PM मोदी का ‘शाही’ फैसला, आर्टिकल 370 ‘खल्लास’, 70 साल पुरानी ऐतिहासिक गलती का हुआ सुधार

इसी के साथ कश्मीर को लेकर चंद मुट्ठी भर अलगाववादियों और राजनीतिक दलों की सियासत का बोरिया-बिस्तर भी सिमट गया.

0
409

जम्मू-कश्मीर को लेकर तीन दिनों से चली आ रही सुगबुगाहट से जुड़े सारे सवालों के जवाब 5 अगस्त को संसद में मिल गए. जैसे ही गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य सभा में अनुच्छेद 370 हटाने के लिए संकल्प पेश किया वैसे ही 70 साल पुरानी गलती का भूल सुधार हो गया.

एक देश -एक झंडा, अब कश्मीर में फहरेगा तिरंगा

कश्मीर में धारा 370 के हटते ही देशभर में जश्न का माहौल पैदा हो गया. जगह जगह लोगों ने भारत माता की जय के नारे लगाए और तिरंगा फहराया. दरअसल अब जम्मू-कश्मीर में भी तिरंगा ही फहरेगा.

कश्मीर को शाह ने किया Modiफाइड

मोदी के न्यू इंडिया में नए कश्मीर को लेकर सरकार का विज़न सामने आया. इसी के साथ कश्मीर को लेकर चंद मुट्ठी भर अलगाववादियों और राजनीतिक दलों की सियासत का बोरिया-बिस्तर भी सिमट गया.  

गृह मंत्री अमित शाह के के प्रस्ताव रखने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अनुच्छेद 370 हटाने के लिए संविधान आदेश (जम्मू-कश्मीर के लिए) 2019 के तहत अधिसूचना जारी कर दी. इसी के साथ अब कश्मीर भी दिल्ली की तरह केंद्र शासित राज्य बन गया.
पीएम मोदी के शाही फैसले के मुताबिक अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश होंगे. जम्मू-कश्मीर दिल्ली और पुड्डुचेरी की तरह केंद्र शासित प्रदेश रहेगा जबकि लद्दाख की स्थिति चंडीगढ़ की तरह होगी और वहां विधानसभा नहीं होगी.

धारा 370 के हटने से कश्मीर को क्या फायदा?

अब देश का हर नागिरक कश्मीर में संपत्ति खरीद सकता है, नौकरी कर सकता है, विवाह कर सकता है और वहां जा कर बस सकता है. कश्मीर में अब नई फैक्ट्रियां और उद्योग लग सकेंगे जिससे वहां के युवाओं को रोजगार मिलेगा. कश्मीर में अब दुनिया भर की मल्टीनेशनल कंपनियां अपना प्रोजेक्ट लगाने के बारे में सोच सकती हैं जिससे कश्मीर की विकास की रफ्तार देश के साथ कदमताल करते हुए तेजी से आगे बढ़ेगी. जब विकास होगा तो शांति खुदबखुद होगी. जबकि अबतक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और कश्मीर के अलगाववादी नेता घाटी के युवाओं को रोजगार के नाम पर बंदूकें थमा कर सुरक्षा बलों की गोलियों का निशाना बनवाने में जुटे हुए थे.

कश्मीरी युवकों को लेकर मोदी का ‘शुद्ध कश्मीरी’ फैसला

मोदी सरकार ने अलगाववादियों के बहकावे में भटकने वाले कश्मीरी युवकों को देश की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए गैर सियासी फैसला लिया है जो कि शुद्ध कश्मीरी है. इसे तुष्टिकरण की नीति के तहत सियासी चश्मे से दूसरे राजनीतिक दल देख रहे हैं और विरोध कर रहे हैं. लेकिन कश्मीरियों की कश्मीरियत और जम्हूरियत के लिए ये शाही फैसला आने वाले समय में वहां की तस्वीर और तदबीर बदलने का काम करेगी.

मोदी-युग में कश्मीर को मिली असली आज़ादी

आज से 70 साल पहले संविधान में अनुच्छेद 370 जोड़ा गया था. 26 अक्टूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर के राजा हरि सिंह ने भारत के साथ विलय संधि पर दस्तखत किए थे.लेकिन आजादी के दो साल बाद तत्कालीन पीएम पंडित नेहरू के शासन के दौरान 17 अक्टूबर 1949 को अनुच्छेद 370 को पहली बार भारतीय संविधान में जोड़ा गया. इसके तहत कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया. इसी विशेष राज्य के दर्जे का अलगाववादी और कश्मीर में मौजूद राजनीतिक दल अबतक फायदा उठाते रहे. ये सभी चाहते थे कि कश्मीर एक ज़ख्म बन कर ताजा रहे ताकि उन्हें पाकिस्तान की हुकूमत से पैसा मिलते रहे और हिंदुस्तानी सरकारों की तरफ से सुरक्षा अलग.

370 के हटते ही अलगाववादियों की दुकानें हुईं बंद

अलगाववादियों की सुरक्षा पर हर साल करोड़ों रुपये का खर्च हिंदुस्तानी सरकारें उठाती रही हैं जिन्हें मोदी सरकार ने उस वक्त बंद कर दिया जब उनका नेटवर्क पाकिस्तान की टेरर फंडिंग के साथ जुड़ा मिला. पाकिस्तान, नेपाल और दूसरे देशों से हवाला के जरिए घाटी में पैसा भेज कर न सिर्फ युवकों को आतंकी बनाया जा रहा था बल्कि युवाओं को पत्थर मार बनाया जा रहा था. पूरी की पूरी एक पौध तैयार की गई जिसके जेहन में जेहाद और आजादी के नाम पर आतंकवाद की नस्ल तैयार की गई. लेकिन मोदी सरकार ने उन्हीं बरगलाए हुए युवकों को वापस मुख्यधारा में लाने और कश्मीर में विकास के जरिए दोबारा जन्नत बहाल करने सबसे ऐतिहासिक फैसला लिया. कश्मीर की आज़ादी का आज बड़ा दिन है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here