JNU के जरिये वामपंथी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं !

    (सुभाष चन्द्र)

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    इन छात्रों कोयाद रखना चाहिये कि तीन दशक पहले चीन में एक ‘थियानमेन स्क्वेयर’ हुआ था इसी तरह के हालात में..

    15 अप्रैल से 4 जून 1989 तक चीन के थियानमेन स्वॉयर में छात्रों का लोकतंत्र के लिए जबरदस्त विद्रोह हुआ जिसे चीनी फ़ौज ने उन पर गोलियां बरसा कर कुचल दिया –वो विद्रोह चीन ने अपनी सम्प्रभुता के लिए चुनौती समझा और चीन ने सारे विश्व को कह दिया था कि ऐसे विद्रोह को बलपूवर्क ही कुचला जायेगा.

    अब सीताराम येचुरी और डी राजा की दोनों वामपंथी पार्टियां चीन के ही भ्रूण से पैदा हुई हैं जिन्होंने कभी थियानमेन स्कॉयर पर चीनी दमन की निंदा नहीं की –वो JNU के अपने पालतू गुंडों को भड़का कर देश में अराजकता फैलाने कोशिश कर रहे हैं –फीस बढ़ोतरी के खिलाफ आंदोलन करना है तो आज़ादी के नारे क्यों लगा रहे है कथित छात्र और उनके प्रदर्शन में डी राजा की बीवी क्या कर रही थी.

    सभी वामपंथी दल CPM और CPI समेत JNU के जरिये अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं –एक रोचक तथ्य है इस बारे में –17वीं लोकसभा में केवल 5 वामपंथी सांसद चुनकर पहुंचे हैं –3 CPM के और 2 CPI के –इनमे केवल 1 CPM का केरल से है और बाकि सभी 4 तमिलनाडु से हैं.

    तामिलनाडु की DMK ने चुनाव आयोग को अपने खर्चे के हिसाब में बताया है कि उसने CPM को 10 करोड़ और CPI को 15 करोड़ रुपये का दान दिया था लोकसभा का चुनाव लड़ने के लिए, जिसका मतलब साफ़ है कि 4 सांसद भीख मिलने की वजह से ही लोकसभा पहुंचे अन्यथा शायद एक भी ना पहुँच पाता क्यूंकि फिर केरल से आने वाला भी ना आ पाता.

    जब चीन के छात्रों पर थियानमेन स्वॉयर में उनके आका चीन द्वारा गोली चलाना CPM और CPI को मंजूर था तो फिर JNU को अगर मोदी सरकार थियानमेन स्क्वायर बना कर छात्रों का फसाद शांत कर दे तो उन्हें कोई ऐतराज तो नहीं होगा ना —

    जब वामपंथी दलों का “धर्मपिता” चीन अपने देश की सम्प्रभुता की रक्षा के लिए छात्रों का दमन कर सकता है तो फिर भारत अपनी सम्प्रभुता की रक्षा के लिए इन JNU के गुंडों का दमन क्यूँ ना करे.

    मजे की बात है कि फीस बढ़ोतरी के खिलाफ JNU का कोई छात्र संगठन अदालत जा कर प्रशाशन के आदेश को चुनौती नहीं दे रहा-जबकि उनके पास प्रशांत भूषण जैसा काबिल वकील मौजूद है -उनका लक्ष्य JNU के जरिये देश में अन्य जगह अशांति फैलाना है.

    फरवरी, 2016 में राहुल गाँधी और केजरीवाल आये थे ऐसे आज़ादी के नारे लगाने वालों के साथ, आज भी कांग्रेस और
    वामपंथियों के साथ अब शव सेना की प्रियंका चतुर्वेदी भी इनके साथ खड़ी हो गई.

    ये सभी वामपंथी JNU के अपने गुंडों के लिए तड़प रहे हैं मगर इनकी आवाज़ हांगकांग के क्रांतिकारियों के लिए नहीं उठ रही जो चीन का दमन झेल रहे हैं अपनी आज़ादी के लिए.


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