ये ई-मेल चुनाव आयोग को भेजी गई है

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    जिन्हें देश से प्यार है, जो राष्ट्रवादी हैं, इसकी कॉपी करके मेल करें –उनका ई-मेल पता है –
    [email protected]

    सेवा में,
    चुनाव आयोग,
    निर्वाचन सदन, दिल्ली

    विषय : लोकतंत्र को टी वी विज्ञापन के जरिये खतरा –इसे रोकिये

    महोदय,
    टी वी चैनल्स पर एक विज्ञापन दिया जा रहा है जिसमे कहा जा रहा है कि “इस बार जनसँख्या नियंत्रण कानून नहीं तो वोट नहीं” ये लोगों को जबरन वोट ना देने के लिए उकसाने का प्रयास है जो
    हमारे लोकतंत्र के लिए अत्यंत घातक है –वोट ना करने की ऐसी अपील “नोटा” प्रयोग करने से भी भयानक है जिसका लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा लोगों को वोट ना देने के लिए प्रेरित करना है.

    जनसँख्या कानून लाने का वादा तो राजनितिक दलों से माँगा जा सकता है मगर वोट ना देने के लिए अपील नहीं की जा सकती – कानून बन सकता है तो अगली संसद में बन सकता है, वर्तमान में
    नहीं –ये प्रचार घटिया मानसिकता के वो लोग कर रहे प्रतीत होते हैं जो EVM मशीनों पर रोज उंगली उठाते हैं और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को मलिन करने का देश में ही नहीं विदेश में भी
    प्रयास करते हैं – चुनाव आयोग इस विज्ञापन पर तुरंत रोक लगाए.

    इसके अलावा राज्यों के पिछले चुनावों में जो मुसलमानों और ईसाई समुदाय के लिए विशेष घोषणाएं कुछ राजनितिक दलों ने की थी, उनकी पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी कदम उठाये जाएँ — इस सम्बन्ध में मैंने पहले भी शिकायत की थी जिस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई –

    कृपया मेरी इस मेल की पावती भेजिए और “जनसँख्या कानून नहीं तो वोट नहीं” वाले विज्ञापन पर तुरंत रोक लगायें.

    आपकी सूचना के लिए निम्नलिखित ट्वीट प्रधान मंत्री को भेज दिया गया है -और इस मेल को फेसबुक पर पोस्ट करके प्रधानमंत्री को भी भेजा जायेगा “टीवी चैनल्स पर विज्ञापन दिया जा रहा है – इस बार जनसँख्या कानून नहीं तो वोट नहीं –ये नोटा से भी भयंकर प्रचार है जिससे लोग वोट ही ना दें –ये लोकतंत्र के लिए घातक है –चुनाव आयोग से कहिये इसे रोका
    जाये”


    (सुभाष चन्द्र)
    06/02/2019

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