Nepal: टीकाकरण कूटनीति का अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शन

दूसरे देशों की तरह नेपाल भी डिप्लोमसी सीख गया है और ये दुनिया के स्तर पर कोरोना की आपदा को अवसर बनाने की अच्छी कोशिश है उसकी..

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नेपाल की राष्ट्पति विद्या देवी भण्डारी ने ‘टीकाकरण कूटनीति’ को जारी रखते हुए ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वीतीय और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को एंटी-कोविड वैक्सीन भेजने का अनुरोध किया है| राष्ट्रीय कार्यालय के माध्यम से पत्र भेजा जा चुका है|
महारानी एलिजाबेथ द्वीतीय को पत्र रविवार को काठमांडू स्थित दूतावास द्वारा ब्रिटिश विदेश क्रार्यालय भेजा जायेगा|दूसरी ओर रूस के राष्ट्रपति को पत्र मॉस्को स्थित नेपाली दूतावास द्वारा विदेश मन्त्रालय भेजा जाना बाकि है|
इससे पहले नेपाल की राष्ट्रपति ‘वैक्सीन डिप्लोमेसी’ की शुरूआत भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोंविद को पत्र भेज के कर दी है|
29 जून को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से टेलीफोन वार्ता में 10 लाख वैक्सीन के सहयोग के लिये भी राष्ट्रपति ने सहयोग माँगा|चीन ने सहर्ष स्वीकारा| दो-तीन दिन में वैक्सीन नेपाल पहुँचने की उम्मीद जताई जा रही है|
रूस उत्पादित स्पतनिक-5 वैक्सीन की सहायता के लिये राृष्ट्रपति ने अनुरोध किया है| नेपाल सेवा विभाग ने भी इस वैक्सीन की आपातकालीन उपयोग की मंज़ूरी दे दी है|
राष्ट्रपति ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाईडेन से भी पत्राचार द्वारा वैक्सीन सहयोग की माँग की है| सूत्रों के अनुसार अमेरिका में नेपाल के राजदूत युवराज खातिवाड़ा ने अमेरिकी विदेशी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार इरविंग मसिंगा को पत्र भेजा है| पर इन सबमें समय लग सकता है|
राजयनिक विशेषज्ञ दिनेश भट्टराई ने कहा कि “संवैधानिक अध्यक्ष जब टीकों की आपूर्ति की पहल कर रहे थे तो देश के कार्यवाहक और विदेशमंत्री कहाँ थे|”
एक अन्य राजनयिक अर्जुनकांत मैनाली ने कहा कि वे राष्ट्रपति के इस कदम को ‘घरेलु खपत’ पर केंद्रित मानते हैं| यदि टीके के लिये नेपाल ने वास्तव में पहल की होती तो वे विदेश मंत्री होते| उन्होंने ये भी कहा कि क्या ये घरेलु राजनीति को मोड़ने का एक कदम है? इसे कहते हैं ‘नींद से जागना’|
राष्ट्रपति भंडारी के प्रेस विशेषज्ञ टीका ढकाल ने कहा कि राष्ट्रपति की कोशिश नेपाल सरकार और विदेश मंत्रालय से आगे नही बढ़ सकी है|”देर आये दुरूस्त आये” मुहावरा यहाँ कारगर सिद्ध नही हुआ|
कोरोना की दूसरी लहर ने नेपाल में संक्रमण और मृत्यु दर बढ़ा दी है| वेंटिलेटर,दवाईयों ,आक्सीजन के अभाव में लोगों का भरोसा सरकार पर से उठ रहा है|
हर जगह ‘कछुआ दौड़’ विजेता का कथन लागू नही होता| महामारी के प्रकोप की रोकथाम और नियंत्रण के लिये नेपाल की सत्तारूढ़ी सरकार को अपना ये रवैया बदलना होगा, कुर्सी का मोह त्याग कर राष्ट्रहित के बारे में सोचना होगा|
-अंजू डोकानिया (काठमान्डू ब्यूरो प्रमुख, न्यूज़ इन्डिया ग्लोबल)

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