अशोक तंवर के बगावती तेवरों से कांग्रेस में कोहराम, ऐन हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले दिया कांग्रेस से इस्तीफा

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Courtesy-Facebook

हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा है. हरियाणा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है.

हरियाणा में विधानसभा चुनाव को लेकर टिकट के बंटवारे के बाद कांग्रेस की अंतर्कलह उस वक्त खुल कर सामने आ गई थी जब अशोक तंवर ने बगावती तेवर दिखाए थे. अशोक तंवर अपने समर्थकों के साथ विरोध जताने के लिए दिल्ली तक आए थे और उन्होंने 5 करोड़ में टिकट बेचने का आरोप लगाया था.

लेकिन आज उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और ट्वीटर के जरिए इसकी जानकारी दी.  

अशको तंवर ने आरोप लगाया था कि हरियाणा में हुड्डा कांग्रेस के चलते नए लोगों को मौका नहीं मिल रहा है. उन्होंने कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर सभी जिम्मेदारियों से मुक्त करने का अनुरोध किया था. उन्होंने कहा, ‘मैंने पार्टी की सभी समितियों और जिम्मेदारियों से राहत देने के अनुरोध के साथ सोनिया गांधी को एक पत्र भेजा है. मैं एक साधारण पार्टी कार्यकर्ता के रूप में काम करना जारी रखूंगा.’

अशोक तंवर को पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की पसंद माना जाता है. कम उम्र में ही अशोक तंवर ने अपने राजनीतिक दम को नुमाया करते हुए हरियाणा कांग्रेस में तेजी से तरक्की की. जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) से एनएसयूआई की राजनीतिक करते हुए वो हरियाणा कांग्रेस में पहले सेक्रेटरी तो फिर अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचे. साल 2014 में उन्हें हरियाणा प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया.

दरअसल, अशोक तंवर को राजनीतिक सुर्खियां तब मिली जब उन्होंने सिरसा से साल 2009 में इनेलो उम्मीदवार डॉ सीताराम शर्मा को हराया. इस जीत ने उनका राजनीतिक कद रातोंरात बढ़ा दिया. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. उनकी अध्यक्षता में हरियाणा में कांग्रेस ने 2 लोकसभा चुनाव और 1 विधानसभा चुनाव लड़ा. लेकिन तीनों में ही हार मिलने से उन पर पार्टी का भरोसा कम होने लगा.

हालांकि उनके हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ रिश्ते अच्छे नहीं रहे. उन्होंने हरियाणा कांग्रेस को हुड्डा कांग्रेस बताया. इस बार भी टिकट बंटवारे पर उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी कोई राय नहीं गई.

ऐन विधानसभा चुनाव से पहले अशोक तंवर को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था. उनकी जगह शैलजा मिश्र को अध्यक्ष बनाया गया. जिस वजह से अशोक तंवर कांग्रेस के प्रचार और चुनाव से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल भी नहीं हो रहे थे.

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