सौजन्य- फेसबुक साभार
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ऐन लोकसभा चुनाव से पहले लालू परिवार में सबकुछ ठीक दिखाई नहीं दे रहा है. पार्टी और परिवार की कलह उस वक्त खुलकर सामने आ गई जब आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजप्रताप यादव ने राष्ट्रीय जनता दल के संरक्षक के पद से इस्तीफा दे दिया है. तेजप्रताप के इस्तीफे के साथ ही आरजेडी में सियासी घमासान तेज होने की आशंका गहरा गई है. तेजप्रताप ने ट्वीट कर कहा है कि उन्हें नादान समझने वाले नादान हैं और वो ये जानते हैं कि कौन कितने पानी में हैं.

तेजप्रताप को कबतक आरजेडी मानेगा नादान?

तेजप्रताप की ये नाराजगी दरअसल हालिया तौर पर दर्ज एक आपत्ति मान कर हल्के में नहीं ली जा सकती है. तेजप्रताप अपने ही परिवार और अपनी ही पार्टी में अपने वजूद की जंग लड़ रहे हैं. जब उन्हें लगा कि उनके फैसलों पर पार्टी विचार नहीं कर रही है तो उन्होंने संरक्षक पद से इस्तीफा देकर अपने बागी तेवरों का पहला ट्रेलर जारी किया है. दरअसल, तेजप्रताप टिकट बंटवारे को लेकर नाराज हैं. वो अपने दो करीबियों के टिकट का पहले ही ऐलान कर चुके हैं और कई सीटों पर अपने प्रत्याशियों को टिकट दिलाना चाहते हैं. तेजप्रताप ने अपने समर्थक अंगेश कुमार को शिवरहर और चंद्र प्रकाश की जहानाबाद से उम्मीदवारी की घोषणा भी कर डाली थी.

तेजप्रताप अपनों को दिलाना चाहते हैं टिकट

इतना ही नहीं तेजप्रताप एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन दोनों उम्मीदवारों के नामों का ऐलान करने वाले थे. लेकिन ऐन मौके पर बिहार की पूर्व सीएम राबड़ी देवी और लालू यादव के दबाव के चलते प्रेस कॉन्फ्रेंस का इरादा टालना पड़ गया. लेकिन तेजप्रताप के तेवर आरजेडी के भीतर तेजस्वी के तेज को कम करने के लिए काफी हैं. हालांकि तेजप्रताप बार बार ये कहते हैं कि वो छोटे भाई के साथ हैं तो फिर सवाल उठता है कि तेजप्रताप की पसंद की आखिर अनदेखी की वजह क्या है?

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मुलायम परिवार की तरह लालू परिवार में बंटती सियासत

सिर्फ तेजप्रताप ही नहीं बल्कि मीसा भारती को लेकर भी पार्टी में सबकुछ ठीक नहीं है. तेजप्रताप अपनी बहन मीसा भराती को पाटलिपुत्र से उम्मीदवार बनाना चाहते हैं लेकिन तेजस्वी यादव और पार्टी इस सीट से मनेर के विधायक भाई वीरेंद्र को प्रत्याशी बनाना चाहते हैं. इसी तरह आरजेडी की स्टार प्रचारकों की लिस्ट में से मीसा भारती का नाम गायब बताया जा रहा है. वहीं तेजप्रताप यादव इस बार लोकसभा चुनाव में अपने मामा साधु यादव को वाल्किमिकी नगर से टिकट दिलाना चाहते हैं लेकिन आरजेडी की तरफ से फिलहाल इस पर कोई सहमती बनती नहीं दिख रही है.

यही वजह है कि तेजप्रताप पार्टी के भीतर अपने वर्चस्व और वजूद पर उठते सवालों से आहत हो कर इस्तीफा दे बैठे. साथ ही उन्होंने ये भी साफ कर दिया कि वो जानते हैं कि कौन कितने पानी में हैं.

‘टी विद तेजप्रताप कैम्पेन’ चला चुके हैं तेजप्रताप

तेजप्रताप के भीतर राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं ने प्याले में रखी चाय की तरह उबाल मारना शुरू कर दिया है. पीएम मोदी की चाय पर चर्चा की तर्ज पर तेजप्रताप अपने निर्वाचन क्षेत्र महुआ में ‘टी विद तेजप्रताप’ कैम्पेन चला चुके हैं. तेजप्रताप खुद को आरजेडी के ‘पोस्टर बॉय’ की तरह पेश करते रहते हैं और कुछ न कुछ अलग कर सुर्खियों में बने रहना उन्हें बखूबी आता है.

राजनीति से अलग रंग भी है तेजप्रताप का

तेजप्रताप अपने अलग अलग रूप और अंदाज के लिए जाने जाते हैं. वो मधुर बांसुरी बजाते हैं तो कभी शिव तो कभी कृष्ण का रूप रखकर गौशाला में गायो को बंसी सुनाते हैं. कभी वो वृंदावन-मथुरा में गोपनीय साधना कर शत्रुनाश की उपासना करते हैं तो कभी तलाक के लिए अर्जी लगा जाते हैं. अब तेजप्रताप का नया अध्याय बिहार में लालू परिवार के राजनीति-शास्त्र में किसी इम्तिहान से कम नहीं क्योंकि एक तरफ बीजेपी-जेडीयू का कॉम्बिनेशन एनडीए को मजबूत बना रहा है तो दूसरी तरफ महागठबंधन में कांग्रेस के साथ ही आरजेडी की सीटों पर सहमति का पेंच उलझा हुआ है.

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