कर्ज के तूफान और घाटे के अंधड़ में उलझे जेट विमानों की राहत भरी लैंडिंग अब मुश्किल हो चली है क्योंकि बैंकों ने जेट एयरवेज के विमानों की उड़ानों के पर कतरने का काम किया है. बैंकों ने जेट एयरवेज़ कंपनी को 400 करोड़ रुपये के इमरजेंसी फंड देने से इनकार कर दिया है जिससे जेट एयरवेज के सामने शटडाउन का ही चारा बचा है.

जेट एयरवेज ने बैंकों से इमर्जेंसी फंड के रूप में 400 करोड़ रुपये की मांग की थी क्योंकि उस पर 8 हजार करोडज़ रुपये से ज्यादा का कर्ज हो चुका है. बैंकों के इनकार के बाद अब उड़ान भर रहे जेट एयरवेज़ के 5 विमान भी जमीन पर रहने को मजबूर हो जाएंगे.

कर्ज में डूबी जेट एयरवेज़ की हालत पर चिंता जताते हुए विजय माल्या ने ट्वीट कर सवाल पूछा कि आखिर क्या वजह है जो भारत में एयरलाइंस कंपनियों की खस्ता हालत हो रही है.

दरअसल, पिछले 21 साल में में देश में 12 एयरलाइंस कंपनियां बंद हो गईं इसमें शराब कारोबारी विजय माल्या की किंगफिशर एयरलाइंस भी शामिल है. माल्या ने किंगफिशर एयरलाइंस की स्थापना 2003 में की थी और साल 2012 में कर्जे के चलते इसे बंद कर दिया था. साल 1991 में सहारा ग्रुप ने एयरलाइंस के क्षेत्र में कदम रखा था लेकिन साल 2007 में जेट एयरवेज ने उसे खरीद लिया था.

जेट एयरवेज पहले ही अपने अंतरराष्ट्रीय परिचालन को 18 अप्रैल तक स्थगित करने की घोषणा कर चुका था. ET NOW  की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने इस मामले में दखल से इनकार कर दिया है और आज रात साढ़े दस बजे जेट एयरवेज की आखिरी फ्लाइट टेक-ऑफ करेगी.

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