देश में आखिरी चरण का मतदान बाकी है. 23 मई को सियासत की तस्वीर साफ हो जाएगी. आखिरी दो चरणों में अचानक ही पीएम मोदी के एक इंटरव्यू को लेकर कांग्रेस की बांछें खिल गई. कांग्रेस जो अब तक अपने नेताओं के बयानों की वजह से बैकफुट पर होती थी उसे पहली बार खुद उसके अनुसार पीएम मोदी की ही तरफ से फ्रंटफुट पर खेलने का मौका मिल गया.

पीएम मोदी ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में बालाकोट एयरस्ट्राइक का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि किस तरह हमले की उस रात मौसम खराब था. बारिश हो रही थी. इसके बावजूद उन्होंने कहा कि हमला होना चाहिए. हमले को टाला नहीं जा सकता. उन्होंने आगे कहा कि बारिश और खराब मौसम की वजह से भारतीय लड़ाकू विमान शायद पाकिस्तान के राडार पर नहीं आएंगे इससे एक फायदा होगा.

भले ही भारतीय लड़ाकू विमान पाकिस्तान के राडार पर नहीं आ सके लेकिन पीएम मोदी का ये बयान कांग्रेस के राडार पर जरूर आ गया. कांग्रेस इस इंटरव्यू को भुनाने में जुटी हुई है और चुटकी ले रही है. सोशल मीडिया पर पीएम मोदी के खिलाफ तंज कसने और मज़ाक करने का सिलसिला चल सा पड़ा है. कई सेलेब्रिटी भी इस मौके पर पीएम मोदी का मजाक उड़ा कर खुद को महान साबित कर रहे हैं. भले ही उन्हें खुद को फाइटर प्लेन और राडार की टेक्नीक की जानकारी न हों.

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि, ‘मोदी इतने बड़े रक्षा विशेषज्ञ हैं कि उन्होंने सोचा कि ऐसा काम करेंगे मौसम क्लाउडी है, रडार में नहीं आएंगे. ये रडार पर आ गए हैं, अब चाहें बारिश का मौसम हो या खुली धूप हो, सब समझ गए हैं कि इनकी राजनीति की सच्चाई क्या है.’

कांग्रेस पीएम मोदी के बयान से खुश है. कांग्रेस इस खुशफहमी में हैं कि पीएम मोदी अपनी ही बात में फंस गए. वर्ना अबतक कभी मणिशंकर अय्यर, शशि थरूर और सैम पित्रोदा कांग्रेस का काम बिगाड़ने का काम कर रहे थे.

लेकिन मोदी के इस इंटरव्यू को ध्यान से सुनने और निशाना बनाने वालों को जरा वो इंटरव्यू भी देखना चाहिए जिसमें वो बता रहे हैं कि किस तरह से वो शब्दों के जाल से खेलते हैं.

दरअसल, मोदी के इस बयान को उनकी राजनीतिक परिपक्वता का सबसे बड़ा उदाहरण मानना चाहिए. मोदी से बेहतर शब्दों से खेलना वर्तमान भारतीय राजनीति में किसी को नहीं आता है. इस बार मोदी ने जनता से दूसरे तरीके से कम्यूनिकेट किया है. कांग्रेस मोदी की इसी कम्यूनिकेशन स्किल से डरती है लेकिन इस बार समझ भी नहीं सकी.

दरअसल, पांच फेस के चुनाव हो चुके थे. आखिरी दो चरणों में मोदी ने बड़ी सफाई से बालाकोट एयरस्ट्राइक के मुद्दे को नया ट्विस्ट देकर जिंदा कर दिया. हालांकि यही कांग्रेस लगातार मोदी पर बालाकोट एयरस्ट्राइक के मामले में राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगा रही थी. लेकिन मोदी ने इस बार बालाकोट एयर स्ट्राइक  को लेकर पुरानी बातों के जिक्र नहीं किया. वो ये जानते हैं कि हर मुद्दे की अपनी तय सीमा होती है लेकिन पुराने मुद्दे को भी नया एंगल देकर फिर से भुनाया जा सकता है. इसी तरह उन्होंने बादलों वाले बयान का जिक्र कर बालाकोट  एयरस्ट्राइक को नया ट्विस्ट दे दिया.

मोदी जानते थे कि उनके बयान से विपक्ष में हल्ला मचेगा. कांग्रेस बेहद खुश हो जाएगी. लेकिन इन सबसे एक बार फिर चुनाव के केंद्र में मोदी होंगे तो साथ ही बालाकोट एयरस्ट्राइक का मुद्दा जनता की स्मृतियों में ताजा बना भी रहेगा. ताकि बाकी के दो चरणों के लिए भी मोदी और बीजेपी का काम आसान हो  जाए. कांग्रेस अब खुद ही बालाकोट एयरस्ट्राइक का प्रचार कर रही है. मोदी यही तो चाहते थे.

मोदी ये भी जानते हैं कि देश की जनता राष्ट्रवाद के बहाव में है और उसे राडार पर एयर स्ट्राइक की टेक्नीकल जानकारी की जरूरत नहीं है. जनता सिर्फ इतना जानती है कि आजादी के बाद आतंकवादियों को पाकिस्तान में घुसकर मारने का 56 इंच का सीना केवल मोदी ने ही दिखाया है. कांग्रेस मोदी का ये मास्टरस्ट्रोक समझ नहीं सकी और चुनावी बादलों में उलझ कर वोटरों को राडार पर पढ़ने में भूल कर गई. अब कांग्रेस खुद बालाकोट एयरस्ट्राइक को लेकर पीएम मोदी का प्रचार कर रही है.

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