वाराणसी के रण में अब कांग्रेस आर-पार के मूड में है. पीएम मोदी के खिलाफ कांग्रेस अबतक का सबसे बड़ा दांव चलने की तैयारी में है. सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को पीएम मोदी के खिलाफ वाराणसी से उतारा जा सकता है. ये भी खबर है कि प्रियंका गांधी इस महामुकाबले के लिए तैयार हैं. लेकिन इस मामले में अभी परिवार की तरफ से हरी झंडी नहीं मिली है.

हाल ही में प्रियंका ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के चुनाव प्रचार की कमान संभालते हुए प्रयाग से बनारस तक की बोट यात्रा की थी. इस दौरान उन्होंने पीएम मोदी पर लगातार निशाना साधा था. यूपी में कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने में प्रियंका लगातार सक्रिय हैं. इसी दौरान उनसे एक समर्थक ने वाराणसी से चुनाव लड़ने का आग्रह भी किया था.

हालांकि कांग्रेस में एन्ट्री के वक्त ये कहा गया था कि प्रियंका गांधी वाड्रा चुनाव नहीं लड़ेंगीं. लेकिन अब लोकसभा चुनाव के आगाज के साथ ही प्रियंका की पीएम मोदी के खिलाफ उम्मीदवारी को लेकर कांग्रेस की रणनीति साफ हो जाती है कि मोदी के खिलाफ परिवार की जंग में प्रियंका को सबसे बड़ी भूमिका मिली है.

दरअसल जमीन घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय जैसी जांच ऐजेंसियों के प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा पर कसते शिकंजे के मद्देनजर कांग्रेस ने ये तुरुप का इक्का चला है. तभी न सिर्फ ईडी की पूछताछ के पहले दिन प्रियंका अपने पति रॉबर्ट वाड्रा को ईडी के दफ्तर खुद छोड़ने गई थीं जबकि उसके बाद ही उन्होंने दिल्ली में कांग्रेस के दफ्तर में महासचिव का पदभार संभाला था. पति रॉबर्ट वॉड्रा के साथ मौजूदगी दिखाकर प्रियंका ने ये संदेश देने की कोशिश की कांग्रेस उनके साथ  लगातार खड़ी हुई है और बीजेपी प्रियंका की मौजूदगी पर बड़े हमले नहीं कर सकी.

एक तरफ बीजेपी भ्रष्टाचार के मामले में रॉबर्ट वॉड्रा  और गांधी परिवार पर लगातार हमले कर रही है तो दूसरी तरफ पहली दफे कांग्रेस इस बार वॉड्रा से दूरी नहीं बना रही है और वॉड्रा के खिलाफ मोदी सरकार की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है.

अमेठी में नामांकन के वक्त भी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ रॉबर्ट वॉड्रा मौजूद थे जो कि साबित करता है कि कांग्रेस को कहीं न कहीं ये डर है कि अगर सत्ता में दोबारा मोदी सरकार आई तो वॉड्रा ही सबसे पहले सॉफ्ट टारगेट होंगे. ऐसे में इस बार वॉड्रा की राजनीतिक पर्देदारी की जगह उन्हें लगातार साथ लेकर पहरेदारी की जा रही है. ऐसे में प्रियंका गांधी के पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने से भले ही जीत हासिल न हो लेकिन भविष्य में वाड्रॉ के खिलाफ किसी भी कानूनी कार्रवाई पर पीएम मोदी को कठघरे में खड़ा कर सहानुभूति जरूर हासिल की जा सकेगी.

कांग्रेस की रणनीति ये भी है कि मोदी के उन्हीं के गढ़ में घेरा जाए. इससे पहले यूपी के विधानसभा चुनाव में भी प्रियंका गांधी ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा था कि यूपी को बाहर से किसी को गोद लेने की जरूरत नहीं है. प्रियंका का ये निशाना पीएम मोदी के उस बयान पर था जिसमें उन्होंने खुद को यूपी का बेटा बताया था.

बनारस में प्रियंका के चुनाव प्रचार के वक्त कांग्रेस ने जनता की नव्ज़ टटोलने की भी कोशिश की. उसी दौरान प्रियंका ने जिस तरह से बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन किए और शहर में रोड शो किया उसने प्रियंका की उम्मीदवारी को पुख्ता करने का काम किया.

अगर प्रियंका गांधी बनारस से चुनाव लड़ती हैं और इस सीट पर उन्हें समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और दूसरे दलों से समर्थन मिल जाता है तो ये लोकसभा का सबसे दिलचस्प मुकाबला हो सकता है. भले ही नतीजा कुछ भी रहे लेकिन राजनीतिक इतिहास के तमाम मुकाबलों की तरह इसे भी याद रखा जाएगा. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में पीएम मोदी ने आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल को 3 लाख 71 हजार 784 वोटों से हराया था. नरेंद्र मोदी को कुल 5 लाख 81 हजार 22 वोट मिले थे जबकि अरविंद केजरीवाल को 2 लाख 9 हजार 238 वोट मिले थे. वहीं तीसरे नंबर पर कांग्रेस उम्मीदवा अजय राय रहे थे जिन्हें केवल 75 हजार 614 वोट मिले थे.

फिलहाल पीएम मोदी की संसदीय सीट बनारस में विपक्ष के पास कोई भी बड़ा चेहरा ऐसा नहीं है जो कि उन्हें टक्कर दे सके. ऐसे में अगर कांग्रेस प्रियंका को मैदान में उतारती है तो मुकाबले को रोमांचक बनाने के लिए एसपी-बीएपसी भी जरूर अमेठी और रायबरेली की तरह यहां वाकओवर देने की कोशिश कर सकते हैं.

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