देश में लोकसभा चुनाव के पहले चरण में 11 अप्रैल को वोटिंग होगी जबकि आखिरी चरण की वोटिंग 19 मई को होगी. 23 मई को नतीजे आएंगे. लोकसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा गरम है. नेताओं की ताबड़तोड़ रैलियां हो रही हैं. चुनावी मौसम में नेताओं और राजनीतिक पार्टियों का मिज़ाज समझा जा सकता है लेकिन जनता का मूड भी समझने की जरूरत है. कुछ अहम सवालों के जरिए सीएसडीएस-लोकनीति ने जनता का मूड समझने की कोशिश की है. सीएसडीएस-लोकनीति ने एक सर्वे कर जनता से जानने की कोशिश की है कि देश में देश में अगली सरकार किसकी बनेगी? साथ ही ये भी पूछा है कि देश की जनता कौन से नेता को अगले प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहती है?

सर्व से सबसे बड़ी बात ये निकल कर सामने आई है कि देश में 41 प्रतिशत लोग पीएम नरेंद्र मोदी को दोबारा पीएम बनने देखना चाहते हैं. जबकि सर्वे के मुताबिक 28% लोग राहुल गांधी को देश का पीएम बनते देखना चाहते हैं. वहीं 3% लोग मायावती और मात्र 2% लोग ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री पद के लिए अपनी पहली पसंद मानते हैं.

लोकसभा चुनाव को लेकर एकतरफ कांग्रेस राफेल डील को मुद्दा बनाकर जगह-जगह पीएम मोदी पर हमला कर रही है तो दूसरी तरफ राम मंदिर के मुद्दे पर बीजेपी पर हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण के आरोप लग रहे हैं. लेकिन सर्व के मुताबिक केवल 3 प्रतिशत लोग ही राफेल और राम मंदिर को महत्वपूर्ण मुद्दा मानते हैं. जबकि विकास को लेकर 33 फीसदी लोगों ने वोट डालने की बात की जबकि 25 फीसदी लोगों ने महंगाई के मुद्दे पर वोट डालने की बात कही.

हालांकि सर्वे के हिसाब से कांग्रेस के पक्ष में एक बात दिखती है कि जब लोगों से पूछा गया कि क्या आपको लगता है कि राफेल सौदे में सरकार ने कोई गड़बड़ी की है? तो 41 फीसदी लोगों का जवाब हां था जबकि 37 फीसदी लोगों ने राफेल डील में किसी तरह का घोटाला होने से इनकार कर दिया.

इसके बावजूद 46 फीसदी लोग ये मानते हैं कि मोदी सरकार को दोबारा मौका मिलना चाहिए जबकि 36 फीसदी लोग मोदी सरकार के सत्ता में आने को लेकर सहमत नहीं हैं.

साल 2009 के लोकसभा चुनाव में मनरेगा गेम चेंजर योजना थी. इस बार कांग्रेस ने न्याय योजना का ऐलान किया है. कांग्रेस का ये दावा है कि ये योजना गेम चेंजर साबित होगी. लेकिन सीएसडीएस-लोकनीति के सर्वे के मुताबिक 48 फीसदी लोगों को इस सर्वे के बारे में जानकारी नहीं हैं जबकि 52 फीसदी ने ये माना है कि वो इस योजना के बारे में जानते हैं.

ये सर्वे पहले चरण की वोटिंग मतदान से छह दिन पहले किया गया है. इस सर्वे में 19 राज्यों की 101 लोकसभा क्षेत्रों की 101 विधानसभा सीटों के 10,010 लोगों को शामिल किया गया है. ये सर्वे 24 से 31 मार्च के बीच किया गया है.

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