले ही बाद में वादे पूरे न हों

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केजरीवाल जानते हैं चुनाव आने वाले हैं दिल्ली के..

दिल्ली विधानसभा चुनावों की दूरियां भले ही अभी महीनों की हों लेकिन आमआदमी वाले मुख्यमन्त्री अब खतरा उठाने का खतरा मोल नहीं ले सकते. दिल्ली लोकसभा चुनावों ने केजरीवाल को आईना दिखा दिया है. अब दिल्ली के मुख्यमन्त्री किसी से यह जानकारी शेयर नहीं करना चाहते कि इन चुनावों के परिणामों ने उनके बता दिया है कि वे कितने गहरे पानी में हैं.

लेकिन केजरीवाल तो केजरीवाल हैं. जो व्यक्ति अन्ना को गन्ना बना के राजनीतिक जूस निकाल सकता है और दिल्ली के सीएम की कुर्सी पर बैठ सकता है वो इतनी आसानी से कहाँ हार मान सकता है. केजरीवाल ने अपनी नई चाल से अपने विरोधियों को चौंका दिया है. केजरीवाल के प्रमुख विरोधी तो इस समय मनोज तिवारी और उनकी पार्टी है. लेकिन केजरीवाल को दिल्ली के आम आदमी की अक्कल पर पूरा भरोसा है. उन्हें पता है कि पिछली बार फ्री वाई फाई फ्री पानी बिजली के चक्कर में मूर्ख बने दिल्ली वाले इस बार भी मूर्ख बन सकते हैं लेकिन इस बार कोई नई चाल चलनी होगी उनको.

बस दिमाग लगाया केजरीवाल ने और सूझ गई नई तरकीब. ख़ुशी के मारे पूरे आम आदमियों अर्थात आम आदमी पार्टी के अपने बचे खुचे कर्मचारियों में लड्डू तक बंटवा दिए. उनकी तरकीब सुन कर उनके दरबारियों ने उनकी तारीफों के पुल बाँध दिए. ख़ुशी के मारे कई दिनों तक नींद नहीं आई दिल्ली के मुख-मंत्री को. अपने मुख से दिल्ली वालों को बड़े बड़े वादे करके बुद्धू बना देने वाले केजरीवाल ने इस बार आधी आबादी को टारगेट किया है. उनका मानना है कि बीवियां वोट देंगी तो पति कहाँ जाएंगे, वो भी मन मार के उन्हीं को वोट दे आएंगे.

इसलिए योजना के तहत केजरीवाल ने घोषणा कर डाली कि दिल्ली की महिलाओं को अब दिल्ली में यात्रा करने पर पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे. बसों में और मेट्रो में उनको फ्री यात्रा पास दिए जाएंगे. ये बात अलग है कि उनके पास का उनके पति लोग फायदा उठाएंगे तो होने वाले नुक्सान से परिवहन विभाग को केजरीवाल कैसे बचाएंगे?

पहले ही घाटे में चल रही डीटीसी अब और घाटे में जाने वाली है. कहने का तात्पर्य है कि यदि केजरीवाल ने अपनी पुरानी घोषणा ऑड और ईवेन की तरह इसको भी सिर्फ जनता को बेवकूफ बनाने के लिए उपयोग किया तब तो बात दूसरी है. किन्तु यदि उन्होंने दिल्ली की जनता का पैसा वास्तव में महिलाओं को फ्री राइड देने में खर्च किया तो सात सौ करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्चा करना होगा. यह पैसा कहाँ से आएगा, इसके बारे में पूछने पर कतरा गए आम आदमी पार्टी के मुखिया जी.

चारों तरफ देश में फ्री चीज़ों की ज़ोरदार बंटाई चल रही है. बंटाई वास्तविकता में चल रही हो या नहीं, ये अलग बात है लेकिन फ्री चीज़ों की इस देश के लोगों को इतनी बुरी आदत पड़ गई है कि वे मुफ्तखोरी के माहौल में ही वोट देना पसंद करने लगे हैं. यद्यपि राहुल गाँधी की मुफ्तखोरी वाली योजनाएं मुँह के बल गिर चुकी हैं, लेकिन केजरीवाल को दिल्ली की जनता की समझदारी पर पूरा भरोसा है. वे आजकल यही सोच सोच कर मुस्कुराते रहते हैं कि मेरी फ्री फीमेल राइड की काट कहाँ से लाओगे?

मगर सुनने में तो ये बात भी आ रही है कि जनता अब पहले की तरफ बेवकूफ नहीं रही है. अब वो मुफ्तखोरी वाला माल खा भी लेती है और वोट भी अपनी मर्ज़ी से ही दे के आती है जिसे पसंद करती है. याने कि जीत अब जनता की ही होगी दोनों तरह से. याने कि दिल्ली की महिलायें फ्री की यात्रा भी करेंगी और दिल्ली के मुख्यमंत्री भी मनोज तिवारी ही बनेंगे. अब बोलो, केजरीवाल जी, है इसकी काट आपके पास?

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