अभी तो वैक्सीन शुरू हुई है:  वैक्सीन डिप्लोमेसी में भारत बना ब्रांड, चीन का बजा बैंड

जिस चीन पर डोनाल्ड ट्रम्प ने आरोप लगाया था कि उसने WHO के साथ मिल कर कोरोना कॉन्सपिरेसी की है, वहीं चीन भारत से कोरोना वैक्सीन की बिक्री की जंग में मात खा गया है..

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भारत आज की तारीख दुनिया का मेडिसिन डेस्टिनेशन है. भारत में न केवल दुनिया भर के लिये दवाइयों का निर्माण होता है अपितु दुनिया भर में भारत की दवाइयां खरीदी भी जा रही हैं. दवाइयों के क्षेत्र में भारत विश्वसनीयता का ब्रान्ड बन चुका है और उसकी यही छवि आज दुनिया भर में भारत की देशी वैक्सीन बेचने में लाभदायक सिद्ध हो रही है.

चीन को मिल रही है मात

कोरोना वैक्सीन डिप्लोमेसी में भारत लगातार चीन को शिकस्त दे रहा है और भारतीय वैक्सीन की डिमान्ड सारी दुनिया में लगातार बढ़ रही है. चीन से तुलना करें तो दुनिया के देश भारत की वैक्सीन की क्षमता से अधिक प्रभावित दिखाई दे रहे हैं. बताया जा रहा है कि जब भारत ने दुनिया भर में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और रेमडेसिवीर की सप्लाई की थी उस समय भारत के विश्वसनीय ट्रैक रिकॉर्ड से प्रभावित तमाम देश अब कोरोना वैक्सीन भी भारत की ही खरीद रहे हैं और चीन की छाती पर सांप लौट रहे हैं. खुशी की बात ये भी है कि भारतीय वैक्सीन की सफलता दर के प्रति भी सभी देश आश्वस्त हैं.

बढ़ रही है वैक्सीन की मांग

एक तरफ कोरोना संक्रमण कम होता जा रहा है, दूसरी तरफ भारतीय वैक्सीन की मांग लगातार बढ़ रही है.  भारत न केवल अनुदान के तौर पर कुछ देशों को वैक्सीन उपलब्ध करा रहा है बल्कि अब तो वह व्यावसायिक स्तर पर तेज होती मांग की आपूर्ति भी कर रहा है.

भारत की वैक्सीन के लिये हो रही है होड़

मन्त्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार सार्क देशों, बिम्सटेक सदस्यों के अतिरिक्त बहुत से अफ्रीकी और यूरोपीय देश के साथ ही अब मध्य व पूर्व एशिया के देश भी भारत से वैक्सीन पाने के लिये आपसी स्पर्धा कर रहे हैं. कई देश भारत से मांग कर रहे हैं कि दूसरों से पहले भारत कोरोना वैक्सीन उनको प्रदान करे.

 

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