Chandrayaan-2: ISRO ने ढूंढ निकाला विक्रम लैंडर, ऑर्बिटर ने भेजी थर्मल तस्वीर

इसरो (ISRO) चीफ के. सिवन ने चंद्रयान 2 (Chandrayaan 2) को लेकर गुड न्यूज़ दी है. उन्होंने बताया कि चांद की सरज़मी पर विक्रम लैंडर (Vikram Lander) की सटीक लोकेशन पता चल गई है. विक्रम लैंडर से संपर्क करने की लगातार कोशिशें की जा रही हैं.

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Courtesy - Twitter
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इसरो (ISRO) चीफ के. सिवन ने चंद्रयान 2 (Chandrayaan 2) को लेकर गुड न्यूज़ दी है. उन्होंने बताया कि चांद की सरज़मी पर विक्रम लैंडर (Vikram Lander) की सटीक लोकेशन पता चल गई है. विक्रम लैंडर से संपर्क करने की लगातार कोशिशें की जा रही हैं.

इसरो चीफ के सिवन ने बताया, ‘चंद्रमा की सतह पर विक्रम लैंडर के लोकेशन का पता चल गया है. चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने लैंडर की एक थर्मल तस्वीर भेजी है.’

वहीं केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह  (Jitendra Singh) ने कहा कि भारत चंद्रमा (Moon) के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश बन गया है. उन्होंने इस ऐतिहासिक कामयाबी के लिए इसरो टीम को बधाई दी है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आशा करते हैं कि हम जल्द ही चंद्रयान-2 (Chandrayaan 2) के लैंडर विक्रम से संपर्क कर सकेंगे.

शुक्रवार-शनिवार रात को थी लैंडिंग

इसरो के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट चंद्रयान 2 को उस वक्त आघात पहुंचा था जब चंद्रमा की सतह से केवल 2.1 किलोमीटर पहले ही विक्रम लैंडर से संपर्क टूट गया था.

6-7 सितंबर की दरम्यानी रात चांद की सतह (Lunar Surface) पर चंद्रयान 2 के लैंडर Vikram को लैंड होना था, लेकिन 2.1 किलोमीटर दूर ही धरती पर स्थित इसरो के स्टेशन से उसका संपर्क टूट गया. जिसके बाद इसरो चीफ के. सिवन ने तब इसकी जानकारी दी थी कि चंद्रयान 2 के ‘विक्रम’ लैंडर के लूनर सर्फेस पर पहुंचने से 2.1 किलोमीटर पहले संपर्क टूट गया और डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है. लेकिन अब जबकि ऑर्बिटर ने विक्रम लैंडर को ढूंढ निकाला है तो इसरो में खुशी का माहौल है.

कैसे तय रास्ते से भटका लैंडर?

लैंडर विक्रम ने चांद से 30 किलोमीटर की दूरी पर अपने कक्ष से नीचे उतरते समय 10 मिनट तक सटीक रफब्रेकिंग हासिल की थी. इसकी गति 1680 मीटर प्रति सेकंड से 146 मीटर प्रति सेकंड हो चुका था. इसरो के टेलीमेट्री, ट्रैकिंग ऐंड कमांड नेटवर्क केंद्र के स्क्रीन पर देखा गया कि विक्रम अपने तय पथ से थोड़ा हट गया और उसके बाद संपर्क टूट गया.

ऑर्बिटर के कैमरे ने ढूंढा लैंडर

आर्बिटर में SAR (सिंथेटिक अपर्चर रेडार), IR स्पेक्ट्रोमीटर और कैमरे की मदद से 10 x 10 किलोमीटर के इलाके को छाना जा सकता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक लैंडर विक्रम का पता लगाने के लिए उन्हें उस इलाके की हाई रेजॉलूशन तस्वीरें लेनी होंगी.

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