3 मई की सुबह जब 175 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से ओडिशा में पुरी के समुद्री तट से फानी चक्रवात टकराया तब उसकी गर्जना और गति देखकर तबाही का अंदाजा लगाना बेहद आसान था. क्योंकि 20 साल पहले ओडिशा में आए सुपर साइक्लोन के तबाही के निशान और जख्म पूरी तरह मिटे नहीं थे. यही वजह थी कि फानी से निपटने के लिए ओडिशा सरकार, केंद्र सरकार, एनडीआरफ और सेना के साथ-साथ IRSO ने भी धरती-आसमान एक कर दिया था.

IRSO के सैटेलाइट ने ऐतिहासिक काम किया. वो काम जिसके लिए वो धरती की निगरानी करते हैं. अबतक के सबसे खतरनाक महाप्रचंड तूफान से IRSO के सैटेलाइट ने हजारों जिंदगियां बचाने का अभूतपूर्व काम किया है वर्ना एक राज्य राष्ट्रीय आपदा का शिकार घोषित किया जा चुका होता.

IRSO के सैटेलाइट ने ही सबसे पहले फानी तूफान के बनने का संदेश जारी किया. IRSO के संदेश को सुरक्षा और सावधानी के लिहाज़ से अमलीजामा पहनाने का काम किया ओडिशा सरकार ने. प्रशासन के सामने  72 घंटों के भीतर लाखों लोगों को न सिर्फ तूफान की तीव्रता और भयावहता के बारे में जागरूक करना था बल्कि लाखों लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर भी पहुंचाना था. ये स्थिति तभी साफ हो सकी जब कि IRSO के सैटेलाइट ने समय रहते तूफान का मिजाज और अंदाज भांप लिया. अगर सैटेलाइट से सटीक सूचना नहीं मिलती तो तूफान के गुजर जाने के बाद मौत का आंकड़ा सिर्फ दहाई में सिमटा नहीं होता. 72 घंटों के भीतर ही ओडिशा के लगभग 10,000 गांवों और 52 शहरी क्षेत्रों में बचाव अभियान तेजी से समय रहते हो गया.

इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) के 5 सैटेलाइट्स लगातार इस पर नज़र रखे हुए थीं. सैटलाइट हर 15 मिनट पर ग्राउंड स्टेशन को नया डेटा और लोकेशन भेज रहे थे जिससे लोगों को प्रभावित इलाकों से वक़्त रहते निकाले जाने में मदद मिली.सैटलाइटों के डेटा की ही वजह से IMDफानी के लैंडफाल करने वाले इलाके कासटीक पूर्वानुमान लगा सका. यही कारण रहा कि ISRO की वजह से ओडिशा, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल तकरीबन 12 लाख लोगों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट करने में कामयाब रहा.मौसम वैज्ञानिकों ने एक सप्ताह पहले दक्षिणी हिंद महासागर में निम्न दबाव के चलते चक्रवाती तूफ़ान बनने की चेतावनी जारी की थी.

ISRO के 5 सैटेलाइट ने बचाई हजारों जिंदगियां    

ISRO के Insat-3D, Insat-3DR, Scatsat-1, Oceansat-2 और मेघा ट्रॉपिक्स सैटलाइटों ने लगातार फानी और ओडिशा तट पर नजर रखी. Scatsat-1 से भेजे गए डेटा से चक्रवाती तूफान के केंद्र पर नजर रखी गई, वहीं Oceansat-2 समुद्री सतह, हवा की गति और दिशा के बारे में डेटा भेज रहा था.सैटेलाइट्स से मिले डेटा की ही वजह से तूफान से प्रभावित होने वाले 10 हजार गांवों और 52 शहरी इलाकों का पता चल सका. इसके बाद उन प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालने का काम शुरू हो सका.

अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स ने फानी तूफान से होने वाली तबाही से बचने की भारत की तैयारियों की तारीफ की है. मोदी सरकार और ओडिशा सरकार के बीच बेहतर तालमेल के साथ तूफान से निपटने को लेकर हुई मुस्तैद तैयारियों की द न्यूयॉर्क टाइम्स ने सराहना की है.

द वॉशिंगटन पोस्‍ट लिखता है कि बेहद शक्तिशाली तूफान फानी 130 मील प्रति घंटे की रफ्तार से ओडिशा से टकराया और उससे पहले ही लाखों लोगों को सुरक्षित ठिकानं पर पहुंचा दिया गया.

ओडिशा सरकार ने लोगों को तूफानी की गंभीरता समझाने के लिए26 लाख मैसेज भेजे. वहीं तरीबन43,000 वॉलेंटियर को आपदा स्थिति से निपटने के लिए तैनात रखा गया. साथ ही1,000आपातकालीन कर्मचारी भी हाईअलर्ट पर तैनात किए गए.

द न्यूयॉर्क टाइम्स लिखता है कि लोगों को जागरूक करने और चेतावनी देने के लिए पुरी के समुद्री तटों पर लगातार सायरन बजाकर अलर्ट जारी किया जाता रहा. वहीं लगातार तूफान का अलर्ट जारी कर लोगों को बचने के लिए सतर्क किया जाता रहा. इसके लिए टीवी विज्ञापन, पुलिस और पब्लिक एड्रेस सिस्टम का सहारा लेकर लोकल भाषा में संदेश लोगों तक पहुंचाया गया. इसके बाद 5 हजार शेल्टर होम बनाए गए. वहीं तकरीबन 12 लाख लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया गया.

तूफान के गुजर जाने के बाद ISRO, IMD, राज्य और केंद्र सरकार की तैयारियों को सलाम किया जाना चाहिए क्योंकि इनके आपसी तालमेल और सूझबूझ की वजह से पिछले 43 साल में पहली बार ओडिशा पहुंचने वाला महातूफान हजारों इंसानी जिंदगियों को लीलने में नाकाम रहा. यही वजह है कि विदेशी मीडिया इसे किसी विकासशील देश के रूप में बड़ी उपलब्धि बताकर भारत का बखान कर रहा है.

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