धन्यवाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, मेरी अपील सुनने के लिए !

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स्वतंत्रता दिवस की 73वीं  वर्षगांठ पर सभी को बधाई !

-3 अगस्त के मैंने अपने लेख – “प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से एक अपील की थी कि – आप 15 अगस्त को लाल किले से बस एक अपील कर  दीजिये” जिसमें जनसँख्या नियंत्रण की दिशा में सुधार हेतु अपील करने के लिये मैंने कहा था.

मैंने यह भी कहा था — “आज बढ़ती जनसँख्या को अगर ना रोका गया, तो कल को न जल बचेगा, न भोजन होगा और न ही किसी और प्रकार का संसाधन ही रहेगा” – इसलिए प्रधानमंत्री ये अपील करें.

“आज हर जाति, हर समुदाय और हर धर्म के लोगों से अपील करता हूँ कि वो जनसँख्या पर नियंत्रण के लिए 2 से ज्यादा बच्चे पैदा न करें” – आज मुझे लाल किले से प्रधानमंत्री जी के भाषण में इस विषय पर की गई अपील सुन कर बहुत ख़ुशी हुयी. उनसे अन्य लोगों ने भी हो सकता है कहा होगा, मगर क्यूंकि मैंने भी कहा, इसलिए मैं तो यही समझूंगा कि प्रधानमंत्री ने मेरी बात सुनी है.

आज़ादी के 73 वर्ष के बाद इस विषय को उठाने वाले नरेंद्र मोदी ऐसे पहले पी एम हैं जिन्होंने ऐसा बोलने के लिए जिगरा दिखाया, ये बड़े गौरव की बात है, मुझे आशा है, मोदी जी के मुख से निकली इन बातों का असर जरूर दिखाई देगा.

मुझे ऐसा भी लगता है कि आज उन्होंने अपील करके ये इशारा भी कर दिया कि अगर प्यार से बात नहीं सुनी लोगों ने तो क़ानून भी बनाया जा सकता हैहो सकता है आज या कल में मीडिया प्रधानमंत्री की अपील को किसी धर्म विशेष से जोड़ कर कोहराम ही न मचा दे – जबकि ये बात किसी धर्म विशेष को ध्यान में रख कर नहीं कही गई.

जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद आज की आज़ादी दिवस के जैसे मायने ही बदल गए हैं –पूरे देश में राष्ट्रवाद की एक नई लहर चल पड़ी है जो शायद ही किसी के रोके रुकेगी –कम से कम देश के विरोध में और पाकिस्तान के साथ खड़े नेताओं और उनके दलों के वश में तो नहीं है इसे रोकना –ऐसे लोग इस लहर में बह जायेंगे मगर कहीं कोई किनारा नहीं मिलेगा – 

आज के इस पावन पर्व पर उन सभी मित्रों (खासकर अपने संघ के महानुभावों)  से  निवेदन करना चाहता हूँ जो मोदी पर किसी ना किसी बात को ले कर बरसना शुरू कर देते हैं और ज्ञान पेलते हुए तोहमत लगाने में लज्जा का अनुभव नहीं करते. ऐसा लगता है कि इस तरह वे कांग्रेस की मदद करने लगते हैं कि मोदी को इसीलिए वोट दिया था, मोदी को उसलिए वोट दिया था, मोदी ने किया ही क्या है –कि वो मोदी पर विश्वाश रखना सीखें और संयम रखें.

अब मोदी के किसी ऐसे काम का इंतज़ार न करें जो उनकी नज़रों में “गलती” हो जिस पर फिर बरस पड़ें. ऐसे ज्ञानी मित्र फेसबुक और ट्विटर पर मोदी के खिलाफ आग उगलने से बेहतर है, सीधा उन्हें लिखें, वहां सबकी बातें पढ़ी जाती हैं.

(सुभाष चन्द्र)

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