मौलाना इमरान का ही दूसरा चेहरा है

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मौलाना फजलुर रहमान से भारत कोई उम्मीद ना पाले.. पाकिस्तान में कोई भी आये,भारत के खिलाफ ही होगा !

भारत के मीडिया चैनल मौलाना फज़लुर रहमान के इमरान खान को उखाड़ फेंकने के लिए शुरू किये गए “आज़ादी मार्च” से कुछ ज्यादा ही उत्साहित लगते हैं और इमरान खान के दिन गिन रहे
हैं हमारे चैनल्स.

ये सही है कि इमरान खान भारत के खिलाफ एक मुहिम छेड़े हुए है जबसे 370 हटाई गई है और उसके मंत्री रोज रोज युद्ध की धमकी देते रहते हैं –उनके साथ साथ खुद इमरान खान भी कई बार परमाणु युद्ध की धमकी दे चुका है और कश्मीरी के आवाम को हिंसा भड़काने के लिए भड़काऊ बयान देता रहता है –लेकिन हमारी कांग्रेस और कश्मीर के नेता ना इमरान की निंदा करते हैं और ना कश्मीर के अलगाववादियों और आतंकियों की.

मगर हमें ये भी नहीं भूलना चाहिए कि पिछले 72 साल में पाकिस्तान में जो भी गद्दी पर बैठा, उसने भारत के साथ शांति, सद्भावना और दोस्ती की बात नहीं की –हर किसी ने युद्ध और आतंक की बात की है –एक कदम चले दोस्ती के लिए लेकिन अन्त्ततः युद्ध पर ही पहुंचे.

मौलाना फज़लुर रहमान के नाम के साथ तो वैसे भी एक विशेषण लगा कर सम्बोधित किया जाता है -“कट्टरपंथी” -अब सोचिये ये जमायत उलेमा -ए -इस्लाम फ़ज़ल (JUI-F) का मुखिया, कट्टरपंथी भला कैसे हिन्दुस्थान के साथ मित्रता की बात सोच सकता है जबकि इसके समर्थक भी पाकिस्तान पीपल पार्टी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) हैं, जिनका भारत के खिलाफ नजरिया
किसी से छिपा नहीं है.

हिन्दुस्थान के कट्टरपंथी मौलाना भारत में रह कर भारत के खिलाफ बात करते हैं तो ये तो पाकिस्तान का कट्टरपंथी मौलाना है –ये कैसे भारत के हक़ में होगा –वैसे आजकल बुशरा बेगम की संगत में इमरान खान भी मौलाना बन चुका है, ऐसी खबरें पाकिस्तानी मीडिया दे रहा है –मतलब एक मौलाना हटेगा और दूसरा आ जायेगा.

कट्टरपंथी मौलाना फज़लुर रहमान की कट्टरपंथी हाफिज सईद से भी अच्छी पट सकती है क्यूंकि हाफिज भी कट्टरपंथी मौलाना है और आतंकी भी है –इसके अलावा अन्य आतंकी संगठनों को भी मौलाना फज़लुर रहमान का साथ मिल सकता है, ऐसा मेरा मानना है –अभी तक फज़लुर रहमान ने भारत के साथ कोई दोस्ती की बात नहीं की है.

कभी यही इमरान खान भी नवाज़ शरीफ के खिलाफ “आज़ादी मार्च” ले कर गया था मगर नवाज़ ने कोई इस्तीफा नहीं दिया था और अब शायद इमरान भी नहीं देगा जब तक उस पर बाजवा का हाथ है –जो भी आएगा पाकिस्तान में तो कश्मीर का राग जरूर अलापेगा और आतंकियों को भी खुला छोड़ेगा –इसलिए हमें खुश होने की जरूरत नहीं है.

(सुभाष चन्द्र)

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