पहले बॉलीवुड कलाकार फिर बीजेपी ‘स्टार’ फिर बागी हुए बीजेपी के ‘शत्रु’ के लिए  इस बार लोकसभा चुनाव को लेकर स्थितियां पहले से ही साफ थीं. एनडीए ने बिहार में उम्मीदवारों का ऐलान किया तो उस लिस्ट में बीजेपी के कभी स्टार प्रचारक रहे शत्रुघ्न सिन्हा का नाम सुनाई नहीं दिया. बीजेपी ने ‘बिहारी बाबू’ यानी शत्रुघ्न सिन्हा को लोकसभा चुनाव 2019 का टिकट नहीं दिया. इस बार उनकी जगह पटना साहिब से कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को मैदान में उतारा गया है.

शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा था कि सिचुएशन चाहे कुछ भी हो लेकिन लोकेशन नहीं बदलेगी. यानी बीजेपी में शत्रुघ्न रहें या न रहें लेकिन वो चुनाव पटना साहिब से ही लड़ेंगे. ऐसे में अब पार्टी से टिकट न मिलने पर बहुत मुमकिन है कि शत्रुघ्न सिन्हा महागठबंधन के छाते के नीचे कांग्रेस या आरजेडी के टिकट पर पटना साहिब से चुनाव लड़ सकते हैं.

दरअसल, पटना साहिब को कायस्थ समाज का गढ़ और बीजेपी की पारंपरिक सीट माना जाता है. खुद शत्रुघ्न सिन्हा को कायस्थ होने का इस सीट पर फायदा मिला है. वो यहां से दो बार सांसद बने हैं. लेकिन अब उनके सामने रविशंकर प्रसाद होंगे जो कि खुद भी कायस्थ समाज से आते हैं. ऐसे में पटना साहिब सीट से मुकाबला बेहद कड़ा हो सकता है.

शत्रुघ्न सिन्हा को अहसास था कि इस बार पार्टी नेतृत्व उन पर न तो भरोसा करेगा और न ही मेहरबान होगा. हालांकि शत्रुघ्न सिन्हा के बगावती तेवरों के बावजूद पार्टी ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की. लेकिन पार्टी ने टिकट न देकर ये साफ कर दिया कि अब पार्टी को उनकी जरूरत नहीं है. दरअसल, शत्रुघ्न सिन्हा ने लगातार अपने बयानों से पीएम मोदी पर सवाल खड़े किए. यहां तक कि वो कोलकाता में ममता बनर्जी की मोदी विरोध में बुलाई गई महागठबंधन रैली का भी हिस्सा बने. महागठबंधन के मंच से शत्रुघ्न सिन्हा अपनी ही सरकार पर गरजे थे और कहा था कि देश बदलाव चाहता है. उन्होंने ये तक कहा था कि अगर आवाज उठाना बगावत है तो वो बागी हैं.

 शत्रुघ्न सिन्हा न सिर्फ बीजेपी के दूसरे असंतुष्ट नेता यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी की कोर टीम का हिस्सा रहे बल्कि वो दिल्ली में आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल की बुलाई रैली में भी शामिल हुए. शत्रुघ्न सिन्हा हर वो काम करते रहे जिससे बीजेपी भीतर ही भीतर सुलगती रही. लेकिन इन सबके बावजूद बीजेपी ने शत्रुघ्न सिन्हा को पार्टी से बाहर का रास्ता न दिखा कर ‘शहीद’ नहीं होने दिया.

अब शत्रुघ्न सिन्हा अगर पार्टी छोड़ते है तो यही संदेश जाएगा कि टिकट न मिलने से बिहारी बाबू ‘बागी’ हो गए. ऐसे में शत्रुघ्न सिन्हा को सहानभूति वोट मिलने की संभावना भी कम हो जाएगी. वैसे भी शत्रुघ्न सिन्हा के मोदी-विरोध को उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा माना जाता है. शत्रुघ्न सिन्हा के बगावती तेवरों की वजह को दरअसल केंद्र में मंत्री पद न मिलने की नाराजगी बताकर प्रचारित किया जाता रहा है. ऐसे में अब शत्रुघ्न सिन्हा भी नवजोत सिंह सिद्धू की राह पर चले हैं. देखना ये है कि इस बार शुरू हुई खुली अदावत कहां तक जाएगी.

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