वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया मनाई जाती है. इस बार अक्षय तृतीया पर 16 साल बाद ग्रहों का शुभ संयोग बन रहा है. इस दिन मांगलिक कार्य, मुंडन, शादी विवाह, बहू का प्रथम बार चौका छूना, दुकान की ओपनिंग व्यापार का प्रारंभ और सारे शुभ कार्य किए जाते हैं. इस दिन गंगा-स्नान करने से सारे तीर्थ करने का फल मिलता है. मान्यता है शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी की पूजा करने और सोने की खरीदारी करने से घर में धन-धान्य की कमी नहीं रहती. अक्षय तृतीया सुबह 5 बज कर 40 मिनट से प्रारम्भ होगी और रात्रि 13 बजकर 17 मिनट तक इसका मुहूर्त रहेगा. इस बार 24 घंटे का शुभ मुहूर्त प्राप्त होगा लेकिन कुछ विशेष मुहुर्त में पूजा अर्चना और सोना खरिदारी करने से लाभ भी कई गुना बढ़ जाता है. पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 5:40 से 12: 17 बजे तक है और सोने की खरीदारी का शुभ मुहूर्त शाम 6 :26 से लेकर रात 11:47 बजे तक है. इस बार चार बड़े ग्रहों का बेहद दुर्लभ संयोग बन रहा है.

सूर्य, शुक्र, चंद्र, राहू अपनी उच्च राशि में होंगे ऐसे में कोई शुभ मुहुर्त न होने के बावजूद विवाह और तमाम शुभ काम किये जा सकेंगे. मान्‍यता है की  अक्षय तृतीया के दिन जो भी दान किया जाता है उसका पुण्‍य कई गुना बढ़ा जाता है. इस दिन अन्न-वस्त्र-भोजन-सुवर्ण और जल आदि का दान करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है. इस दिन अच्छे मन से घी, शक्‍कर, अनाज, फल-सब्‍जी, इमली, कपड़े और सोने-चांदी का दान करना चाहिए. कई लोग इस दिन इलेक्‍ट्रॉनिक सामान जैसे कि पंखे और कूलर का दान भी करते हैं.

अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु के छठें अवतार कहे जाने वाले भगवान परशुराम का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन को परशुराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन मां अन्नपूर्णा का जन्मदिन भी मनाया जाता है. मां अन्नपूर्ण के पूजन से किचन तथा भोजन स्वाद बढ़ जाता है. इस दिन महादेव ने भी माता लक्ष्मी की पूजा करने की राय दी थी. जिसके बाद से अक्षय तृतीया के दिन मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है. इस दिन त्रेता युग का भी आरंभ हुआ था.

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