बगदादी मारा गया पार्ट -5

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    अमरीकी कमान्डोज़ का सीरिया में बगदादी के ठिकाने पर उतरने का दृश्य अगर किसी फिल्म में फिल्माया गया होता तो उतना जानदार कभी नहीं हो सकता था जो माहौल शनिवार 26 अक्टूबर 2019 की रात सीरिया के गाँव बशीरा में नज़र आया. बिल्‍कुल किसी फ‍िल्‍मी सीन से भी बेहतर अंदाज़ में इन प्रशिक्षित कमांडोज़ ने उस मकान की छत को अपने कड़क बूटों की आवाज़ से रौंद दिया.

    रस्सियों से उतरने का ये सिलसिला बमुश्किल दस मिनट चला होगा मगर उतनी देर में दर्जनों कमांडोज़ एक ख़ास मकान की छत पर उतर चुके थे जिसकी छत के आसपास चारों तरफ आठ चॉपर्स मौत बन कर मन्डरा रहे थे. अब हमारे पढ़ने वालों को ज़ाहिर हो चुका होगा कि ये मकान कोई आम मकान नहीं बल्कि कुछ बहुत ख़ास किसम का मकान है. जी हाँ, यही मकान था वह लक्ष्य जिसके लिए ये ख़ास मेहमान अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन से चल कर आये थे.

    इस मकान की छत से लगी सीढ़ियों पर देखते ही देखते ऊपर से नीचे तक विशेष सैन्य-परिधान और भारी बूट पहने धम-धम करते कमांडोज़ अंदर उतर गए. पर जैसा कि उनको पहले से पता था, ये मकान नहीं था, ज़मीन के ऊपर ख़ास तौर से बनाया गया एक बंकर-नुमा ढांचा था

    कमांडोज़ के स्टेप सिक्स में उन्हें अपने टारगेट को ढूंढना था. सो ये काम भी अब शुरू हो चुका था. बगदादी के उस गुफानुमे बंकर को कमांडोज़ ने घेरना शुरू कर दिया था. सारे कमांडोज़ अंदर बिखरते चले गये. इस मिशन की तैयारी का आलम देखिये कि इन अत्‍याधुनिक हथियारों और साजो सामान से लैस कमांडोज के पास न केवल ट्रेन्ड डॉग्स थे बल्कि वे अपने साथ एक रोबोट लेकर भी उतरे थे.

    इन कमांडोज़ के लिए ये ख़तरा भी हर कदम पर था कि कहीं भी जमीन पर या दरवाजों पर ऑटो‍मेटिक विस्‍फोटक लगे हो सकते थे जो ज़रा सा पैर पड़ते ही चीथड़े उड़ा सकते थे.

    लेकिन कमांडोज़ ने देर नहीं की. तेज़ी से आगे बढ़ते चले गए. अब तो उन्होंने खतरे को गले लगा ही लिया था तो डर किस बात का था. डर तो उसको लगना चाहिए जिसे शायद अब तक पता चल गया था कि ऊपर क्या हो रहा है.

    बशीरा गाँव छावनी था बगदादी की आतंकी सेना का. इन सभी आतंकियों का सम्मिलित हमला नाकाम रहा और कमांडोज़ के इरादे कामयाब हो गये. गोलियों के बीच से जगह बनाते हुए रस्सों पर उतरते ये कमांडोज़ पहुँच गए इस खास मकान की छत पर और फिर उसकी छत से नीचे की ओर. नीचे उतरते हुए उन्हें नज़र आई वह गुफा जिसकी जानकारी उन तक पहले ही पहुँच गई थी.

    कमांडोज ने दस्तक दे कर भीतर जाने की तकल्लुफ नहीं की. गुफा के दरवाजे पर पहुंच कर उन्‍होंने उसे खोलने की कोई जुगत भी नहीं भिड़ाई और उस गुफा की दीवार को ही धमाके से उड़ा डाला. अब दुनिया के सबसे कातिल भेड़िये की गुफा के बिलकुल भीतर पहुँच गई थी ये विशेष अभियान टीम.

    यहां दिखा जो नज़ारा उसका भी इल्म कमांडोज़ को पहले से ही था. वे जानते थे कि ऐसा हो सकता है – सामने थीं बगदादी की दोनों बीबियाँ और दोनों ही ठीक हालत में नज़र नहीं आ रहीं थीं.

    (क्रमशः)

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