हर साल चैत्र, आषाढ़, अश्विन और माघ महीनों में नवरात्र आते हैं. चैत्र और अश्विन माह की शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक चलने वाले नवरात्र का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व ज्यादा माना गया है.

शनिवार 6 अप्रैल से नौ दिनों तक यानी 14 अप्रैल तक चैत्र नवरात्र में देवी मां का आशीर्वाद पाने का भक्तों के पास सौभाग्य है. देवी मां को भक्तगण अपनी श्रद्धा,पूजा-अर्चना और पवित्र आचरण से प्रसन्न कर सकते हैं. घटस्थापना के साथ ही मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा शुरू हो जाएगी.

चैत्रमास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के पहले दिन घटस्थापना की जाती है. घटस्थापना के साथ ही माता की आराधना शुरू हो जाती है.

क्या है कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

शास्त्रों में कहा गया है कि घटस्थापना में मुहुर्त का खास ध्यान रखा जाता है क्योंकि कलश स्थापना के साथ ही नवरात्र पूजन आरंभ हो जाता है. घटस्थापना का सबसे शुभ  मुहूर्त 6 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 07 मिनट तक रहेगा जबकि अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 बजे से 12 बजकर 34 बजे तक है. वैसे इस साल घटस्थापना सुबह सूर्योदय से दोपहर दो बजकर 58 मिनट तक पूर्व प्रतिपदा तिथि में भी किया जा सकता है. 5 अप्रैल को शुक्रवार दोपहर 1 बजकर 36 मिनट पर प्रतिपदा तिथि लग रही है.

कलश स्थापना की पूजा सामग्री

मिट्टी का पात्र, आम के 5 पत्ते, नारियल, चुनरी, सिंदूर, फल-फूल, माता का श्रृंगार, लौंग, कपूर, रोली, साबुत सुपारी, चावल, अशोका फूलों की माला,  लाल रंग का आसन, जौ, कलश के नीचे रखने के लिए मिट्टी और  कलश.

कैसे करें कलश स्थापना ?

नवरात्रि की सुबह स्नान के बाद घर के पूजा स्थान में सबसे पहले जमीन पर माता की चौकी लगाएं. इसके बाद भगवान गणेश का स्मरण करें. एक दीपक में मां दुर्गा के नाम की अखंड जोत जलाएं जो कि पूरे नवरात्र तक जलती रहना चाहिए. मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालें और उसमें जौ के बीज डालें. इसके बाद कलश पर मौली बांधें और उस पर स्वास्तिक चिन्ह बनाएं. कलश पर कुछ बूंद गंगाजल की छिड़क कर उसमें दूब, साबुत सुपारी, अक्षत (चावल) और सवा रुपये चढ़ाएं. इसके बाद कलश के ऊपर आम या अशोक के 5 पत्ते लगाएं और नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर रखें. इसके बाद कलश को जौ वाले मिट्टी के पात्र के बीचोंबीच रख दें और माता के सामने व्रत का संकल्प लें.

कलश स्थापना के साथ ही देवी मां का आव्हान किया जाता है कि हे मां आप इन नौ दिनों तक मेरे घर में निवास करो और अपना आशीर्वाद दो.

कुशा की आसनी पर बैठकर चंदन या रुद्राक्ष की माला से चैत्र नवरात्र में 9 या कमसे कम 5 माला मां दुर्गा का जाप करना चाहिए. मंगल ग्रह की शांति के लिए प्रतिपदा को स्कंदमाता के स्वरूप की पूजा करनी चाहिए. मान्यता है कि शक्ति के रूप पूजा से देवी मां घरों में निवास कर अकूत कृपा प्रदान करती हैं.

साल की सबसे पहली नवरात्रि को हिंदू नव वर्ष भी मनाया जाता है तो महाराष्ट्र में इसे नव वर्ष के रूप में गुड़ी पड़वा कहा जाता है.

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