पीएम मोदी की जान को खतरा?

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    प्रधानमंत्री के विरुद्ध प्राणघाती हमले का षडयंत्र ?

    (अर्चना शैरी)

    प्रधानमंत्री मोदी की जान को खतरा है. आज अक्टूबर,13,2018 को ऐसी एक जानकारी मिली है दिल्ली पुलिस से. पुलिस के मुताबिक दिल्ली पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक को एक ई मेल भेज कर इसकी जानकारी दी गई है. एक लाईन के इस मेल में नवंबर 2018 में उनकी हत्या के षडयंत्र का जिक्र है.

    मेल के मिलते ही जांच एजेन्सियां हरकत में आ गई हैं. प्रारंभिक जांच में जो जानकारी सामने आई है उसके अनुसार यह मेल असम के किसी जिले में स्थित सर्वर से भेजा गया है. यद्यपि अभी तक इस षडयंत्र में किसी के शामिल होने की कोई जानकारी नहीं है.

    यद्यपि पुलिस औऱ सुरक्षा एजेन्सियां पहले ही प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर तैयारी में जुटी हुई हैं क्योंकि इस माह प्रधानमंत्री की कई रैलियां संभावित हैं.

    वैसे इस में कोई संदेह नहीं कि राष्ट्रविरोधी ताकतों का मोदी का आदमकद कदापि सुहा नहीं रहा है. इसलिये पहले भी ऐसी ही एक दो धमकियां और धमकियों के साथ आशंकित षडयंत्र सामने आये हैं,

    अभी तीन महीने पहले ही जून में पूना की पुलिस ने बताया था कि संदिग्ध माओवादियों से एक पत्र पकड़ा गया है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की तरह’ हत्या करने का षडयंत्र सामने आया है.

    इसके अतिरिक्त इसी वर्ष जनवरी में महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव जाति हिंसा प्रकरण में जांच करने वाले पुलिसबल ने भी इसी तरह के एक षडयंत्र का रहस्योद्घाटन किया था. पुलिस ने एक पत्र बरामद किया था जो कि 18 अप्रैल, 2017 को लिखा गया था और कथित तौर पर माओवादियों का दिल्ली स्थित यह कार्यकर्ता रोना विल्सन के निवास से बरामद किया गया. रोना विल्सन वही शख्स है जो कि जातीय-हिंसा के प्रकरण में जून में गिरफ्तार पांच संदिग्ध कार्यकर्ताओं में से एक है. यह पत्र किस ‘कॉमरेड प्रकाश’ नामक व्यक्ति को लिखा गया जो कि ‘R’ नामक किसी शख्स ने लिखा था. पत्र के विवरण के अनुसार  ‘राजीव गांधी की हत्या की घटना’ का संदर्भ देते हुए लिखा गया था कि प्रधानमंत्री मोदी को उनके रोड शो के दौरान निशाना बनाया जा सकता है.

    इसी वर्ष कुछ माह पूर्व गाजियाबाद के रहने वाले एक व्यक्ति ने फेसबुक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गोली मारने की धमकी दी थी. मामला सामने आने पर इस व्यक्ति के विरुद्ध एफआईआर भी दर्ज की गई थी.

    (पारिजात त्रिपाठी)

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