डॉ.श्रीकृष्ण सिंह – बिहार अपने प्रथम मुख्यमंत्री का आज भी कृतज्ञ है!!

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    भारत राष्ट्र के सर्वाधिक प्रतिभासंपन्न राज्य बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री की जयंती के उपलक्ष्य में न्यूज़ इंडिया ग्लोबल डॉक्टर श्रीकृष्ण सिंह को नमन करता है.

    21 अक्टूबर एक अहम दिवस है बिहार के परिप्रेक्ष्य में. इस दिन डॉक्टर श्रीकृष्ण सिंह की जयंती होती है जो कि न केवल राजनीतिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी बिहार की जनता के प्रिय नेता थे.

    किसी भी नेता के लिए किसी भी राज्य का तीन दशकों तक नेत्तृत्व करना लगभग असंभव सा स्वप्न है. और भारत में तो एक प्रकार की व्यवस्था में यही और भी दुष्कर है. वहीं डॉक्टर श्रीकृष्ण सिंह दो प्रकार की व्यवस्था में ऐसा करनेवाले भारत के प्रथम नेता थे.

    डॉक्टर श्रीकृष्ण सिंह 1936 से 1947 तक के ब्रिटिश सरकार में बिहार के मुख्यमंत्री रहे. 1947 से अपने जीवन के अंतिम दिवस तक डॉक्टर श्रीकृष्ण सिंह ने बिहार को अपने नेत्तृत्व से वंचित नहीं किया. इतने लंबे समय में उन्होंने बिहार को जो आधारभूत संरचना दी या दिलायी, वैसा फिर कभी बिहार को नहीं मिला.

    श्रीकृष्ण सिंह, भारत के बिहार राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री थे. डॉ राजेन्द्र प्रसाद तथा डॉ अनुग्रह नारायण सिंह के साथ वे भी आधुनिक बिहार के निर्माता के रूप में जाने जाते हैं. उन्हें बिहार केसरी की उपाधि भी प्रदान की गई है.

    आज भी बिहार की जनता कहती है कि बिहार का जो मूल विकास हुआ है डॉक्टर श्रीकृष्ण सिंह के समय ही हुआ है. जनता जनता ही होती है, उसे राजनीति करनी नहीं आती. अतएव जनता का यह विचार किसी राजनीतिक प्रेरणा से नहीं जन्मा है बल्कि लोगों के हृदय में आज भी जो सम्मान अपने प्रथम नेता के लिये है, उसकी एक झलक मिलती है.

    यदि बिहार के अधिकार की बात करें तो आज भी यह प्रदेश अपने लिए जातिगत मंच तलाश रहा है. डॉक्टर श्रीकृष्ण सिंह ने अपने शासन काल में कभी बिहार की जन-संरचना की हानि नहीं चाही. उन्होंने कभी भी बिहार को जातिगत सांचे में विभक्त नहीं किया. इस लिये बिहार के विकास का जो स्वप्न डॉक्टर श्रीकृष्ण सिंह ने देखा था उसमें जातिवाद, जातिगत राजनीति नहीं थी बल्कि सर्वजातीय समन्वय का सुन्दर दृष्टिकोण दर्शित होता था.

    और कहा तो ये भी जाता है जिस दिन शेखपुरा से ज्यादा बेगूसराय को बिहार केसरी डॉक्टर श्रीकृष्ण सिंह की याद आयेगी, उस दिन बिहार में विकास का बीज अपने आप ही पल्लवित और पुष्पित हो जायेगा.

    (पारिजात त्रिपाठी)

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