Mt Kailash :आखिर क्या है यह विचित्र रहस्य कैलाश पर्वत का?

0
23
सनातन संस्कृति के देश भारत में एक ऐसा पर्वत है जो आज भी संसार के लोगों के लिये एक रहस्य बना हुआ है. भगवान् भोलेनाथ का धाम कैलाश पर्वत हिंदू धर्म में परम आस्था का प्रतीक है. हिंदू पौराणिक कथाओं में इसकी जानकारी मिलती है कि यह पर्वत सृष्टि के निर्माता भगवान शिव का निवास स्थल है. शिव ने इसी पर्वत पर समाधि लगाई जहाँ वे सपरिवार विराजमान हैं.

विभिन्न धर्मों की मान्यताएँ और विश्वास

हमारे हिंदू धर्म की मान्यता के अतिरिक्त संसार के विभिन्न धर्मों में भी कैलाश जैसे पवित्र पर्वत को लेकर अलग-अलग मत और उनकी आस्था है. बौद्ध धर्म अनुयायियों के अनुसार ईश्वर के अलौकिक रूप में नेमचौक इसी पावन पर्वत पर विराजतें हैं. वहीं जैन धर्म का यह विश्वास है कि उनके जैन तीर्थकरों को निर्वाण का सौभाग्य यही प्राप्त हुआ था. वे इस पर्वत को अष्टापद कहकर पुकारते हैं.

कैसा स्वरूप है कैलाश का

कैलाश पर्वत दूर से देखने पर “शिवलिंग” जैसा दिखता है जिसे स्पष्ट रूप से अमरनाथ की यात्रा के दौरान तिब्बत की पर्वत श्रृंखलाओं से गुज़रने के समय ही देखा जा सकता है. इसके पश्चिम में मानसरोवर और दक्षिण में राक्षसताल झील है.

कैलाश है पृथ्वी का केन्द्र बिंदु

वैज्ञानिक कैलाश को इस धरती का केन्द्र बिंदू में मानते हैं. आपको बता दें कि कैलाश पर्वत को हिमालय का केंद्र बिंदू कहा जाता है जैसे नाभि शरीर का केन्द्र बिंदू है ठीक वैसे ही. हिमालय जो पृथ्वी के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव का मध्य है अथार्त केंद्र बिंदू है . कैलाश ब्रह्मांड का “अक्ष” कहलाता है.

कुछ अलौकिक बातें कैलाश पर्वत की

कुछ अनोखी बातें हैं इस अनोखे, रहस्यमयी पर्वत के बारे में जो हम आपसे साझा कर रहे हैं.
* यह वह स्थान है जहाँ धरती और आकाश का मिलन होता है.
* यह दसों दिशाओं का मुख्य बिंदू भी है. इसलिए इसे “अक्षमुंडी” भी कहा जाता है.
*बहुत से लोगो का कहना है कि इस पर्वत के इर्द-गिर्द एक विशेष प्रकार की दिव्य रोशनी फैली रहती है जो इसे और भी अलौकिक व विशेष बनाता है.
*जब आप मानसरोवर के पास खड़े रहेगें तो आपको इस पर्वत से “ऊँ” और “डमरू” की ध्वनि सुनाई पड़ेगी जो कोई भ्रम नही. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि तेज़ हवाओं के बर्फ के पहाड़ों से टकराने और बर्फ पिघलने के कारण ये ध्वनियाँ सुनाई पड़ती है जो कि अभी तक साबित नही हो पाया है. “ऊँ” का स्वर सुनाई पड़ना अभी तक एक रहस्य ही बना हुआ है .

