सुनवाई जरूर जल्द पूरी हो राम मंदिर की

लेकिन पी एम् मोदी की तरह अपनी छुट्टियां कुर्बान करें मीलॉर्ड, जब तक फैसला हो, CBI केस पर रोक लगा दी जाये लखनऊ कोर्ट में !

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इसमें कोई शक नहीं है कि राम मंदिर की सुनवाई जल्दी पूरी होनी चाहिए और इसके लिए चीफ जस्टिस जोर दे रहे हैं कि 18 अक्टूबर तक बहस पूरी होनी चाहिए क्यूंकि अब बस 10 दिन बचे हैं सुनवाई के लिए.

केस को लटकाने वाली बात तो कतई नहीं होनी चाहिए लेकिन फिर भी अगर जरूरत पड़े तो सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई करने वाली बेंच अपनी दशहरे की छुट्टियां कुर्बान कर सकती हैं –ये छुट्टियां शायद 5 से 12 अक्टूबर तक होनी हैं .

जजों को एक बार तो सोचना चाहिए कि जब प्रधानमंत्री मोदी ने कभी कोई छुट्टी नहीं ली तो एक बार अदालत भी तो राम काज के लिए छुट्टियां न्यौछावर कर ही सकती है.

हमें ये भी नहीं भूलना चाहिए कि मीडिएशन में 3 महीने का समय व्यर्थ चला गया और अगर मीडिएशन के लिए मसला ना गया होता तो अब तक तो फैसला हो भी गया होता .

ये मेरी विनती है अदालत से कि सारी छुट्टियां बेशक न सही, कुछ अगर छोड़नी पड़ें सुनवाई के लिए तो छोड़ दीजिये और फैसला समय पर कीजिये –अदालत को ये भी याद रखना चाहिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत में ही नहीं अमेरिका में भी बार बार न्यायपालिका की तारीफ में कसीदे पढ़ रहे हैं और उसमे अटूट विश्वास जता रहे हैं.

एक बात और, जब तक राम मंदिर पर फैसला हो, तब तक के लिए लखनऊ कोर्ट में CBI की अपील के केस पर रोक लगा दी जाये क्यूंकि अगर फैसला राम मंदिर के पक्ष में आता है तो कथित बाबरी मस्जिद गिराने का मामला तो स्वतः समाप्त हो जाना चाहिए.

(सुभाष चन्द्र)

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