#MeToo का पहला विकेट डाउन : अकबर का इस्तीफा

    0
    1052

    अब अकबर नहीं महान क्योंकि अकबर की राजनीतिक पारी का हो गया है अवसान. केंद्रीय राज्यमंत्री एमजे अकबर का राजनैतिक सफर समाप्त हुआ. उन्हें त्यागपत्र देना पड़ गया है.

    विदेश दौरे से लौटने के बाद 72 घंटों के भीतर राजनीतिक हालात ने करवट बदले और वो हुआ जिसकी उम्मीद कम की जा रही थी. अकबर ने इस्तीफा दिया तो इस्तीफे की मांग कर रहा विपक्ष खामोश हुआ. मगर अब वह यह कह कर फिर हमले करने वाला है कि आरोपी के इस्तीफे में आखिर इतनी देर क्यों लगी?

    जो सूत्रों ने बताया वही मान लें तो बीजेपी और सरकार ने शुरू में एमजे अकबर पर लगे आरोपों को व्यक्तिगत मामला बताकर इस्तीफे का दबाव नहीं बनाने का फैसला लिया था लेकिन सोशल मीडिया ने उन्हें ऐसा नहीं करने दिया. जिस तरह से पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले सोशल मीडिया पर सरकार को इस मामले में आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा था उसने पार्टी के सर्वोच्च नेता को हस्तक्षेप के लिये विवश कर दिया. पीएम मोदी की समझाइश का त्वरित प्रभाव देखा गया और अकबर ने इस्तीफा दे दिया.

    और इसी के साथ बुधवार याने कल 17 अक्टूबर, 2018 को एक साथ बने दो कीर्तिमान. प्रथम यह कि भारत में मीटू की बॉल पर गिरा पहला विकेट और दूसरा यह कि साढ़े चार साल के मोदी सरकार के कार्यकाल में किसी आरोप के कारण किसी मंत्री का यह पहला इस्तीफा है.

    वैसे समझाइश का कार्य तो पहले से चल रहा था. त्यागपत्र के एक दिन पूर्व मंगलवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अकबर से इस विषय को लेकर बाकायदा भेंट की थी. बताया जाता है कि इस मीटिंग में उन्होंने अकबर को पीएम मोदी की इच्छा के बारे में बता दिया था. यद्यपि दोनों के बीच हुई इस मीटिंग को सामान्य बताया गया और ऊपरी तौर पर इस बात से इनकार किया गया था कि पीएम मोदी ने उनतक कोई अपना संदेशा भेजा है. किन्तु बुधवार को जिस तरह अचानक अकबर ने आत्मसमर्पण किया तो स्पष्ट हो गया कि सर्वोच्च का संदेश भी सर्वोच्च ही है. अर्थात विदेश राज्यमंत्री के त्यागपत्र की इमला पीएमओ से लिखी गई थी.

    जैसा कि सर्वविदित है, 67 वर्षीय एमजे अकबर अंग्रेजी अखबार ‘एशियन एज’ के पूर्व संपादक हैं. सबसे पहले प्रिया रमानी ने उनके विरुद्ध आरोप लगाया था और बाद कुल 19 महिला पत्रकार भी अपनी शिकायतों के साथ खुलकर सामने आ गई हैं. ये महिला पत्रकार एक समय अकबर के साथ कार्यरत रही हैं. अकबर के विरुद्ध अब खुलकर तलवार लहराने वाली महिला पत्रकारों में फोर्स पत्रिका की कार्यकारी संपादक गजाला वहाब, अमेरिकी पत्रकार मजली डे पय कैंप और इंग्लैंड की पत्रकार रूथ भी डेविड शामिल हैं.

    अब अगर त्यागपत्र की बात करें तो कहानी असली ये है कि मध्यप्रदेश चुनाव सर पर है. और अकबर मध्य प्रदेश से ही राज्यसभा सांसद हैं. चाहे भाजपा हो या भाजपा के प्रवक्ता, सभी को अकबर के विषय पर संकट का सामना करना पड़ा है. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली सरकार इस ज्वलंत महिला मुद्दे पर बैकफुट में चली गई थी. अकबर की बलि तो देनी ही थी, सो दे दी और अकबर से कह भी दिया कि जो जैसा करम करेगा वैसा फल देगा भगवान्.

    (पारिजात त्रिपाठी)

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here