घाटी में एक्शन : आतंक पर रिएक्शन

महबूबा, अब्दुल्ला और कांग्रेस जश्न मनाना चाहते थे, अगस्त 2000 के अमरनाथ यात्रियों के नरसंहार का - मगर मंसूबा फेल कर दिया गया..

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पाकिस्तान के साथ मिल कर महबूबा, अब्दुल्ला बाप बेटे और कांग्रेसी नेता अगस्त 2000 में आतंकियों के अमरनाथ यात्रियों के नरसंहार की बरसी पर जशन मनाना चाहते थे मगर उनके मंसूबे फेल कर दिए गए .

यही कारण है कि इनमे से कोई भी पाकिस्तान की बनी बारूदी सुरंगों और हथियारों के मिलने पर एक शब्द भी नहीं बोल रहा है, जबकि ये सरकार के पास सबूत हैं पाकिस्तानी और उसके
कश्मीर में बैठे दलाल आतंकियों के अमरनाथ यात्रा पर हमला करने की साजिश के .

गुलाम नबी आज़ाद ने खासतौर पर 2000 की अमरनाथ यात्रा पर हमले की बात कही है कि यात्रा को तब भी हमले बाद भी नहीं रोका गया था –यात्राओं पर सभी पर हमले हुए हैं मगर
वर्ष 2000 की ही बात क्यों की आज़ाद ने –जबकि उस वक्त, ना केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और ना राज्य में –फिर यात्रा ना रोकने का श्रेय क्यूँ और कैसे ले रहे है आज़ाद मियां —

याद कीजिये वर्ष 2000 में 1 और 2 अगस्त को अनंतनाग और डोडा जिले में हुए आतंकी हमलों में 105 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था और 62 घायल हुए थे . इनमे से 32 यात्री अमरनाथ के थे जिनका नरसंहार 2 अगस्त, 2000 को पहलगाम के नुनवान बेस कैंप में किया गया था. उस समय राज्य में फारूख अब्दुल्ला की सरकार थी और केंद्र में भाजपा की .

इस साल भी 2 अगस्त को 28000 सैनिकों को राज्य में भेजने का फैसला किया गया और उसी दिन पाकिस्तान में निर्मित बारूदी सुरंगे और पाकिस्तानी हथियार सेना ने तलाशी में बरामद किये जिनसे अमरनाथ यात्रियों को निशाना बनाना था –लगता है ये वर्ष 2000 नरसंहार का जश्न मनाने के लिए करना था .

जिस तरह महबूबा, अब्दुल्ला और गुलाम नबी आज़ाद सभी लोग पाकिस्तान के इरादों पर खामोश हैं, उससे साफ़ है कि ये लोग पाकिस्तान के षड़यंत्र का हिस्सा थे और जश्न में शामिल होने वाले थे –मगर सरकार ने इनके इरादों पर पानी फेर दिया और अब इनके पास विधवा विलाप करने के सिवाय कोई विकल्प नहीं बचा.

ये सभी विधवा विलाप कर रहे हैं कि जम्मू कश्मीर में लोग डरे हुए हैं और सरकार डर और नफरत का माहौल पैदा कर रही है. डर अगर तुम्हें लग रहा है तो उसमे सरकार क्या कर सकती है. डरते रहो –लोग तुम्हे डरा हुआ देख कर बहुत खुश हैं और कह रहे हैं –ये डर अच्छा है क्यूंकि इस डर के आगे मोदी है!

उमर अब्दुल्ला और उनके पिता बड़े बोल बोलने से पहले याद कर लें कि 9/10/1996 से 18/10/2002 तक फारूख अब्दुल्ला राज्य के मुख्य मंत्री थे और इन 6 सालों में कितने
आतंकी हमले हुए थे, वो भी याद करें –इन हमलों को विस्तार से बाद में लिखूंगा –अभी तो ये सभी लोग बतायें कि क्या तब डर का माहौल नहीं –शायद नहीं था, क्यूंकि तब सभी हमलों में केवल हिन्दू मारे गए थे .

(सुभाष चन्द्र)

Disclaimer: ये आर्टिकल लेखक के निजी विचार हैं जिन्हें बिना किसी काट-छांट के ज्यों का त्यों प्रकाशित किया है. इस आर्टिकल के विचार, सत्यता, सटीकता, संपूर्णता और व्यावहारिकता के प्रति न्यूज़ इंडिया ग्लोबल उत्तरदायी नहीं है. इस लेख में लेखक के द्वारा दिए गए तथ्य, सूचनाएं और विचार न्यूज़ इंडिया ग्लोबल के नहीं हैं इसलिए उनके लिए न्यूज़ इंडिया ग्लोबल को उत्तरदायी नहीं माना जाएगा.

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