27 मार्च को देश के प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संदेश के दौरान यह शुभ समाचार सुनाया. भारत का मिशन कामयाब रहा और भारत अंतरिक्ष का शक्तिमान बन गया.

भारत के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने अपने परिश्रम और दृढ़ संकल्प से भारत को अंतरिक्ष में भी सुपरपावर  बना दिया है. 1998 के बाद यह दूसरा मौका है जिसने जिसने दुनिया को चौंकाया है. जहां अमेरिका जैसे दुनिया के कुछ देश भारत से प्रतिद्वंद्विता का दबाव महसूस कर रहे हैं तो चीन जैसे कुछ देश ईर्ष्या से ग्रस्त हो गये हैं. मगर पाकिस्तान प्रतिद्वंद्विता और ईर्ष्या से भी नीचे भयभीत और सशंक हो गया है. अब जिद्दी पड़ौसी को लग रहा होगा कि वह पिद्दी पड़ौसी से ज्यादा कुछ भी नहीं.

अब रूस, अमेरिका और चीन वाले त्रिसदस्यीय अंतरिक्ष क्लब में चौथी शक्ति का प्रवेश हो गया है. और नये सदस्य भारत से आगे भी इसी तरह का कुछ करते रहने की छुपी उम्मीदें है कई देशों को.

300 किलोमीटर दूर तीन मिनट में  हासिल किये गए लक्ष्य ने भारत का कद आसमानी कर दिया. डीआरडीओ के भारतीय वैज्ञानिकों ने 300 किलोमीटर दूर लो अर्थ ऑर्बिट के एक लाइव सैटेलाइट को पर निशाना लगा कर मार गिराया. इस पूर्व निर्धारित लक्ष्य को ए-सैट याने एंटी सैटलाइट मिसाइल के जरिए मार गिराया गया. यह वस्तुतः एक बहुत ही कठिन मिशन था जिसे भारत की तकनीकी ताकत ने हासिल कर मिशन शक्ति को कामयाब कर दिया.

सैटेलाइट किसी भी देश की  वास्तविक लाइफ लाइन होती है. आने वाले समय में सैटेलाइट तथा सैटेलाइट विध्वंसक शक्ति ही दो राष्ट्रों के बीच यद्ध के विजेता का निर्णय करेगी. सैटेलाइट पर हमला करके किसी भी देश के मिसाइल आदि अस्त्र-शस्त्रों, युद्धपोतों एवं युद्धक विमानों सभी को अपने अपने स्थान पर ही निर्जीव किया जा सकता है. और इसके बाद उस देश पर कब्जा करना ज्यादा मुश्किल नहीं होगा. आज सैटेलाइट न केवल किसी भी देश के विद्युत संयन्त्र, बिजली, टीवी, मशीनों आदि को चला रहे हैं बल्कि वे सामरिक तौर पर भी अति-महत्वशाली हो गये हैं. आज का युग इसीलिये सैटेलाइट युग कहलाता है.

 आज बदले हुए अंतर्राष्ट्रीय हालात में मंडराते हुए सामरिक खतरों को नकारा नहीं जा सकता. इसलिये देश के मजबूत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मजबूर प्रधानमंत्रियों की कतारों से आगे निकल कर फैसले करने शुरू कर दिये हैं. ए-सैट मिसाइल के कामयाब परीक्षण की घोषणा ने विश्व बिरादरी में भारत को विशिष्ट स्थान प्रदान कराया है.

मिशन शक्ति के जरिये भारत ने अंतरिक्ष में भी अपने दुश्मनों पर हमला करने की तकनीक उपलब्ध कर ली है. किसी भी देश के साथ युद्ध में यह उपलब्धि भारत का पलड़ा भारी रखेगी. बढ़त दिलाएगी. इसरो और डीआरडीओ दोनों के परिश्रम और कौशल से कामयाब हुई मिशन शक्ति की सफलता ने सबसे ज्यादा पाकिस्तान को सदमा पहुंचाया है.

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