NRC के बाद दूसरा बड़ा फैसला: 2 से ज्यादा बच्चे होने पर नहीं मिलेगी नौकरी

    अगर भारत को आर्थिक रूप से महाशक्ति बनना है तो उसे पहले जनसंख्या विस्फोट से निपटना होगा..

    0
    341

    देश में एनआरसी यानी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स की सबसे पहले शुरुआत असम से हुई. लाखों लोग ऐसे सामने आए जिनके नाम नागरिकता रजिस्टर में नहीं थे. सरकार के मुताबिक ये लोग अगर अपनी नागिरकता को साबित नहीं कर सके तो इन्हें या तो देश छोड़ना पड़ सकता है या फिर देश की बहुत सारी सरकारी सुविधाओं और अधिकारों से वंचित होना पड़ सकता है.

    खासतौर से ये लोग फिर चुनाव में वोट डालने के काबिल यानी योग् नहीं होंगे. एनआरसी के बाद अब असम सरकार ने दूसरा बड़ा फैसला राष्ट्रहित में किया है. असम की बीजेपी सरकार ने फैसला लिया है कि 2 से ज्यादा बच्चे होने पर सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी. असम कैबिनेट में जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में असम की बीजेपी सरकार ने ये बड़ा कदम उठाया कि 1 जनवरी 2021 से उन व्यक्तियों को सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी, जिनके दो से ज्यादा बच्चे हैं.

    असम सरकार के इस बड़े फैसले से देश की राजनीति और सामाजिक ढांचे में बड़ा बदलाव दिखेगा. ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या असम में बीजेपी सरकार के इस फैसले को बीजेपी के दूसरे शासित राज्यों में भी अमल में लाया जा सकता है? दरअसल माना जा रहा है कि दो से अधिक बच्चे के कानून को बीजेपी के दूसरे शासित राज्यों में भी लागू किया जा सकता है और दो से ज्यादा बच्चे रखने वाले मां-बाप सरकारी योजनाओं से वंचित हो सकते हैं.

    दरअसल, आप इसे एनआरसी की घटना से जोड़कर देख सकते हैं. असम में सबसे पहले एनआरसी लागू हुआ. दूसरे राज्यों में चुप्पी रही जहां कांग्रेस या फिर गैर बीजेपी सरकारें हैं. लेकिन एनआरसी को लेकर बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की तरफ से साफ बयान आए. हरियाणा सरकार ने कहा कि वो भी अपने राज्य में एनआरसी लागू करेगी. यूपी सरकार ने भी एनआरसी पर काम करने की बात की ताकि घुसपैठियों की पहचान हो सके. ऐसे में पूरी संभावना है कि जिन जिन राज्यों में बीजेपी की सरकार है वहां ये दो बच्चों का कानून लागू किया जाएगा.

    आपको याद होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से बढ़ती जनसंख्या पर चिंता जताई थी. उन्होंने दो बच्चों वाले परिवार को देशभक्त कहा था. अगर पीएम राष्ट्रवाद की खातिर आम जन से एक अपील कर रहे हैं तो ये दूसरे राज्यों के लिए भी है. ऐसे में बहुत मुमकिन है कि कोई समय सीमा तय कर दो से ज्यादा बच्चे होने पर लोगों को सरकारी सुविधाओं से वंचित होना पड़ सकता है.

    देखा जाए तो ये एक शुरुआत असम से हुई है और आने वाले समय में बीजेपी शासित दूसरे राज्यों से भी दो से ज्यादा बच्चों वाले मां-बाप को सरकारी सुविधाओं से वंचित किया जा सकता है ताकि देश में एक समान व्यवस्था हो.

    हां…आपको ये भी बता दें कि सरकारी लाभ सिर्फ नौकरियां ही नहीं होती हैं. बहुत मुमकिन है कि जो लोग नए कानून का पालन न करें और एक तय तारीख के बाद तीसरा-चौथा बच्चा पैदा करें तो उनके कई अधिकार भी रद्द किए जा सकते हैं.

    अगर ऐसी सख्ती न बरती जाए तो फिर बढ़ती आबादी को रोकना बहुत मुश्किल होगा. अगले 8 साल में भारत चीन को जनसंख्या में पछाड़ कर दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जाएगा. इस समय भारत की जनसंख्या 137 करोड़ मानी जा रही है. जबकि चीन की आबादी 143 करोड़ है. संयुक्त राष्ट्र की द वर्ल्ड पॉपुलेशन प्रॉसपेक्ट्स 2019 रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2019 से 2050 तक 27 करोड़ लोग बढ़ जाएंगे.

    ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि उन 27 करोड़ के रहने-खाने-पीने का इंतज़ाम कैसे होगा.
    आपको बताते हैं कि चीन ने किस तरह से जनसंख्या पर काबू पाया. चीन ने एक बच्चा की नीति शुरू की तब जाकर उसके देश में संतुलन बन सका. बाद में साल 2015 में उसे दो बच्चों की नीति में बदल दिया. लेकिन चीन ने तबतक बहुत हद तक जनसंख्या पर काबू पाया.

    बढ़ती जनसंख्या की वजह से अब देश और दुनिया के हालात ऐसे हो गए हैं कि प्रकृति भी हाथ जोड़ रही है. एक तरफ प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से इंसान जूझ रहा तो दूसरी तरफ आबादी के बोझ से न सिर्फ प्राकृतिक संसाधनों की कमी हो रही है बल्कि मनुष्य के कब्जे की सोच से धरती पर भी असर पड़ रहा है. अगर भारत को आर्थिक रूप से महाशक्ति बनना है तो उसे पहले जनसंख्या विस्फोट से निपटना होगा.

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here