एक हैं विपक्ष के नेता जो प्रधानमंत्री बनने की तमन्ना लिए चेहरा हैं तो दूसरे दिल्ली के नेता जो प्रधानमंत्री बनने की तमन्ना तो रखते हैं पर चेहरा नहीं हैं..

दिल्ली में कांग्रेस को हरा कर सरकार बनाने वाले केजरीवाल फिर सरकार बनाने के मूड में हैं. भले ही इसके लिए उन्हें उसी कांग्रेस से हाथ क्यों न मिलानी पड़े जिससे त्रस्त हो कर जनता ने उन पर ट्रस्ट किया था.

केजरीवाल कांग्रेस से गठबंधन हो जाये इसके लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे थे पर शीला तो न मानी !! अब जब किसी तरह बात बनती नज़र आ रही थी तो अचानक केजरीवाल को याद आया कि वो दिल्ली में राहुल से बड़े नेता हैं.  बस, वे भाव खाने लगे. गठबंधन न हो सके ऐसी शर्तें गिनाने लगे.

इस अजीबोगरीब यू टर्न पर राहुल बौखला गए. उन्होंने केजरीवाल से कह दी खरी-खरी – फिर ले रहे हो यू टर्न..उन्होंने  इसकी कैफियत मांगी तो केजरी ने ट्वीट करके के जवाब दिया – कौन सा यू टर्न, जी?

ये अटकलें ऊपर से थीं पर कोशिशें अंदर से. मोदी को हराने की बेकरारी या दिल्ली हार जाने का डर, दोनों ही बातों ने दो राजनीतिक शत्रुओं को गले मिलने को मजबूर कर दिया.

पहले ‘आम आदमी’ की इच्छा इतनी बलवती थी कि कांग्रेस का हाथ पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार था. लेकिन जब हाथ अपना साथ देने को तैयार हुआ तो अचानक खांसी आने से नींद टूट गई. जागे तो पता चला दिल्ली का किंग कौन ? – केजरीवाल (आवाज़ आई अंदर से)

बस यू टर्न की भूमिका तैयार हो गई. राहुल गाँधी को झटका लगा. कांग्रेस को हलाल करने की चाल थी ये केजरीवाल की. उन्होंने केजरीवाल को खरी खोटी सुना दी.

राहुल गांधी ने ट्वीट किया – अगर AAP और कांग्रेस के बीच गठबंधन होता है तो फिर दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के लिए राह आसान नहीं होगी.

भोले-भाले राहुल गांधी को होशियार केजरी ने पहले तो बहला फुसला कर चार सीटों पर राज़ी करवा दिया. फिर ऐन मौके पर हाथ से हाथ खींच लिया. भौंचक्के रह गए राजकुमार. पूछा ये कौन सा यू टर्न है सर जी?

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