क्या वाकई देश के लिए तैयार हैं हम?

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    रोष में आक्रोश है अच्छी बात है। अपनी ऊर्जा को एकत्र करिये जो जिस योग्य है,जिस भी तरह समर्थ है तैयार हो जाये मन,वचन और कर्म से।आबादी की तरह असँख्य निर्णय और सलाह के बजाय सेना के फैसले का इंतजार करें और उस एक फैसले पर एकमत होकर एकता, सहयोग ,समन्वय के साथ गिन गिन कर हिसाब लें ।विचारों की भिन्नता और अत्यधिक आक्रोश में आकर अपने देश की शांति भंग न होने दें ….

    अपने दैनिक कार्यों की रफ्तार बढ़ा दीजिये अपनी सब कुछ व्यवस्थित कर लीजिए ऊर्जा के लिए आवश्यक सभी संसाधनों को संचयित कर लीजिए ताकि जब देश के लिए वक़्त देने की ज़रूरत पड़े तो घरों में हलचल की स्थिति न हो ,सांसे न थमने लगे ,रक्त न जमने लगे, घरों की की व्यस्था डगमगाए नहीं ….. क्योकि उस वक़्त ज़रूरत होगी कि सेना सरहद पर मोर्चा सम्भाले और हम सभी भितरघातियों, राष्ट्रद्रोहियों,और घर के भेदियों के खुराफाती दिमाग को भेद दें…… संयमित हो जाइए, संगठित ही जाइये ,लक्ष्य पर केंद्रित हो जाइए ………..

    मोमबत्ती नहीं अंतरात्मा को जलाइए और त्रिनेत्र को जाग्रत करिये ………..बिगुल बजने की तैयारी है अब हमारी बारी है……फिलहाल मैं खुद को तैयार कर रही हूं क्योंकि मुझे रक्त रंजित मातृभूमि पर जीत का जश्न नहीं ,दुश्मनों की भस्म पर भी उन्नत बीज उगाता हिंदुस्तान चाहिए स्वर्ण उगाता हर किसान चाहिए ।।
    ” जय हिंद “

    (शालिनी सिंह)

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