प्रेम का अर्थ वासना और हवस नहीं!!

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    वेलेन्टाईन डे पर बहन-बेटियाँ धोखे से बचें..

    एक रिपोर्ट के अनुसार का इस देश में 43 लाख लड़कियों में बाँझपन और 30 लाख लड़कियों में बच्चेदानी का कैंसर पाया गया है और इसका एक बहुत बड़ा कारण गर्भनिरोधक गोलियों का प्रयोग है।

    मेरे मित्र की “गाईनाकोलोजिस्ट डाक्टर” पत्नी के अनुसार “वेलेन्टाईन डे” के बाद मुश्किल से 10 दिन के अंदर उनके पास कुँवारी लड़कियों की भीड़ लग जाती हैं और उनको गर्भनिरोधक दवाईयों का पहले से अधिक स्टाक रखना पड़ता है…”

    दरअसल टीवी पर प्रचार आता है कि “सिर्फ एक कैप्सूल से 72 घंटो के अंदर अनचाही प्रेगनेंसी से छुटकारा…”

    इस प्रचार ने कुछ लड़कियों को कुछ भी करने का साहस दे दिया है और वह “छद्म प्रेमजाल” में फँसकर ऐय्याश लड़कों की हवस का शिकार हो जाती हैं।

     छद्म इसलिए कि क्युँकि जहाँ “वासना और हवस” हो वहाँ सच्चा प्रेम नहीं।

    उच्चतम न्यायालय कुछ भी कहे , जो व्यक्ति विवाह के बिना किसी भी लड़की या महिला से शारीरिक संबन्ध बनाता है वह उसे धोखा देता है , क्यूँकि नैतिकता और संस्कृति से धोखा देने वाला किसी को भी धोखा दे सकता है, उस लड़की को भी धोखा दे सकता है जिसके साथ वह छद्म प्रेमजाल में फँसाकर विवाह पूर्व शारीरिक संबन्ध बना रहा है।

    एक अनैतिक व्यक्ति पर भरोसा करना स्वयं को धोखा देना होता है। उसके विवाह करने के वादे पर
    बहन बेटियों का स्वयं को उसकी ऐय्याशी और वासना के लिए सौंप देना, खुद को धोखा देना है. ऐसे राक्षसों और शैतानों से बचें।

    सवाल यह है कि यदि इतना ही प्रेम है तो उस लड़की से पहले विवाह क्यूँ नहीं कर लेते ? झूठा है ऐसा प्रेम जो गर्भ-निरोधक दवाओं के भरोसे जीवित रहता है।

    अब इसका एक दूसरा असर यह है कि कच्चे दिमाग की लडकियाँ इन दवाईयों के भरोसे फॉर्म में आ जाती है और हर हफ्ते नया बॉयफ्रेंड, मुलाकात, सेक्स फिर…

    और फिर अनचाहे गर्भ से बचने के लिए वह “गोलियाँ” जिसका न कम्पोजीशन पता होता है न कांसेप्ट…बस निगल जाती हैं…

    ध्यान देने वाली बात यह है कि इन फेक गोलियों में आर्सेनिक भरा होता है यह 72 घंटो के अंदर सिर्फ बनने वाले भ्रूण को खत्म नही करता बल्कि पूरी का पूरी प्रजनन क्षमता को ही नष्ट करने लगता है…

    शुरू में तो ये गोलियाँ खाकर अपनी नैतिकता और चरित्र को बचा लेती हैं लेकिन शादी के बाद पता चलता है वो बाँझ बन गयी और अब माँ नही बन सकती. इस स्थिति में सबको पता चल जाता है इनका भूतकाल कैसा रहा है पर कोई बोलता नहीं. बोले भी क्यूँ, जब इनकी जिन्दगी खुद अभिशाप बन जाती है…

    सरकार हर साल “मातृत्व सुरक्षा”, “जननी सुरक्षा”, “बेटी बचाओ” जैसी योजनाओ के नाम पर करोड़ो रूपये फूँक देती है और आपकी हमारी बहन-बेटी खुद डॉक्टर बन जाती हैं…

    आज हालत ये हैं 13-14 साल की बच्चिया बैग में I-pill लेकर घूम रही हैं , ये आत्मघात नहीं है तो और क्या है?

    सावधान रहें. कभी समय निकालकर अपनी बेटी या बहन का बैग भी चेक कर लिया करें। हर साल लाखों बच्चियाँ बच्चेदानी के कैंसर से मर जाती हैं – उसका एकमात्र कारण माता पिता और भाई बहन की लापरवाही…

    और ऐसी जहरीली चीजें सप्ताह भर चलने वाले “वेलेन्टाईन डे” पर मेडिकल माफिया भारतीय बाजारों में जानबूझकर उतारता है… क्यूँकी सबको पता है, भारत मूर्खों का देश है…और देशी विदेशी कंपनियाँ ऐसी दवाईयाँ बेचकर हर साल मोटी कमाई करती हैं।

    पहले ये लड़कियों को जहर खिलाकर बीमारी देते हैं…फिर उसकी दवाई बेचकर अरबों रूपये कमाते हैं…जिसमे नेता भी कमाई करते हैं…क्यूँकी ऐसे जहर को बेचने का परमिट और उनकी चेकिंग न करवाने का काम नेता ही कर सकते हैं…

    बहन-बेटी किसी के छद्म प्रेम में फँस कर उसकी ऐय्याशी का सामान बनें और बाद में कैन्सर , बाँझपन, STD की वजह से मर जाए , तो यह कितना तकलीफदेह होगा उस परिवार के लिये, कहने की आवश्यकता नहीं …

    (साभार)

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