New Zealand के लोगों ने मांगा अपनी मरजी से मरने का हक

न्यूजीलैन्ड के लोगों ने मांग की है कि जिस तरह से हमें अपने पैदा होने का हक नहीं है उसी तरह से हमें अपने मरने का भी हक नहीं किन्तु हमें हमारा हक दिया जाये..

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नई दिल्ली. यदि इंसान के पास पैदा होने का हक नहीं है तो कम से कम मरने का हक तो है ही उसके पास. लेकिन अफ़सोस की बात ये है जिस तरह जन्म लेने का हक छीना है भगवान जी ने, उसी तरह मरने का हक छीन लिया है कानून जी ने. कोई इन्सान न तो अपनी मरजी से मर सकता है न ही अपनी मरजी से पैदा हो सकता है. दुखद तथ्य ये है कि इंसान तो इच्छा से जी भी नहीं सकता. लेकिन आज इस जेट युग में इंसान ने अपनी मरजी से मरने का हक माँगा है. आज न्यूजीलैन्ड के लोग कानून जी से अपने इस नैसर्गिक अधिकार मांग कर रहे हैं.

दरअसल ये है यूथेनेसिया

भले ही इंसान अपनी मर्जी से जी सकता है लेकिन न वो अपनी मर्जी से पैदा हो सकता है न मर सकता है क्योंकि ये दोनों ही अधिकार उससे छीन लिए गए हैं. इसी की भरपाई के लिए एक हक आपको मिला है और वो है मांगने का हक. आप क़ानून से अपनी मरजी से मरने का हक मांग सकते हैं और ये हक आपको देने का केवल कानून के पास है. इस अपनी मरजी से मरने के अधिकार को यूथेनेसिया कहा जाता है. न्यूजीलैन्ड के लोग यूथेनेसिया का अधिकार चाहते हैं और इसके लिए वे कानून से मांग कर रहे हैं और मांग मनवाने के लिए पिछले 5 साल से अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं.

न्यूजीलैन्ड में जनमत संग्रह कराया गया 

न्यूजीलैंड में स्वेच्छा से मरने के इसी अधिकार को लेकर एक लंबी बहस चल रही है और यूथेनेसिआ काफी जोरों शोरों से देश के लोगों के बीच चर्चा और विवाद का विषय बना हुआ है. पिछले आम चुनावों में तो यह मुद्दा बना दिया गया था न्यूज़ीलैंड में और आखिरकार लोगों की मांग पर सरकार को इस विषय पर जनमत संग्रह भी कराना पड़ा था. इसी जनमत संग्रह के परिणाम से दुनिया को पता चला कि न्यूज़ीलैण्ड में पैंसठ प्रतिशत लोग यूथेनेसिआ चाहते हैं.

न्यूजीलैन्ड की सरकार कानून बनाने जा रही है 

देश में चल रहे यूथेनेसिया के विवाद को लेकर न्यूजीलैंड की सरकार को भी गंभीर होना पड़ा है. सरकार ने निर्णय किया है कि अपने आधे से अधिक नागरिकों की इच्छा को स्वीकार किया जायेगा और अब इसके लिए कानून भी बनाया जायेगा. न्यूजीलैंड में हुए यूथेनेसिया के जनमत संग्रह के दौरान लोगों ने खुलकर अपने विचारों को सामने रखा है. कानून बनाने के सरकार के निर्णय पर कार्यान्वयन होने के बाद न्यूजीलैंड भी कुछ उन देशों में शामिल हो जाएगा जहां डॉक्टर की मदद से कोई भी व्यक्ति इच्छामृत्यु के अधिकार का उपयोग कर सकता है.

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