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रविवार के दिन बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने अपनी कैबिनेट का विस्तार किया. बिहार सरकार में 8 नए मंत्री शामिल हुए जिन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई. बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन ने नरेंद्र नारायण यादव, श्याम रजक, अशोक चौधरी, बीमा भारती, संजय झा, रामसेवक सिंह, नीरज कुमार और लक्ष्मेश्वर राय के मंत्रीपद की शपथ दिलाई. इस दौरान  सिर्फ जेडीयू  कोटे के विधायकों को ही शपथ दिलाई गई.

शपथ कार्यक्रम को लेकर बीजेपी-जेडीयू की तकरार को साफ समझा जा सकता है क्योंकि मोदी मंत्रीमंडल में शामिल न होने का ऐलान करने के तुरंत बाद ही नीतीश कुमार का जेडीयू कोटे से मंत्री बनाना कई सवाल खड़े करता है. हालांकि इस मंत्रीमंडल में बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मौजूद थे. दरअसल, सियासी गलियारों में ये चर्चा है कि नीतीश कुमार जेडीयू के तीन सांसदों को मंत्री बनवाना चाहते थे लेकिन इस पर सहमति नहीं बनने की वजह से ऐन शपथ-ग्रहण के पहले जेडीयू ने मोदी सरकार को बाहर से समर्थन देने का ऐलान कर दिया.

नीतीश मंत्रिमंडल विस्तार के तहत जेडीयू कोटे से 8 विधायक, विधान पार्षदों को मंत्रिपरिषद में जगह दी गई है. इसके बावजूद अभी भी 11 पद खाली हैं जिसमें बीजेपी कोटे की एक सीट भी शामिल है. लेकिन जेडीयू-बीजेपी के बीच तनाव को देखकर फिलहाल ये मुमकिन नहीं लगता है कि नीतीश बीजेपी कोटे से किसी को मंत्री बनाएं क्योंकि केंद्र सरकार मे जेडीयू को सांकेतिक प्रतिनिधित्व मिल रहा था जिससे नाराज होकर नीतीश ने सरकार में शामिल होने से इनकार कर दिया था.

शपथ लेने वाले मंत्रियों के नाम

1. संजय झा

2. रामसेवक सिंह

3. श्याम रजक

4. बीमा भारती

5. डॉ. अशोक चौधरी

6. नरेंद्र नारायण यादव

7. लक्ष्मेश्वर राय

8. नीरज कुमार

नीतीश मंत्रीमंडल में शामिल होने वाले आठ नेताओं में तीन विधान पार्षद और पांच विधायक हैं. डॉ अशोक चौधरी, संजय झा और नीरज कुमार विधान पार्षद हैं जबकि फुलवारीशरीफ से विधायक श्याम रजक, आलमनगर के विधायक नरेन्द्र नारायण यादव, रुपौली की बीमा भारती, हथुआ के रामसेवक सिंह, लोकहा विधायक लक्षमेश्वर राय शामिल किए गए हैं.

नीतीश ने मंत्रीमंडल में सामाजिक तानाबाना बुनते हुए दलितों-पिछड़ों को ज्यादा प्रतिनिधित्व दिया है. शपथ लेने वाले मंत्रिपरिषद के नए सदस्यों में दो सवर्ण, दो दलित, दो अतिपिछड़ा और दो पिछड़ा वर्ग से हैं. नीतीश ने जब मोदी मंत्रीमंडल में अपने सांसदों को शामिल न करने का फैसला लिया था उस वक्त उन्होंने  इशारों इशारों में ये जता दिया था कि मोदी मंत्रीमंडल में इस बार अगड़ों को ज्यादा तरजीह दी गई है. इसी के काउंटर के तौर पर नीतीश ने तुरंत ही अपनी कैबिनेट का विस्तार कर बिहार विधानसभा चुनाव से पहले ही दलितों-पिछड़ों में जेडीयू का सामाजिक संदेश भेजने का काम किया है. नीतीश जानते हैं कि बिहार में इस समीकरण के बूते बीजेपी पर दबाव बनाया जा सकता है.

हालांकि, कैबिनेट विस्तार पर नीतीश कुमार का कहना है कि काफी समय से जेडीयू मंत्रियों का विस्तार नहीं हो सका था जिसे पूरा किया गया है और यह रूटीन काम है. उन्होंने कहा कि बीजेपी के साथ कोई मुद्दा नहीं है और सबकुछ सही है.

साल 2017 में बिहार में जेडीयू एलजेपी और बीजेपी के गठबंधन की सरकार बनाते वक्त मंत्रिमंडल में तीनों पार्टियों का कोटा तय हो गया था. विधानमंडल में सदस्यों की संख्या के लिहाज से जेडीयू को 20, बीजेपी को 14 और एलजेपी को एक मंत्रीपद तय हुआ था. अब बीजेपी फिलहाल अपने कोटे के खाली पड़े मंत्रीपद पर किसी को मंत्री बनाने के मूड  दिखाई नहीं दे रही है. बिहार के डिप्टी सीएम सुशील मोदी का कहना है कि इस पर भविष्य में फैसला लिया जाएगा.

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