क्या है ऐश्वर्या राय की खामोशी का राज़ ?

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    अब तक देश एक ही ऐश्वर्या राय को जानता था जो कि अमिताभ बच्चन की बहू हैं और अभिषेक बच्चन की पत्नी हैं और विवाह के पूर्व विश्व सुंदरी के रूप में दुनिया भर में जानी जाती थीं.

    ये ऐश्वर्या राय जो आज चर्चा का विषय बन गई हैं एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से सम्बंधित हैं. लालू यादव के परिवार की यह बड़ी बहू अनचाहे ही विवाद में आ गई हैं और इनको विवाद में लाये हैं इनके पति तेजप्रताप यादव जो कि बिहार के महुआ जिले से विधायक हैं. कहने की आवश्यकता नहीं कि अपने को कृष्ण कहने वाले तेजप्रताप यादव बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री रहे हैं.

    राय परिवार की बिटिया ऐश्वर्या पांच महीने पूर्व ही धूमधाम से लालू यादव परिवार की बहू बनीं थीं. उस समय शायद उन्होंने कदापि नहीं सोचा होगा कि एक दिन सारा देश उनको अपने पति से होने वाले तलाक को लेकर जानेगा और वो दिन इतनी जल्दी आ जाएगा!

    ऐश्वर्या के दादा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं. इनके पिता पिता बिहार कैबिनेट में मंत्री और विधायक रहे हैं. इतने नामी-गिरामी परिवार की बिटिया आज इस तलाक के विवाद पर खामोश है. क्या ऐश्वर्या की खामोशी कुछ कहना चाह रही है?

    1970 में बिहार के मुख्यमंत्री रहे ऐश्वर्या के दादा का नाम है दरोगा राय. दरोगा राय कांग्रेसी नेता थे. 1990 के दशक में दरोगा राय के पुत्र चंद्रिका राय जनता दल में आ गए. उस समय देश में जनता दल परिवार राजनीति में ताकतवर बन कर उभर रहा था. बिहार में लालू प्रसाद यादव सबसे शक्तिशाली नेता बन कर सामने आये थीफ. लालू की राजनीति के उदय का ही प्रताप था कि चंद्रिका राय ने उनका खेमा ज्वाइन कर लिया.

    पूर्व मुख्यमंत्री दारोगा राय के पांच बेटों में चंद्रिका राय नंबर दूसरे नंबर पर हैं. राष्ट्रीय जनता दल नेता चंद्रिका राय सारण ज़िले के परसा क्षेत्र से विधायक रहे हैं. चन्द्रिका बाबू ने अपनी बड़ी बीत्या ऐश्वर्या राय की पढ़ाई दिल्ली के मिरांडा हाउस में दाखिला दिलाया जहां से ऐश्वर्या ने ग्रेजुएशन किया. इसके बाद उन्होंने नोएडा की एमिटी यूनिवर्सिटी से एमबीए किया.

    ये तो हुआ विवाह पूर्व ऐश्वर्या राय का परिचय. अब उनके पति तेजस्वी राय की भी बात कर लेते हैं. कहीं ऐसा तो नहीं यही है वजह आज के तलाक की हालत की. तेजप्रताप यादव सिर्फ 12वीं पास हैं.

    अब इस राजनीतिक परिवार के जोड़े के आज के हाल पर नज़र डालते हैं तो नज़र आता है कि मामला लगभग एक तरफ़ा ही है. ऐश्वर्या राय की तरफ से कोई बयान नहीं आया है. तलाक पर उन्होंने न ना कहा है न हाँ कहा है. दूसरी तरफ तेज प्रताप ने तलाक की अर्जी तो लगा दी है वे एक तरफ़ा फैसला भी चाहते हैं. जैसी उनकी आदत रही है वे मीडिया की सुर्ख़ियों में रहने के शौक़ीन हैं. इस बार उन्होंने तलाक की बात उठा कर क्षेत्रीय मीडिया से और आगे आ कर राष्ट्रीय मीडिया की लाइम लाइट बटोर ली है.

    सिर पर मोरपंख लगा कर श्री कृष्ण का रूप धारण कर बांसुरी बजाने वाले तेजप्रताप कहते हैं कि ऐश्वर्या राधा नहीं है. उन्होंने कहा है कि मैं घुट घुट कर नहीं जीना चाहता. ठीक-ठाक बांसुरी बजा लेने वाले और प्रायः तीर्थयात्रा करने वाले तेजप्रताप असल जिन्दगी में भी धार्मिक हैं और परिवार के मुकाबले वे काफी भोले-भाले किसम के हैं. लालू की धूर्तता और राजनीतिक काइयांपन उनमें अब तक नहीं आ पाया है.

    वैसे इस सारे मामले में एक एंगिल और भी है. तेजप्रताप ने अपने तलाक के फैसले के पीछे प्रेरणास्वरूप तीन लोगों का नाम लिया. ओम प्रकाश यादव, नागमणि और बिपिन नामके ये तीनो लोग फिलहाल भागे हुए हैं. इनकी खोज तीनों तरफ से चल रही है पर भूमिगत तिगड़ी किसी के हाथ नहीं आई है. न ही लालू परिवार के न ही राय परिवार के न ही पत्रकारों को इनका कोई क्लू मिल सका है.

    हैरानी इस बात की भी है कि ऐश्वर्या राय के परिवार से भी किसी ने अब तक इस पर कुछ नहीं बोला है. इसका क्या अर्थ माना जाए? क्या ऐश्वर्या राय और उनके परिवारजन लालू परिवार से जबरदस्ती जुड़े रहना चाहते हैं? या बात कुछ और ही है जिस कारण ऐश्वर्या के घरवाले कुछ भी कहने से बच रहे हैं?

    (पारिजात त्रिपाठी)

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