Tejpratap की जिद से लालू हुए बीमार

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    तलाक! तलाक! तलाक! कह दिया है तेजप्रताप ने. उन्होंने ठान लिया है घर नहीं जाएंगे जब तक घर वाले उनकी बात मान न जाएँ. छोटे भाई तेजस्वी के जन्म दिन और दीवाली दोनों पर घर पहुंचना जरूरी नहीं समझा तेजप्रताप ने. आखिर बेटा किसका है – लालू का !

    लेकिन लालू जिसने मोदी से भी हार नहीं मानी, बेटे से हार गए हैं. बेटा मिलने भी आया था मिला भी लेकिन माना नहीं. लालू ने सब तरह से मनाया, लेकिन उसका नाम भी तेजप्रताप है. बिहार में आज की तारीख में उनसे बड़ा जिद्दी कोई नहीं. हाँ, हो सकता है कि उनकी जिद के पीछे कोई कारण हो..और ये भी हो सकता है कि वह कारण वैध भी हो.

    पर शायद परदे के पीछे का चित्र वह नहीं है जैसा लोग कल्पना कर रहे हैं. तेजप्रताप के तलाक की जिद सब कुछ ठीक नहीं है- का सच बताती है. अर्थात घर में सब कुछ ठीक नहीं है? ठीक नहीं है तो वह क्या है?

    एक बड़ी पार्टी के मुखिया का बेटा जो आज प्रदेश में वैसा ही है जैसे देश में राहुल गांधी. राहुल गांधी के दिशानिर्देश के लिए पूरी एक फ़ौज है पर तेजप्रताप का दिशा निर्देशक कोई नहीं है क्योंकि तेजप्रताप अपनी धुन में रहने वाले शख्स हैं.

    गौर से देखें तो दो अलग अलग कारण हो सकते हैं तेजप्रताप की जिद के. या तो पत्नी ने उन्हें मानसिक यंत्रणा दी है या वे स्वयं किसी अन्य प्रेयसी के प्रेम में गिरफ्तार हैं. उन्होंने दम घुटने की बात भी कही थी उन्होंने अत्याचार की बात भी कही थी, उन्होंने यंत्रणा जैसे शब्द का भी प्रयोग किया था अपनी मानसिक वेदना दर्शाने के लिए. और हां, तेजप्रताप ने राधा और कृष्ण वाली बात भी कही थी.

    यदि दूसरा कारण है तो वह अधिक संभावित कारण है. प्रथम कारण याने कि पत्नी या पत्नी के परिवार की तरफ से आघात पहुंचना किसी को अलग होने के लिए इतना जिद्दी नहीं बना सकता. व्यक्ति समस्या के समाधान की दिशा में भी प्रयत्न कर सकता है. अड़ियल वह तब ही होता है जब उसका दिल किसी और के कब्ज़े में होता है. और अगर ऐसा शख्स राज्य का राजपुत्र हो तो उसकी मानसिकता उसे सदा यही कहती है – क्या परेशानी है ! हो जाएगा !!

    यद्यपि तेज प्रताप ने इस प्रकरण में षड्यंत्र की बात भी कही थी. उनके अनुसार – ‘उनके विरुद्ध षड्यंत्र चल रहा है और वह षड्यंत्र घर में ही चल रहा है.. डेढ़ महीने से लड़की से मेरी कोई बातचीत नहीं हुई और अब अचानक लड़की घर आ रही है और घर वाले भी सपोर्ट कर रहे हैं.’ इससे भी अधिक समझ कुछ नहीं आता. ज़मीन जायदाद का मामला तो लगता नहीं. कोई दुश्मनी भी आगे पीछे नज़र नहीं आती. लगता है षड्यंत्र की यह बात तेजप्रताप अपनी खुद की मदद के लिए बना रहे हैं.
    यह ‘हो जाएगा’ का आर्थिक आत्मविश्वास बहुत बड़ी शक्ति होता है किसी भी प्रयोजन की सिद्धि की दिशा में. प्रयोजन सकारात्मक हो या नकारात्मक, उससे कोई अंतर नहीं आता.

    मुद्दे की बात करते हैं. शक्तिशाली और आत्मविश्वास के धनी लालू यादव भी आज घुटनों पर हैं तेजप्रताप के सामने. पुत्र से समस्त राजनीतिक अपेक्षाएं तो बाद की बात है, अभी तो पारिवारिक प्रतिष्ठा बचा पाना ही सम्भव नहीं हो पा रहा है. लालू पहले ही अपने कर्मों की मार के मारे हुए हैं. एक सजा चल रही है साथ साथ और मुकदमें भी चल रहे हैं. ऐसे में अपना ट्रम्प कार्ड भी हाथ से निकल जाए तो डिप्रेशन तो हो ही जाना है.

    तो खबर ये है कि लालू डिप्रेशन में हैं. लालू की मानसिक वेदना शरीर पर भारी पड़ रही है. उनकी किडनी प्रभावित हो रही है. और लालू के भावी स्वस्थ्य के लिए ये शुभ समाचार नहीं है.

    रिम्स अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार लालू को रातों में नींद नहीं आती है आजकल. उन्होंने बताया कि लालू तनाव में हैं और उनका डिप्रेशन लेवल बढ़ गया है. खुद डॉक्टर्स ही कह रहे हैं कि बड़े पुत्र के अपनी पत्नी से तलाक के समाचार ने लालू का डिप्रेशन का स्तर बढ़ा दिया है.

    मेडिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि लालू के मामले में पारिवारिक कलह उनके लिए बहुत नुकसानदेह सिद्ध हो सकती है. लालू काफी समय से डायबिटीज़ के मरीज़ हैं. उसका असर पहले ही किडनी पर है. उनकी किडनी की पचास प्रतिशत सामर्थ्य समाप्त हो चुकी है. और लालू एक दो नहीं, बल्कि कई रोगों से पीड़ित हैं. इसलिए हालात और हाल दोनों ही लालू के लिए फिलहाल अच्छे नहीं हैं.

    (पारिजात त्रिपाठी)

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