मायावती की मूर्तियां – 9 साल बाद भी फैसला नहीं

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    मगर एक टिपण्णी “हाथी” पर भारी ना पड़ जाये..

    2009 में मायावती सरकार द्वारा सरकारी खर्च पर बनाई गई उसकी खुद की, कांशीराम की और अनेक हाथियों की मूर्तियों के खिलाफ 2 वकीलों रवि कांत और सुकुमार ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी –इनके निर्माण को रोकने के लिए अदालत ने मना कर दिया था (स्टे लगाने से मना कर दिया) – इस केस में अलग अलग तिथियों पर क्या हुआ, उस पर एक नज़र डालते हैं —

    —30 जून, 2009 को सुप्रीम कोर्ट ने मायावती को उपरोक्त मूर्तियों के निर्माण की योजना के लिए नोटिस जारी किया.
    —3 दिसंबर 2010 को मायावती को नॉएडा में लेटे हुए अम्बेडकर का स्मारक बनाने की अनुमति सुप्रीम कोर्ट ने दे दी.
    —19 जनवरी, 2012 को चुनाव आयोग ने मायावती सरकार को सभी मूर्तियों को ढकने के आदेश दिए जिससे विधान सभा चुनाव में मतदाताओं को प्रभावित ना किया जा सके -बसपा नेता सतीश चंद्र मिश्रा ने इसे दलितों पर कुठाराघात बताया.
    — 22 जनवरी, 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने अखिलेश सरकार को मूर्तियों पर अपनी राय देने के लिए हलफनामा देने के लिए कहा .

    अखिलेश सरकार ने क्या जवाब दिया, ये तो मुझे नहीं मिला मगर इतना तो निश्चित है कि उसकी सरकार ने मूर्तियों के निर्माण के खिलाफ ही राय दी होगी क्यूंकि वो तो पहले ही इस विषय में जांच बिठा चूका था –मुलायम सिंह ने खुलेआम कहा था कि हमारी सरकार बनी तो सारे पुतलों को गिरा दिया जायेगा –हालाँकि अखिलेश का कहना था कि हम खाली जगह पर अस्पताल बनवाएंगे जो कभी नहीं बनवाये.

    गृह मंत्री पी चिदंबरम ने मूर्तियों को “शर्म” का विषय बताया था — मायावती के वकील ने आज अदालत से कहा कि वो इस केस की सुनवाई मई में चुनावों के बाद करें जिसे अदालत ने ठुकरा दिया और कहा कि आप हमें वो करने के लिए क्यों कह रहे हो जो हम नहीं कर सकते — और 2 अप्रैल को अंतिम सुनवाई की तारीख तय कर दी –जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना केस की उस दिन सुनवाई करेंगे.

    मजे की बात है कि — सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी खर्चे से सीएम की मूर्तियां लगाने के इस मामले पर संज्ञान लेते हुए यूपी सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी. कोर्ट में सुनवाई लंबित रहने के दौरान स्मारकों का काम पूरा हो गया.

    अब सोचिये वर्तमान में उत्तर प्रदेश में योगी सरकार है और इस मसले में वो ना तीन में, ना तेरह में मगर फटकार फिर भी योगी सरकार को पड़ गई –तब तो बेहतर था अदालत स्मारकों के काम पर स्टे ही लगा देते जिसकी मांग याचिकाकर्ता ने की थी .

    अदालत ने आज टिपण्णी की — “पहली नज़र में यही लगता है कि इनकी कीमत मायावती से वसूली जानी चाहिए ” साथ ही ये भी कहा कि ये महज एक टिपण्णी है –अंतिम सुनवाई में इस पर विचार होगा.

    मगर मुझे शंका है ऐसा कोई आदेश वसूली का पारित होगा जिसके 2 कारण हैं –

    –पहला –अदालत ने जब मूर्तियों का निर्माण हो रहा था, तब उसे नहीं रोका –अगर रोक दिया होता तो आज वसूली की नौबत ही नहीं आती .
    — दूसरा, अगर मूर्तियों का निर्माण प्रथम द्रश्या अदालत की नज़र में गलत होता तो नॉएडा में अम्बेडकर स्मारक के निर्माण की अनुमति ही ना देते.

    अखिलेश पर अब हो सकता है मायावती अपना कहर बरपा दे क्यूंकि उसी की वजह से प्रवर्तन निदेशालय ने मसला हाथ में ले कर छापेमारी की और अब उसी की वजह से सुप्रीम कोर्ट की एक तरह मायावती के सर पर तलवार लटक गई –मायावती के समर्थक पार्टी के भीतर उसे पूछेंगे कि जिसने आपको फंसा दिया उससे गठबंधन का क्या फायदा.

    लेकिन मुझे आशा है 2 अप्रैल की सुनवाई के बाद फैसला चुनावों के बाद ही आएगा.

    (सुभाष चन्द्र)
    08/02/2019

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