वर्ल्ड कप में हाथ की चोट को दस्ताने में छिपाए टीम इंडिया के लिए खेलते रहे धोनी

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माही, एमएस, एमएसडी, कैप्टन कूल, धोनी…..ये सारे नाम एक ही खिलाड़ी के करिश्माई व्यक्तित्व की पहचान हैं. टीम इंडिया की बैक-बोन हैं महेंद्र सिंह धोनी. लेकिन अब सवाल उनके रिटायरमेंट को लेकर उठ रहे हैं. एक सुगबुगाहट है कि धोनी कब संन्यास लेंगे तो एक सवाल ये भी है कि धोनी अब संन्यास में इतनी देर क्यों कर रहे हैं?

दरअसल, ये विडंबना है कि कल तक जिस खिलाड़ी के शानदार खेल के सब लोग कायल हुआ करते थे तो एक वक्त बाद उसी के संन्यास को लेकर सवाल उठाने लगते हैं. भूल जाते हैं उस खिलाड़ी का योगदान….उसका रिकॉर्ड…..उसकी मेहनत……

माही ने टीम इंडिया को एक नहीं दो दो वर्ल्ड कप जिताए……माही भारतीय क्रिकेट में लीविंग लीजेंड हैं. तभी माही की ज़िंदगी की फिल्मी कहानी पर एक बायोपिक तक बनी जो कि सिल्वर स्क्रीन पर जबर्दस्त कामयाब रही. माही की बदौलत ही छोटे शहरों के युवाओं की आंखों में भी टीम इंडिया में आने का सपना पला. माही के बाद कई छोटे शहरों से खिलाड़ियों ने टीम इंडिया में दस्तक दी. ये माही की ही देन है जो छोटे शहरों के और मध्यमर्गीय परिवार के बच्चों के लिए हौसला और आइकॉन बने.

ये माही ही हैं जो आज भी विकेट के पीछे से टीम इंडिया का हौसला हैं. मैदान पर माही को टक्कर देने वाला विकेट कीपर फिलहाल टीम इंडिया में दूर दूर तक नहीं है. जिनको मौके मिले वो माही के पास तक नहीं फटक सके.

इस वर्ल्ड कप में भी माही ने आखिरी तक संघर्ष किया और टीम इंडिया के कप जीतने की उम्मीदें जिंदा रखीं लेकिन कभी कभी किस्मत बहुत कुछ कर जाती है. ये इंग्लैंड और न्यूजीलैंड से बेहतर कोई नहीं समझ सकता.

अब जबकि वर्ल्ड कप हो गया है तो हार की बजाए सबका ध्यान माही पर है. ये जानने और पूछने की कोशिश हो रही है कि धोनी कब संन्यास लेंगे. शायद धोनी अब खटक रहे हैं.शायद ये लग रहा है कि धोनी हटें तो ऋषभ पंत को उनकी जगह दें.यहां ये जान लेना जरूरी है कि धोनी ने अपनी जगह खुद बनाई थी.किसी के हटने पर वो नहीं जमे थे.होनी को अनहोनी में बदलने की उनकी काबिलियत ने ही धोनी को टीम इंडिया का करिश्माई क्रिकेटर बनाया है.

ऐसे में अब जब उम्र के साथ हालात बदल रहे हैं तो धोनी पर सबका ध्यान है. बहुत मुमकिन है कि अब टीम मैनेजमेंट सीधे तौर पर कुछ न कहे. हो सकता है कि वेस्टइंडीज दौरे की टीम में उन्हें जगह न मिले. उन्हें ड्रॉप कर दिया जाए. हो सकता है कि उन्हें शानदार फेयरवेल देने के लिए तैयार कर लिया जाए जैसा कि सचिन तेंदुलकर के साथ हुआ था. हो सकता है कि अचानक धोनी ही संन्यास का ऐलान कर दें. धोनी अचानक फैसला लेने और सरप्राइज करने के लिए ही जाने जाते हैं. लेकिन क्या धोनी के संन्यास लेने से टीम इंडिया में एक अच्छे विकेटकीपर की जगह भर सकेगी? कभी नही. ऐसा होता तो वर्ल्ड कप में हाथ में चोट के बावजूद धोनी खेल नहीं रहे होते. कोच रवि शास्त्री और कप्तान कोहली भी जानते थे कि धोनी चोटिल हैं लेकिन उनके जख्म के बावजूद धोनी को बिठाने का जोखिम कोई उठाना नहीं चाहता था. धोनी चोट के बावजूद खेले. हाथ में चोट होने की वजह से कभी स्टंपिंग तो कभी कैच भी छूटा  लेकिन धोनी अपने मजबूत इरादों से डटे रहे. हाथ में दर्द के बावजूद छक्का मारते रहे. लोग उनकी बैटिंग पर सवाल उठाते रहे और वो रन बनाते रहे. वर्ल्ड कप के दौरान टीम में चार-चार विकेट कीपर होने के बावजूद धोनी के करीब कोई ऐसा नहीं था जो कोहली-शास्त्री के भरोसे पर खरा उतरता. यही वजह रही कि धोनी हाथ की चोट को दस्ताने में छुपाए खेलते रहे क्योंकि टीम इंडिया को उनकी जरूरत थी. दस्तानों में चोट को छिपा कर वो टीम के लिए खेलते रहे. क्या ये जज्बा कोई और दिखा सकता था?  ऐसे में अब धोनी से संन्यास मांगने वालों से क्या बोला जाए.

लेकिन ऐसा लगता है कि टीम मैनेजमेंट के लिए धोनी अब चूके हुए योद्धा रह गए है जो कि छह या सात नंबर पर रन नहीं बना पा रहे हैं जिस वजह से टीम को नुकसान हो रहा है और अब वर्ल्ड कप में मिली हार के बाद मैनेजमेंट हर भरपाई का मन बना चुका है. ऐसे में बहुत मुमकिन है कि जिस खेल ने माही को महान बनाया उसे अलविदा कहने के लिए माही के बोल किसी दिन फूट पड़ें.

हर खिलाड़ी का एक समय होता है.धोनी का भी समय था. लेकिन आज अगर धोनी बाहर होते हैं या संन्यास लेते हैं तो भी ऐसा लगता है कि अगले वर्ल्ड कप में किसी डीआरएस के गलत फैसले या स्टंपिंग मिस होने पर यही आवाज़ आएगी कि, ‘धोनी होते तो ऐसा नहीं होता.’

बहरहाल, आपके रिकॉर्ड, आपका अच्छा खेल इतिहास का हिस्सा बनकर रह जाता है और उसी अतीत से जब आपके वर्तमान की तुलना होती है तो आप खराब फॉर्म और समय के चलते चुके हुए माने जाने लगते हैं.. क्रिकेट में आज के धोनी की तुलना पुराने धोनी से जबतक होती रहेगी उनके लिए खुद को फिर से साबित करने के लिए एक नहीं बल्कि कई इम्तिहानों से गुज़रना होगा. लेकिन इतना तय है कि धोनी की तरह छक्के मारने वाला बल्लेबाज तो मिल जाएगा लेकिन विकेट के पीछे रह कर 360 डिग्री पर चलने वाला कूल दिमाग कहां से मिलेगा?

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