समाजसेवा तो कोई पद्मश्री सुहासिनी मिस्त्री से सीखे

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    इस तस्वीर में चप्पल और सुती साड़ी में जिस महिला को आप देख रहे हैं उनका नाम सुहासिनी मिस्त्री… इन्हें इस साल पद्म श्री से सम्मानित किया गया है…
    70 साल की सुहासिनी मिस्त्री कोलकाता में रहती हैं… 23 साल की उम्र में सुहासिनी मिस्त्री ने अपने पति को खो दिया…. फिर सुहासिनी ने सब्जी बेचकर बच्चों को पाला….
    50 साल पहले जब पति का साथ छूटा था तो उस वक्त सुहासिनी के पास पैसे नहीं थे कि वो उनका इलाज करा सके… आज सुहासिनी मिस्त्री 70 साल की हैं और उनके चेहरे पर सुकून है…. सुकून इस बात का कि अब वह अपने खुद के बनाए हॉस्पिटल में गरीबों का इलाज कर पा रही हैं….
    दिलचस्प बात ये है कि उन्होंने ये सब सब्जी बेचकर और जूते पॉलिश कर जुटाए पैसों से किया है…. सुहासिनी मिस्त्री एक ऐसी शख्सियत हैं, जिन्होंने खुद गरीबी में अपना जीवन काटकर लोगों की सेवा की है….
    1996 में सुहासिनी ने गरीबों के लिए हॉस्पिटल बनाया… फिलहाल बंगाल में उनके दो हॉस्पिटल हैं….
    एक हॉस्पिटल इनके गांव हंसखाली में है जबकि दूसरा सुंदरबन में…
    पद्मश्री से सम्मानित किए जाने पर उन्होंने कहा कि मैं काफी खूश हूं…. और मैं दुनियाभर के हॉस्पिटल से अनुरोध करती हूं कि जिसे भी तुंरत इलाज की जरूरत हो वो उन्हें मना न करें…. मेरे पति की मौत इसलिए हो गई थी क्यों उनके इलाज के लिए हॉस्पिटल ने मना कर दिया था…. मैं नहीं चाहती किसी और के साथ ऐसा हो’’….
    नमन है ऐसे निस्वार्थ भाव के समाज सेवकों को… 🙏

    (संजीव त्रिपाठी)

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