क्या होने वाला है कश्मीर में?

    ...जो आज हो रहा है वो भी पहले कभी नहीं हुआ...

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    कश्मीर में क्या होनेवाला है?..कब होनेवाला है?..कैसे होनेवाला है?..

    इस तरह के सवालों के जवाब निकट भविष्य में मिल ही जाएंगे। लेकिन इन सवालों को जन्म देनेवाली कार्रवाई को मैं एक ऐसी शानदार ऐतिहासिक शुरुआत मान रहा हूं जिसे देख सुनकर मेरी आत्मा प्रसन्नता से सराबोर है।आप मित्रों को इसका कारण भी बताता हूं…

    पिछले 35-40 वर्षों की समयावधि के दौरान घटी महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाओं विशेषकर कश्मीर से सम्बंधित महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रमों का स्वयं साक्षी रहा हूं। उससे पहले के राजनीतिक घटनाक्रमों की जानकारी पढ़ता रहा हूं। अतः विश्वास के साथ यह कह सकता हूं कि 1947-48 में हुए विभाजन के पश्चात सम्भवतः यह पहला अवसर है जब यह नजारा देख सुन रहा हूं कि जम्मू कश्मीर, विशेषकर कश्मीर घाटी में राजनीतिक नकाब पहनकर घूमने वाले “साम्प्रदायिक-मज़हबी-कश्मीरी” गुंडे/डकैत/हत्यारे/आतंकी टीवी कैमरों के सामने किसी मरियल कुत्ते की तरह डर से थरथर कांप रहे हैं, गिड़गिड़ा रहे हैं। रहम और शांति की भीख मांग रहे हैं। जबकि उसी जम्मू कश्मीर में रविंद्र रैना नाम का भारतीय अपने असंख्य साथियों सहयोगियों के साथ किसी राष्ट्रवादी सिंह की तरह दहाड़ रहा है, झूम रहा है।

    उल्लेख आवश्यक है कि कश्मीर घाटी में राजनीतिक नकाब पहनकर घूमने वाले “साम्प्रदायिक-मज़हबी-कश्मीरी” गुंडे/डकैत/हत्यारे/आतंकी गैंग्स की सुरक्षा 1971 और 1965 के भारत पाक युद्ध के दौरान भी दामादों की तरह की गई थी। इनकी गुंडई,डकैती, हत्यारी आतंकी कट्टर मज़हबी मानसिकता को तनिक भी नहीं छेड़ा गया था। किन्तु इसबार पाकिस्तान की कमर तोड़ने की शुरुआत ही आस्तीन के सांपों सरीखे “साम्प्रदायिक-मज़हबी-कश्मीरी” गुंडे/डकैत/हत्यारे/आतंकी गैंग से की गई है।

    अतः कल जो होगा सो होगा… पर जो आज हो रहा है वो भी पहले कभी नहीं हुआ।

    (सतीश चंद्र मिश्र)

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