आखिर क्या है रहस्य कैलाश का

अब इसकी ऊँचाई की बात करें तो इसकी ऊँचाई 21778 फीट है जो एवरेस्ट की ऊँचाई 29031 फीट से कम ही है और जो ये भी बताता है कि यह विश्व का सबसे ऊँचा पर्वत भी नही है. फिर आखिर ऐसा क्या है जो इसे रहस्यमयी बनाता है.
एवरेस्ट की ही तरह अब तक माउन्ट कैलाश पर भी कई पर्वतारोेहियों ने चढ़ाई की मगर आपको ये जानकर आश्चर्य होगा और थोड़े भय भी लगेगा कि जिसने भी कैलाश पर्वत पर चढ़ने का प्रयास किया वो या तो असफल रहा या वो कभी लौटा ही नही. सीधे शब्दों में कहें तो इस पर चढ़ाई का अर्थ मौत के मुँह में हाथ डालने जैसा है.
यह बता कर हम आपको बिल्कुल भी डरा नही रहे बल्कि आपको इस सत्य से अवगत कराना चाहते हैं कि हिंदू धर्म में ऐसा माना जाता है कि जो इंसान अपने जीवन-काल में सत्कर्म करता है उसे मृत्योपरांत कैलाश निवासी होने का सौभाग्य प्राप्त होता है . यहाँ सिर्फ अच्छी आत्माओं का ही निवास है. यह अलौकिक शक्तियों का (SUPER NATURAL POWER) केंद्र बिंदू है जहाँ जीवित अवस्था में पहुँचना संभव नही.

विभिन्न प्रचलित कथाएँ

कैलाश पर्वत के विषय में कई कथाएं प्रचलित हैं. जिनमें से कुछ एक का ज़िक्र हम आपसे यहाँ कर रहे हैं.
* रूस के Ernst Moldasev जो कि पेशे से एक Eye Specialits थे ने वर्ष 1999 में कैलाश पर्वत पर रिसर्च हेतु एक टीम बनाई थी जिसमें Zoologist, Physist और इतिहासकार मौजूद थे. रिसर्च के पश्चात वे इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि कैलाश एक पर्वत नही बल्कि मानव द्वारा निर्मित एक पिरामिड है जो प्राचीन समय में असंख्य छोटे-छोटे पिरामिडों से घिरा था परंतु उनकी यह थ्योरी उतनी सार्थक सिद्ध नहीं हो पाई.
* एक पर्वतारोही ने इस पर चढ़ाई करने का मन बनाया था. परन्तु उसका कहना था कि कैलाश पर ज़्यादा देर तक टिकना संभव ही नही चढ़ना तो बहुत दूर की बात है. उनका ये भी दावा है कि यहाँ एक प्रकार का मतिभ्रम उत्पन्न हो जाता है फलस्वरूप सही दिशा का पता लगाना भी मुश्किल हो जाता है.
* एक और पर्वतारोही Sergey Chistyakov भी बिना चढ़ाई किए ही लौट आए. उनके मुताबिक पर्वत के करीब पहुँचते ही उनका हृदय ज़ोरों से धड़कने लगा और वे स्वयं को बहुत कमज़ोर और असहज महसूस करने लगे. उन्हें लगा कि उनको इस पर्वत पर नही चढ़ना चाहिए और वे उल्टे पैर लौट आए. आश्चर्य की बात तो ये है कि वहाँ से वापस लौटते ही उनकी अवस्था पहले जैसी सामान्य हो गई.

कुछ अन्य अहम तथ्य

कुछ और आश्चर्यजनक फैक्ट्स भी हैं जिन्हें जानने के बाद आपकी आँखेंं आश्चर्य से फैल जाएगी.
* कुछ लोगों के अनुभव के अनुसार यहाँ वक्त पलक झपकते ही बीत जाता है जैसे जिन बाल और नाखून की लंबाई बढ़ने में सामान्यत: दो हफ्ते लग जाते हैं यहाँ लगभग 12 घंटे में ही इतने बढ़ जाते हैं.
* यहाँ Magnetic Compass भी कार्य नही करता. वैज्ञानिकों के पास भी इस रहस्य का कोई जवाब नही.
अब प्रश्न ये उठता है कि क्या ऐसा कोई भी नही जिसने इस पर्वत के शिखर को छुआ हो. सिर्फ एक ही अपवाद है. 11वीं शताब्दी में तिब्बत के एक योगी “मिलारेप” ने इस पर्वत की चोटी पर पहुँचने का साहस किया. कहते हैं इसके बाद इस पर्वत की स्थिति मेंं ही परिवर्तन हो गया.
इस पर्वत पर चढ़ने पर अब रोक लगा दी गई है क्योंकि भारत-नेपाल और तिब्बत में इसे आस्था का प्रतीक माना जाता है. ये देश इसे एक पवित्र पर्वत मानते हैं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here