डॉ जीतेंद्र सिंह ने 5 साल पहले की थी अनुच्छेद 370 हटने की भविष्यवाणी तो क्या अब पीओके की बारी?

27 मई 2014 को डॉ जितेंद्र सिंह ने कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाने की बात की थी

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Courtesy-Twitter

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा है कि पीओके को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाना है. उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने को मोदी सरकार की 100 दिनों की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया है. उन्होंने कहा है कि अब हमारा अगला एजेंडा पीओके को भारत से मिलाना है. उन्होंने ये भी कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर केवल मेरी या मेरी पार्टी की प्रतिबद्धता नहीं है बल्कि 1994 में पीवी नरसिंह राव के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा सर्वसम्मति से पारित संकल्प है.

डॉ जितेंद्र सिंह के कहे को सिर्फ बयान नहीं समझा जा सका है. जितेंद्र सिहं ने पांच साल पहले भी एक बात की थी जो कि पूरी हो गई. 27 मई 2014 को डॉ जितेंद्र सिंह ने कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाने की बात की थी. उन्होंने कहा था कि धारा 370 से कश्मीर का बहुत नुकसान हुआ है और कश्मीर के युवाओं को ये बात समझाने की जरूरत है. डॉ जितेंद्र ने कहा कि यही वजह है कि पीएम मोदी ने अनुच्छेद 370 पर एक बहस छेड़ने की बात की है.

डॉ जीतेंद्र सिंह ने कहा था कि खुद तत्कालीन पीएम नेहरू ने संसद में कहा था कि  अनुच्छेद 370 अस्थाई प्रावधान रहेगा और इसको ज्यादा लंबा खींचने की जरूरत नहीं है. वहीं संविधान कहता है कि ये अस्थाई है. डॉ जितेंद्र सिंह के बयान के बाद सियासी हड़कंप मच गया था. विपक्ष ने इसे खासा तूल दिया था. बीजेपी पर देश को तोड़ने और संविधान विरोधी माहौल पैदा करने के आरोप लगाए गए थे.

बहस छिड़ी भी. टीवी मीडिया से लेकर तमाम मंचों पर बहस हुई. यहां तक कि बहस का दौर इतना चला कि मोदी सरकार का पहले पांच साल का कार्यकाल भी पूरा हो गया. लोगों को लगा कि अनुच्छेद 370 सिर्फ घोषणा-पत्र की झांकी है. लेकिन मोदी सरकार ने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही 70 साल के इतिहास को बदल कर रख दिया. जिस धारा और जिस अनुच्छेद को छून में दूसरी सियासी पार्टियां डरा करती थीं उसे गृह मंत्री अमित शाह ने योजनाबद्ध तरीके से हटाकर सबको चौंका दिया. अब अनुच्छेद 370 के बाद बात पीओके की हो रही है और डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि मोदी सरकार का अगला ऐजेंडा पीओके को भारत में मिलाने का है.

ऐसे में क्या ये माना जाए कि डॉ जितेंद्र सिंह ने पीएम मोदी की मन की बात को आवाज़ देने का काम किया है. ठीक उसी तरह जैसे उन्होंने पांच साल पहले जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाने की बात की थी.

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